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आयुष्मान में बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक: तीन अस्पतालों की संबद्धता सस्पेंड, एक पर 86 हजार का जुर्माना

कैशलेस इलाज से इनकार, अवैध वसूली और गुणवत्ता मानकों में खामियां मिलने पर एसएचए का कड़ा एक्शन

Rajkumar Dhiman, Dehradun: प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई), अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना (एएयूवाई) और राज्य सरकारी स्वास्थ्य योजना (एसजीएचएस) के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों में अनियमितताओं पर राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण (एसएचए) ने सख्त रुख अपनाया है। लाभार्थियों को कैशलेस उपचार उपलब्ध न कराने, अवैध वसूली करने तथा स्वास्थ्य सेवाओं के निर्धारित मानकों का पालन नहीं करने के आरोपों में तीन अस्पतालों की संबद्धता तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी गई है। वहीं एक अस्पताल पर आर्थिक दंड लगाते हुए निर्धारित समय में कमियां दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।

कार्रवाई की जद में बरेली का एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज और देहरादून के ओजस्वी व अरिहंत अस्पताल आए हैं। वहीं बलूनी अस्पताल पर 86,250 रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

रेफरल मरीजों को लौटाने पर एसआरएमएस पर कार्रवाई
राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि उत्तराखंड के पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों से सरकारी अस्पतालों द्वारा रेफर किए गए मरीजों को एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज में भर्ती नहीं किया जा रहा है। जांच में यह भी सामने आया कि कई मामलों में वैध रेफरल पत्रों को स्वीकार करने के बजाय मरीजों को दूसरे केंद्रों से नया रेफरल लाने के लिए कहा गया।

जांच के दौरान चंपावत जिले के एक मरीज का मामला भी सामने आया, जिसे उप जिला चिकित्सालय टनकपुर से रेफर किए जाने के बावजूद भर्ती नहीं किया गया। नोटिस में मोरपाल कश्यप, लक्ष्मी देवी, सुरेश राम और सूरज गुप्ता सहित कई लाभार्थियों के मामलों का उल्लेख किया गया है।

इसके अलावा नैनीताल निवासी महेंद्र सिंह ने शिकायत दर्ज कराई कि उनके पिता के उपचार के दौरान, जबकि वे पीएम-जेएवाई योजना के पात्र लाभार्थी थे, अस्पताल ने करीब 1.44 लाख रुपये की वसूली की। शिकायत के अनुसार यह धनराशि अब तक वापस नहीं की गई है। प्राधिकरण ने अस्पताल से सात दिनों के भीतर जवाब मांगा है। निलंबन के दौरान अस्पताल नए आयुष्मान लाभार्थियों को भर्ती नहीं कर सकेगा, हालांकि पहले से भर्ती मरीजों का उपचार जारी रहेगा।

12 हजार रुपये की वसूली पड़ी भारी, ओजस्वी अस्पताल पर 60 हजार का दंड
देहरादून स्थित ओजस्वी अस्पताल की भी तीनों स्वास्थ्य योजनाओं के तहत संबद्धता तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी गई है। जांच में पाया गया कि अस्पताल ने एक लाभार्थी से उपचार के लिए 12 हजार रुपये वसूले थे, जबकि योजना के तहत उसे कैशलेस सुविधा मिलनी चाहिए थी।

हालांकि, अस्पताल ने बाद में यह राशि वापस कर दी, लेकिन प्राधिकरण ने इसे नियमों का उल्लंघन माना। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर (आरएमओ) की उपलब्धता भी मानकों के अनुरूप नहीं मिली। स्वास्थ्य प्रबंधन पोर्टल पर दर्ज चिकित्सक का मोबाइल नंबर सक्रिय नहीं पाया गया और निरीक्षण के समय संबंधित चिकित्सक मौजूद भी नहीं थे।

इन कमियों के आधार पर अस्पताल पर वसूली गई राशि का पांच गुना यानी 60 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। साथ ही 15 दिन के भीतर स्पष्टीकरण और जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है। एसएचए ने चेतावनी दी है कि स्थिति में सुधार नहीं होने पर आगे और कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

डायलिसिस यूनिट में गंभीर खामियां, अरिहंत अस्पताल भी निलंबित
अरिहंत अस्पताल के निरीक्षण में डायलिसिस सेवाओं और संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था से जुड़ी कई गंभीर कमियां सामने आईं। जांच टीम ने पाया कि डायलिसिस बेड के बीच आवश्यक दूरी का पालन नहीं किया जा रहा था।डायलिसिस प्रक्रिया की निगरानी के लिए कोई नामित मेडिकल ऑफिसर भी उपलब्ध नहीं था और रिकॉर्ड में चिकित्सकीय पर्यवेक्षण के हस्ताक्षर नहीं मिले।

निरीक्षण में यह भी सामने आया कि व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) की उपलब्धता और उपयोग संतोषजनक नहीं था। डायलिसिस मशीनों की संक्रमणमुक्त करने की प्रक्रिया, संक्रमण नियंत्रण प्रणाली तथा एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से आवश्यक सत्यापन में भी कमियां पाई गईं।

इसके अलावा लाभार्थी सहायता केंद्र और सूचना प्रदर्शन से संबंधित व्यवस्थाएं भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिलीं। अस्पताल को 15 दिनों के भीतर सुधारात्मक रिपोर्ट, संक्रमण नियंत्रण संबंधी रिकॉर्ड और अद्यतन मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। निलंबन अवधि में नए लाभार्थियों की भर्ती पर रोक रहेगी।

बलूनी अस्पताल को 15 दिन का अल्टीमेटम, जुर्माना भी
बलूनी अस्पताल के खिलाफ जांच में एक आयुष्मान लाभार्थी से दवाइयों और डायग्नोस्टिक जांच के नाम पर 17,250 रुपये वसूलने का मामला सामने आया। अस्पताल ने धनराशि वापस करने का दावा किया, लेकिन इसकी पुष्टि के लिए कोई रसीद, बैंक ट्रांजेक्शन या अन्य दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।

प्राधिकरण ने इस मामले को गंभीर मानते हुए अस्पताल पर 86,250 रुपये का जुर्माना लगाया है। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में रैंप की व्यवस्था, आईसीयू की साफ-सफाई, हाउसकीपिंग तथा तीमारदारों के लिए उपलब्ध सुविधाओं में भी खामियां पाई गईं। इसके अलावा आईसीयू में ऑक्सीजन, एयर और सक्शन की अनिवार्य पाइपलाइन व्यवस्था को भी मानकों के अनुरूप सुधारने के निर्देश दिए गए हैं।

एसएचए ने अस्पताल को 15 दिनों के भीतर सभी कमियां दूर करने का अंतिम अवसर दिया है। निर्धारित अवधि में सुधार नहीं होने पर अस्पताल की संबद्धता निलंबित करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

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