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अरब देशों में फंसे उत्तराखंडी नागरिकों की वापसी को एक्शन मोड में उत्तराखंड सरकार, ‘हेल्प डेस्क’ सक्रिय

राज्य और जिलों के साथ ही स्थानिक आयुक्त अजय मिश्रा को भी जिम्मेदारी, दूतावासों से सीधा समन्वय

Rajkumar Dhiman, Dehradun: ईरान–इजराइल संघर्ष के बीच मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। स्थिति को गंभीरता से लेते हुए उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश के प्रवासियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए व्यापक स्तर पर एक सुरक्षा तंत्र सक्रिय कर दिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर पूरे राज्य में मिडिल ईस्ट मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया जा रहा है, जिसके तहत राज्य सरकार अब पश्चिम एशिया में बसे हर उत्तराखंडी तक सीधी पहुंच बनाने में जुटी है।

हर जिले में बनेगी प्रवासियों की सूची, खाड़ी देशों में काम करने वालों पर विशेष फोकस
उत्तराखंड के हजारों युवा नर्सिंग, होटल इंडस्ट्री, सुरक्षा सेवाओं और निर्माण कार्यों में खाड़ी देशों—UAE, सऊदी अरब, कतर, कुवैत, ओमान आदि में काम करते हैं। मध्य पूर्व में युद्ध के हालात को देखते हुए शासन ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं कि वे अपने जिलों से बाहर काम करने वाले विशेषकर खाड़ी देशों (गल्फ कंट्रीज) में सभी प्रवासियों की सटीक व विस्तृत सूची तत्काल तैयार करें।

इस सूची में शामिल होगा:
नाम व उम्र
पासपोर्ट नंबर
कार्यस्थल व देश
कंपनी/संस्थान का नाम
परिवार का संपर्क
आपातकालीन नंबर
(इन आंकड़ों को प्रदेश स्तर पर एकीकृत कर एक केंद्रीय डेटाबेस तैयार किया जा रहा है।)

राज्य स्तरीय हेल्प डेस्क सक्रिय, विदेश मंत्रालय से सीधा संपर्क
प्रदेश सरकार ने देहरादून में मिडिल ईस्ट हेल्प डेस्क को 24×7 मोड में सक्रिय कर दिया है। यह हेल्प डेस्क सीधे भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के संपर्क में रहेगा और किसी भी आपात सूचना या संकट की स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देगा। मुख्यमंत्री कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि “हमें सुनिश्चित करना है कि मध्य पूर्व में स्थिति बिगड़ने पर उत्तराखंड का कोई भी प्रवासी असुरक्षित या जानकारी के अभाव में फंसा न रह जाए।”

स्थानिक आयुक्त अजय मिश्रा को जिम्मेदारी, दूतावासों से सीधा समन्वय
दिल्ली स्थित उत्तराखंड सदन में तैनात स्थानिक आयुक्त अजय मिश्रा को विशेष जिम्मेदारी दी गई है कि वे ईरान, इजराइल सहित सभी खाड़ी देशों के दूतावासों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखें। उनके माध्यम से दूतावासों से रीयल-टाइम अपडेट, सुरक्षा सलाह, निकासी योजना, आपात सहायता सुनिश्चित की जाएगी

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