पौड़ी की युवती का यूट्यूब चैनल कर दिया डिलीट, हाई कोर्ट ने भी कर दी याचिका खारिज
कोर्ट ने अनुबंधीय विवाद में अन्य सक्षम विकल्प अपनाने का दिया आदेश

Amit Bhatt, Dehradun: उत्तराखंड हाई कोर्ट ने बिना नोटिस यूट्यूब चैनल हटाए जाने के खिलाफ दायर रिट याचिका को सुनवाई योग्य नहीं मानते हुए खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यूट्यूब एक निजी डिजिटल मंच है और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत ‘राज्य’ की श्रेणी में नहीं आता। इसलिए उसके खिलाफ संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दायर नहीं की जा सकती।
वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यूट्यूब और उसके उपयोगकर्ता के बीच संबंध सेवा की शर्तों (कॉन्ट्रैक्ट) पर आधारित होता है। यदि उस अनुबंध से संबंधित कोई विवाद उत्पन्न होता है तो उसका समाधान सार्वजनिक कानून (पब्लिक लॉ) के तहत रिट याचिका के माध्यम से नहीं किया जा सकता।
मामला पौड़ी गढ़वाल निवासी स्वाति उर्फ स्मृति नेगी की ओर से दायर याचिका से जुड़ा था। याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया था कि यूट्यूब को उनके हटाए गए चैनल, उस पर उपलब्ध सामग्री और लगाए गए कॉपीराइट स्ट्राइक हटाकर चैनल को पूर्व स्थिति में बहाल करने का निर्देश दिया जाए।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में कहा गया कि यूट्यूब ने तीन कथित कॉपीराइट स्ट्राइक का हवाला देकर उनका चैनल हटा दिया। आरोप था कि इस कार्रवाई से पहले न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर उपलब्ध कराया गया।
हालांकि, हाई कोर्ट ने इस दलील को रिट क्षेत्राधिकार के दायरे में स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि यह विवाद पूरी तरह अनुबंध संबंधी है और निजी पक्षों के बीच उत्पन्न ऐसे विवादों के निस्तारण के लिए संविधान के अनुच्छेद 226 का सहारा नहीं लिया जा सकता।
याचिका खारिज करते हुए अदालत ने याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दी कि यदि वह चाहें तो इस कॉन्ट्रैक्चुअल डिस्प्यूट के समाधान के लिए कानून में उपलब्ध अन्य उपयुक्त कानूनी उपायों का सहारा ले सकती हैं।
क्या हैं दूसरे कानूनी विकल्प?
सिविल कोर्ट में वाद (Civil Suit): यदि सेवा की शर्तों (Terms of Service) या अनुबंध के उल्लंघन का दावा हो तो संबंधित सिविल अदालत में मुकदमा दायर किया जा सकता है।
अनुबंध के अनुसार विवाद निपटान: यदि यूट्यूब/गूगल की सेवा शर्तों में मध्यस्थता (Arbitration) या किसी विशेष मंच पर विवाद सुलझाने का प्रावधान है, तो उसी प्रक्रिया का पालन किया जा सकता है।
यूट्यूब की अपील प्रक्रिया: कॉपीराइट स्ट्राइक या चैनल हटाए जाने के खिलाफ यूट्यूब के आंतरिक Appeal और Counter Notification तंत्र का उपयोग किया जा सकता है, यदि मामला कॉपीराइट विवाद से जुड़ा हो।
उपयुक्त सक्षम न्यायालय: यदि तथ्यों के आधार पर अनुबंध उल्लंघन, हर्जाना या अन्य निजी अधिकारों का प्रश्न बनता है, तो सक्षम सिविल न्यायालय या अन्य विधिक मंच का सहारा लिया जा सकता है।
ध्यान देने वाली बात: हाई कोर्ट ने अपने आदेश में किसी एक विशेष मंच का निर्देश नहीं दिया है। उसने केवल यह स्पष्ट किया है कि यह कॉन्ट्रैक्चुअल (अनुबंध संबंधी) विवाद है, इसलिए इसका समाधान कानून में उपलब्ध अन्य वैधानिक उपायों के माध्यम से किया जा सकता है, न कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका के जरिए।



