डीआरडीओ विज्ञानी पर बिल्डर की एफआईआर काउंटर ब्लास्ट, हाई कोर्ट ने लगाई जांच पर रोक
कोर्ट ने कहा, पहले दर्ज मुकदमे में दबाव की प्रतिक्रिया लगती है शिकायत, प्रथम दृष्टया बदलने की भावना

Amit Bhatt, Dehradun: देहरादून के सहस्रधारा रोड स्थित एटीएस कॉलोनी विवाद में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने डीआरडीओ विज्ञानी अनिरुद्ध शर्मा और उनके परिवार को बड़ी राहत दी है। अदालत ने बिल्डर पुनीत अग्रवाल की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर को प्रथम दृष्टया “काउंटर ब्लास्ट” यानी बदले की कार्रवाई माना है। हाईकोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई तक जांच प्रक्रिया पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ में हुई। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड से यह प्रतीत होता है कि विवादित एफआईआर पहले से दर्ज मुकदमे की प्रतिक्रिया में दर्ज कराई गई है। ऐसे में अग्रिम आदेश तक मामले में कोई जांच न की जाए।
दरअसल, एटीएस कॉलोनी निवासी डीआरडीओ विज्ञानी अनिरुद्ध शर्मा ने 13 अप्रैल 2026 को रायपुर थाने में बिल्डर पुनीत अग्रवाल के खिलाफ मारपीट और गुंडागर्दी से जुड़ा मुकदमा दर्ज कराया था। इसके करीब एक माह बाद, 13 मई को पुनीत अग्रवाल की ओर से अनिरुद्ध शर्मा, उनकी पत्नी और माता-पिता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई।
याचिकाकर्ताओं की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि उनके खिलाफ दर्ज मुकदमा पूरी तरह से मनगढ़ंत कहानी पर आधारित है और यह पहले दर्ज कराए गए मुकदमे के दबाव में कराया गया है। अधिवक्ता ने अदालत को यह भी बताया कि शिकायतकर्ता ने पहले 15 अप्रैल को पुलिस में शिकायत दी थी और बाद में 27 अप्रैल को एसएसपी को प्रार्थना पत्र सौंपा। इसके बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष भी आवेदन किया गया।
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को यह भी अवगत कराया कि इसी विवाद से जुड़े एक अन्य मामले की सुनवाई पहले से हाईकोर्ट में चल रही थी, लेकिन उस दौरान शिकायतकर्ता ने इस कथित शिकायत का कोई उल्लेख नहीं किया। अदालत ने दलीलों में प्रथम दृष्टया दम पाते हुए राज्य सरकार और शिकायतकर्ता पक्ष को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, याचिकाकर्ताओं को दो सप्ताह में प्रत्युत्तर दाखिल करने का समय दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 1 जुलाई 2026 को होगी।
पुनीत अग्रवाल के खिलाफ 29 मई तक बलपूर्वक कार्रवाई पर रोक
इसी प्रकरण से जुड़ी दो आपराधिक रिट याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने देहरादून में एमडीडीए द्वारा स्वीकृत लेआउट प्लान, फलदार पेड़ों की कटाई और याचिकाकर्ता पुनीत अग्रवाल के खिलाफ गुंडा एक्ट की कार्रवाई पर आवश्यक दिशा-निर्देश/आदेश जारी किया।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने पूछा कि एटीएस कॉलोनी परिसर से जुड़े एक अन्य हिस्से के लेआउट प्लान को मंजूरी देने से पहले क्या अधिकारियों ने स्थल निरीक्षण किया था और क्या यह देखा गया था कि वहां फलदार पेड़ मौजूद हैं या नहीं। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि डीएफओ ने फलदार पेड़ों की कटाई की अनुमति किस आधार पर दी। कोर्ट ने संबंधित विभागों की पूरी फाइल तलब कर ली।
मामले में हस्तक्षेपकर्ता पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र डोभाल ने दलील दी कि ये विषय मूल याचिका का हिस्सा नहीं हैं। वहीं, याचिकाकर्ता पक्ष ने इसका विरोध करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट पूरे मामले की जांच करने का अधिकार रखता है।
सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि लेआउट क्षेत्र सील होने के कारण सोसायटी में पानी की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। इस पर अदालत ने एसएसपी द्वारा गठित समिति की प्रमुख जया बलूनी को तत्काल मौके का निरीक्षण करने और जल संस्थान के सहयोग से सुचारु जलापूर्ति सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।
हाईकोर्ट ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक को भी आदेश दिए कि वह एक टीम गठित कर मौके का निरीक्षण कराए और एसएचओ की ओर से बताए गए 22 फलदार पेड़ों के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट अगली सुनवाई तक अदालत में प्रस्तुत करे। मामले की अगली सुनवाई 29 मई 2026 को निर्धारित की गई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता पुनीत अग्रवाल के खिलाफ कोई भी बलपूर्वक कार्रवाई न की जाए।



