crimeEducationUttarakhand

यूटीईटी के फर्जी प्रमाणपत्र से 04 बने शिक्षक, अब होंगे बर्खास्त

दस्तावेज सत्यापन में खुला बड़ा फर्जीवाड़ा, बागेश्वर के दो और कपकोट के दो शिक्षक जांच में दोषी

Rajkumar Dhiman, Dehradun: प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक बनने के लिए लगाए गए यूटीईटी प्रमाणपत्रों की जांच ने शिक्षा विभाग में खलबली मचा दी है। दस्तावेज सत्यापन के दौरान एक के बाद एक सामने आ रहे फर्जीवाड़े में अब चार और शिक्षकों के प्रमाणपत्र कूटरचित पाए गए हैं। उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर के मूल अभिलेखों से मिलान में इन प्रमाणपत्रों में अंक और अन्य विवरणों में हेरफेर की पुष्टि हुई है। नए चार मामलों के सामने आने के बाद जिले में कूटरचित यूटीईटी प्रमाणपत्र वाले शिक्षकों की संख्या नौ हो गई है।

ताजा मामलों में बागेश्वर विकासखंड के दो और कपकोट विकासखंड के दो शिक्षक शामिल हैं। इससे पहले कपकोट में ही पांच शिक्षकों के यूटीईटी प्रमाणपत्र फर्जी पाए जा चुके हैं। यानी अब सामने आए नौ मामलों में सात कपकोट और दो बागेश्वर विकासखंड से हैं।

मूल अभिलेखों ने खोल दी पोल
फर्जीवाड़े का खुलासा उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी की ओर से उप शिक्षा अधिकारी प्राथमिक शिक्षा कपकोट और बागेश्वर को भेजे गए सत्यापन पत्रों से हुआ। परिषद ने संबंधित शिक्षकों के प्रमाणपत्र-सह-अंकपत्रों का अपनी मूल सारणियन पंजिका से मिलान किया। जांच में प्रमाणपत्रों पर दर्ज अंक और विवरण मूल अभिलेखों से अलग पाए गए। कुछ मामलों में तो प्रमाणपत्रों में दर्ज अनुक्रमांक तक परिषद के रिकॉर्ड में मौजूद नहीं मिले। परिषद ने ऐसे प्रमाणपत्रों का सत्यापन संभव नहीं माना और उन्हें कूटरचित यानी फर्जी करार दिया है।

पंकज के प्रमाणपत्र में अनुक्रमांक ही नहीं मिला
बागेश्वर विकासखंड के शिक्षक पंकज कुमार के यूटीईटी प्रथम-2024 प्रमाणपत्र की जांच में बड़ा अंतर सामने आया। प्रमाणपत्र पर दर्ज अनुक्रमांक और संबंधित विवरण परिषद की मूल सारणियन पंजिका में दर्ज नहीं मिले। परिषद ने साफ किया कि संबंधित अनुक्रमांक उसकी ओर से जारी ही नहीं किया गया। ऐसे में प्रस्तुत प्रमाणपत्र को पूर्णतया कूटरचित बताया गया है।

नेहा के अंकों में भी हेरफेर
बागेश्वर विकासखंड की ही नेहा के यूटीईटी प्रमाणपत्र में भी मूल अभिलेख से छेड़छाड़ सामने आई। परिषद की मूल सारणियन पंजिका के अनुसार पांच विषयों में उनके वास्तविक अंक क्रमश: 11, 09, 13, 10 और 10 हैं। जबकि उनके प्रस्तुत प्रमाणपत्र में इनसे अलग अंक दर्ज किए गए थे। इस अंतर ने प्रमाणपत्र की वास्तविकता पर सवाल खड़े कर दिए और परिषद ने इसे कूटरचित माना।

चंद्रप्रकाश के 61 अंक, प्रमाणपत्र में कुछ और
कपकोट विकासखंड के चंद्रप्रकाश आर्य के प्रमाणपत्र की जांच में भी अंकों का खेल सामने आया। परिषद की मूल सारणियन पंजिका के अनुसार उनके कुल अंक 61/150 हैं, जबकि प्रस्तुत अंकपत्र में अलग अंक दर्ज थे। मूल रिकॉर्ड और प्रमाणपत्र के बीच यह अंतर भी फर्जीवाड़े की पुष्टि का आधार बना।

प्रियंका का प्रमाणपत्र भी जांच में फर्जी
कपकोट विकासखंड की प्रियंका के यूटीईटी प्रमाणपत्र में भी गड़बड़ी पाई गई है। परिषद से कराए गए सत्यापन में प्रमाणपत्र मूल अभिलेखों से मेल नहीं खाया। इस तरह चार नए मामलों ने जिले में फर्जी यूटीईटी प्रमाणपत्रों के जरिए शिक्षक बनने के पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

नोटिस के बाद होगी बर्खास्तगी
जिला शिक्षा अधिकारी आसाराम चौधरी ने बताया कि परिषद से कराई गई जांच में जिले के अब तक नौ शिक्षकों के यूटीईटी प्रमाणपत्र कूटरचित पाए गए हैं। इनमें दो बागेश्वर और सात कपकोट विकासखंड के हैं। सभी संबंधित शिक्षकों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त अवसर दिया जा रहा है। दो मामलों में सुनवाई भी हो चुकी है।

उन्होंने बताया कि नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमानुसार संबंधित शिक्षकों को सेवा से बर्खास्त किया जाएगा। फिलहाल सभी मामले नोटिस अवधि में हैं।

फर्जी प्रमाणपत्रों की जांच से साफ है कि शिक्षक भर्ती में लगाए गए दस्तावेजों का मूल अभिलेखों से मिलान कितना अहम है। परिषद की सारणियन पंजिका ने प्रमाणपत्रों पर दर्ज कथित हेरफेर की परतें खोल दी हैं। अब निगाहें विभागीय सुनवाई पूरी होने के बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button