देहरादून में दो माइक्रो ब्रुअरीज समेत आठ बार-क्लबों पर छापा, 2.50 करोड़ का कारोबार पकड़ में आया
बीयर की बिक्री पर वैट जमा नहीं करने का मामला, बार संचालकों ने तत्काल जमा किए 11.50 लाख रुपये

Rajkumar Dhiman, Dehradun: राजधानी में कर नियमों की अनदेखी कर कारोबार करने वाले बार, क्लब, रेस्टोरेंट और बीयर उत्पादक इकाइयां राज्य कर विभाग के निशाने पर आ गई हैं। विभाग की आठ टीमों ने दो प्रमुख माइक्रो ब्रुअरीज और करीब आठ बार, क्लब व रेस्टोरेंट में एक साथ औचक जांच की। जांच में दोनों माइक्रो ब्रुअरीज का करीब 2.50 करोड़ रुपये का ऐसा कारोबार सामने आया, जिस पर कर देयता बनती है। दोनों इकाइयों ने वैट पंजीकरण नहीं कराया था और उत्पादित बीयर की बिक्री पर कर भी जमा नहीं किया जा रहा था। इसके अलावा जीएसटी रिटर्न दाखिल नहीं करने वाले बार संचालकों से 11.50 लाख रुपये का तत्काल भुगतान कराया गया। एक नामी बार-क्लब ने 33 लाख रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) रिवर्स करने की सहमति दी है।
आयुक्त कर के निर्देश पर आठ टीमों ने की कार्रवाई
आयुक्त कर प्रतीक जैन के निर्देश पर संयुक्त आयुक्त (कार्यपालक), राज्य कर, देहरादून अनुराग मिश्रा के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई। उपायुक्त अजय बिरथरे के नेतृत्व में कर निर्धारण की आठ टीमों ने अलग-अलग प्रतिष्ठानों में पहुंचकर अभिलेखों और कर अनुपालन की जांच की। इस दौरान वैट और जीएसटी अधिनियम के उल्लंघन से जुड़े कई मामले सामने आए।
वैट पंजीकरण के बिना बेच रहे थे बीयर
जांच में पता चला कि दोनों माइक्रो ब्रुअरीज ने वैट अधिनियम के तहत अनिवार्य पंजीकरण नहीं कराया था। इन इकाइयों में उत्पादित बीयर की बिक्री पर भी वैट जमा नहीं किया जा रहा था।
उपायुक्त अजय बिरथरे के अनुसार, प्रारंभिक जांच में दोनों इकाइयों का करीब 2.50 करोड़ रुपये का ऐसा कारोबार सामने आया है, जिस पर कर देयता बनती है। संबंधित बीयर उत्पादक इकाइयों के संचालकों ने नियमों की जानकारी नहीं होने की बात स्वीकार करते हुए बीयर की बिक्री पर नियमानुसार कर और ब्याज जमा करने की सहमति दी है।
बार और क्लबों में भी मिली कर संबंधी अनियमितताएं
जांच के दौरान कई बार और क्लब संचालकों के पास शराब की बिक्री के लिए वैट अधिनियम के तहत आवश्यक पंजीकरण नहीं मिला। संबंधित संचालकों ने पंजीकरण नहीं होने की बात स्वीकार की।
विभाग की जांच में कुछ बार संचालकों द्वारा रेस्टोरेंट सेवाओं से संबंधित जीएसटी रिटर्न दाखिल नहीं किए जाने का मामला भी सामने आया। इन संचालकों ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए करीब 11.50 लाख रुपये का भुगतान तत्काल कर दिया।
इसके अतिरिक्त एक नामी बार-क्लब में इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) के गलत तरीके से रिवर्सल का मामला सामने आया। संबंधित प्रतिष्ठान ने अगली मासिक जीएसटी विवरणी में 33 लाख रुपये का आइटीसी रिवर्स करने की सहमति जताई है।
पंजीकरण नहीं कराया तो लेट फीस और अर्थदंड
राज्य कर विभाग ने उन बार, क्लब और रेस्टोरेंट संचालकों को तत्काल वैट पंजीकरण कराने के निर्देश दिए हैं, जिन्होंने अब तक अनिवार्य पंजीकरण नहीं कराया है। ऐसे प्रतिष्ठानों के विरुद्ध नियमानुसार विलंब शुल्क और अर्थदंड की कार्रवाई की जा रही है।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना आवश्यक पंजीकरण कारोबार करने और वैट व जीएसटी नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों पर निगरानी जारी रहेगी। अन्य बार, क्लब और रेस्टोरेंट संचालकों के यहां भी इसी तरह की जांच और प्रवर्तन कार्रवाई की जाएगी।
राज्य कर विभाग के इस अभियान का उद्देश्य कर नियमों का पालन सुनिश्चित करना, कर देयता के मामलों की पहचान करना और राजस्व की चोरी पर अंकुश लगाना है।



