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सिंचाई विभाग पर मुकदमा, कराने वाला वन विभाग, दो विभागों में टकराव से हड़कंप

रिजर्व फॉरेस्ट में सड़क कटान का मामला, अफसरों ने करनी चाही अपनी राह सुगम

Rajkumar Dhiman, Dehradun: रिजर्व फॉरेस्ट की भूमि पर अतिक्रमण के गंभीर मामले में सिंचाई विभाग पर मुकदमा दर्ज किया गया है। मुकदमा स्वयं वन विभाग ने दर्ज किया है। संभवतः यह पहली दफा है, जब वन विभाग ने किसी भूमाफिया या निजी व्यक्तियों की जगह सरकारी विभाग पर ही केस दर्ज कर दिया। इस कार्रवाई के बाद सरकारी मशीनरी में हड़कंप मचा है।

मामला चिलियानौला नगर क्षेत्र के पास है, जहां हैड़ाखान-दाड़िमी रोड से ऊपर लगभग 40 मीटर की ऊंचाई पर सिंचाई विभाग का कार्यालय स्थित है। आरोप है कि विभाग ने कार्यालय तक वाहनों की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए रिजर्व वन भूमि से होकर कच्चा रास्ता कटवा दिया। यह कार्य भारी मशीन की मदद से कराया जा रहा था।

शुक्रवार को यह मामला सोशल मीडिया पर उछलने के बाद वन विभाग हरकत में आया। शिकायत सामने आते ही वन क्षेत्राधिकारी तापस मिश्रा अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। विभागीय टीम के पहुंचने से पहले ही लोडर मशीन को वहां से हटा लिया गया, लेकिन तब तक करीब 37 मीटर लंबाई तक वन भूमि की कटान हो चुकी थी।

जांच में यह स्पष्ट हुआ कि सड़क कटान किसी निजी व्यक्ति द्वारा नहीं, बल्कि सिंचाई विभाग की ओर से कराया गया। इसके बाद वन विभाग ने इसे वन कानून का खुला उल्लंघन मानते हुए तत्काल निर्माण कार्य रुकवाया और विभाग के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली। साथ ही करीब 20 हजार रुपये का जुर्माना भी प्रस्तावित किया गया है।

वन विभाग का कहना है कि रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में किसी भी प्रकार की खुदाई, सड़क निर्माण या भूमि को नुकसान पहुंचाने से पहले विधिवत अनुमति लेना अनिवार्य है। बिना अनुमति किया गया कोई भी कार्य गैरकानूनी है और इसके लिए संबंधित विभाग या व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई तय है।

वन क्षेत्राधिकारी तापस मिश्रा ने साफ कहा कि वन भूमि पर किसी भी तरह का कब्जा, कटान या क्षति पहुंचाना अक्षम्य है। यदि सिंचाई विभाग को मार्ग बनवाना ही था तो पहले सक्षम स्तर से अनुमति लेनी चाहिए थी। नियमों की अनदेखी कर सीधे कटान कराना वन अधिनियम का उल्लंघन है और इसी आधार पर केस दर्ज किया गया है।

दूसरी ओर, सिंचाई विभाग ने अपने कदम को आवश्यकता आधारित बताया है। विभाग के अधिशासी अभियंता ऋषिराज चक्रपाणी का कहना है कि कार्यालय तक कोई सड़क नहीं है और विभागीय वाहनों को सड़क किनारे खड़ा करना पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अराजक तत्व कई बार वाहनों में तोड़फोड़ कर चुके हैं, यहां तक कि उनकी निजी कार का शीशा भी तोड़ा गया। इसी कारण कार्यालय तक वाहन पहुंचाने के लिए हल्का कच्चा रास्ता बनाया गया। उनका दावा है कि वन विभाग को इस बारे में अवगत भी कराया गया था।

अब यह मामला सरकारी विभागों के बीच नियमों और जिम्मेदारी के टकराव का रूप ले चुका है। एक ओर वन विभाग इसे अवैध निर्माण मानते हुए सख्त कार्रवाई पर अड़ा है, वहीं सिंचाई विभाग इसे सुरक्षा और आवश्यकता से जुड़ा कदम बता रहा है। आने वाले दिनों में जांच के बाद इस मामले में और कार्रवाई संभव मानी जा रही है।

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