नंदा की चौकी पुल में धंसाव की असल वजह सामने, 80 मीटर लंबे पुल के नीचे सिर्फ 20 मीटर में सिमटी टौंस नदी
अस्थाई पुलिया की बची एप्रोच रोड और नदी किनारे बने गौशाला निर्माण ने बदली टौंस नदी की प्राकृतिक धारा

Round The Watch News: देहरादून-पांवटा साहिब पुराने राजमार्ग पर नंदा की चौकी स्थित टौंस नदी पर करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से बने नए पुल की एप्रोच रोड में निर्माण के महज 16 दिन बाद हुए धंसाव ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि पुल को यातायात के लिए खोलने से पहले बीएचयू के विशेषज्ञों द्वारा लोड टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा किया गया था, वहीं लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) ने एप्रोच रोड की भी तकनीकी जांच कराई थी। इसके बावजूद अचानक हुए धंसाव के कारणों को लेकर विभाग ने मौके पर विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों के सामने जो तस्वीर आई, उसने धंसाव की संभावित वजहों को काफी हद तक स्पष्ट कर दिया।
80 मीटर लंबे पुल के नीचे केवल 20 मीटर में बह रही थी नदी
अधिकारियों ने पाया कि नंदा की चौकी पुल की कुल लंबाई लगभग 80 मीटर है, लेकिन बारिश के दौरान भी टौंस नदी का वास्तविक बहाव करीब 20 मीटर के हिस्से तक ही सीमित रहा। यानी नदी का पानी पूरे पुल के नीचे समान रूप से नहीं फैला, बल्कि एक संकरे हिस्से से तेज गति से गुजरता रहा।
जिस स्थान पर एप्रोच रोड धंसी है, वहीं नदी का तेज बहाव सुरक्षा दीवार पर लगातार एकतरफा दबाव बना रहा था। निरीक्षण में यह भी सामने आया कि इस हिस्से में नदी अपनी प्राकृतिक दिशा में नहीं बह रही थी, बल्कि उसका प्रवाह मुड़ चुका था।
अस्थाई पुलिया के अवशेष भी बने वजह
जांच में पता चला कि पिछले वर्ष क्षतिग्रस्त पुल के दौरान बनाई गई अस्थाई पुलिया के लिए तैयार की गई एप्रोच रोड का कुछ हिस्सा अब भी नदी के किनारे दीवार की तरह मौजूद है। इन अवशेषों ने नदी के प्राकृतिक प्रवाह को प्रभावित किया और पानी की दिशा बदलने में भूमिका निभाई।
गौशाला निर्माण से और बदली नदी की दिशा
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने एक और महत्वपूर्ण कारण चिन्हित किया। एप्रोच रोड से पहले नदी की ओर एक गौशाला का निर्माण काफी आगे तक किया गया है। इस निर्माण के कारण नदी का पानी सीधे बहने के बजाय मुड़कर पुल की सुरक्षा दीवार की ओर आने लगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारी बारिश के दौरान जब टौंस नदी में जलस्तर बढ़ा तो पानी के निकलने के लिए केवल एक संकरा रास्ता बचा। इसी वजह से उस हिस्से में पानी का वेग सामान्य से कहीं अधिक हो गया।
नीचे से सुरक्षा दीवार को काटता हुआ पहुंचा पानी
निरीक्षण के दौरान सभी पहलुओं पर गौर करते हुए लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने पाया कि तेज बहाव के कारण पानी सुरक्षा दीवार के नीचे से रास्ता बनाते हुए एप्रोच रोड की नींव तक पहुंच गया। लगातार कटाव के चलते एप्रोच रोड के नीचे की मिट्टी खिसक गई, जिसके परिणामस्वरूप सड़क का हिस्सा धंस गया।
धारा को फिर प्राकृतिक स्वरूप देने की तैयारी
अधिकारियों का मानना है कि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए अस्थाई पुलिया की एप्रोच रोड के बचे हुए हिस्से को हटाना और नदी किनारे बने अवरोधों को हटाकर टौंस नदी की धारा को उसके प्राकृतिक स्वरूप में बहाल करना जरूरी है। इससे नदी का दबाव किसी एक हिस्से पर केंद्रित नहीं होगा और पुल की सुरक्षा भी बेहतर बनी रहेगी।
सूत्रों के अनुसार, लोक निर्माण विभाग ने इस दिशा में प्रारंभिक स्तर पर कार्रवाई भी शुरू कर दी है। हालांकि, धंसाव के वास्तविक कारणों और जिम्मेदारी तय करने के लिए तकनीकी जांच अभी जारी है।



