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उत्तराखंड में मानव बनने की राह पर बढ़ा सलाउद्दीन, STF जांच में चौंकाने वाले खुलासे

गदरपुर से गिरफ्तार कट्टरपंथी युवक की जांच में गंभीर बातें आई सामने

Rajkumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखंड एसटीएफ ने गदरपुर से जिस कट्टरपंथी युवक सलाउद्दीन को गिरफ्तार किया, उसकी जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। प्रारंभिक जांच और पूछताछ में संकेत मिले हैं कि सलाउद्दीन कट्टरपंथी विचारधारा से इस हद तक प्रभावित हो चुका था कि वह खुद को एक बड़े मिशन का हिस्सा मानने लगा था और कथित तौर पर ‘फिदायीन’ या मानव बम बनने की मानसिकता विकसित कर रहा था।

एसटीएफ की जांच के अनुसार, आरोपी राष्ट्रविरोधी गतिविधियों की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा था। उसके मोबाइल फोन, इंटरनेट मीडिया अकाउंट्स और डिजिटल गतिविधियों की पड़ताल में कई ऐसे सुराग मिले हैं, जो उसे उग्रपंथी नेटवर्क और संदिग्ध संपर्कों से जोड़ते हैं। एजेंसी अब उसके अंतरराज्यीय, विदेशी और संभावित सीमापार कनेक्शन की गहन जांच कर रही है।

कट्टरपंथी सोच की ओर कैसे बढ़ा सलाउद्दीन
एसटीएफ सूत्रों के अनुसार पूछताछ में सामने आया है कि उत्तराखंड में मस्जिदों और मजारों पर हुई सरकारी कार्रवाइयों को लेकर सलाउद्दीन के मन में नाराजगी पैदा हुई थी। इसी दौरान वह इंटरनेट के माध्यम से कट्टरपंथी विचारधारा के प्रभाव में आया और धीरे-धीरे जिहादी सोच की ओर आकर्षित होता चला गया।

जांच एजेंसी का दावा है कि उसे ‘फी सबीलिल्लाह’ यानी अल्लाह के लिए संघर्ष जैसे विचारों से प्रभावित किया जा रहा था। लगातार ऐसे प्रचार और संदेशों के संपर्क में रहने के कारण वह स्वयं को किसी बड़े धार्मिक मिशन का हिस्सा समझने लगा था। एसटीएफ का मानना है कि इसी प्रक्रिया में वह फिदायीन हमले जैसी सोच तक पहुंच गया।

हालांकि, एजेंसी ने अभी तक किसी संभावित लक्ष्य, स्थान या प्रस्तावित हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। लेकिन जांचकर्ताओं का कहना है कि आरोपित की गतिविधियां, डिजिटल रिकॉर्ड और चैट्स किसी गंभीर साजिश की ओर संकेत करती हैं।

सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड ऐप्स पर सक्रिय था
जांच में पता चला है कि सलाउद्दीन टेलीग्राम, सिग्नल और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर कई संदिग्ध समूहों और अकाउंट्स से जुड़ा हुआ था। इन ग्रुपों में कथित तौर पर जिहाद, शहादत और उग्रपंथी विचारधारा से संबंधित सामग्री साझा की जाती थी।

एसटीएफ के अनुसार, इन प्लेटफॉर्मों पर उसकी सक्रियता और संपर्कों का दायरा अब जांच के केंद्र में है। डिजिटल साक्ष्यों की तकनीकी पड़ताल की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसे कौन प्रभावित कर रहा था और उसके पीछे कौन-सा नेटवर्क काम कर रहा था।

तेलंगाना कनेक्शन ने बढ़ाई चिंता
मामले में तेलंगाना के एक व्यक्ति ‘जुबैर’ का नाम प्रमुखता से सामने आया है। जांच एजेंसियों के अनुसार सलाउद्दीन के संपर्क इस व्यक्ति से थे और कथित तौर पर डेटोनेटर तथा अन्य हथियार उसी के माध्यम से उसे उपलब्ध कराए गए थे। इतना ही नहीं, उसे कुछ नकद धनराशि भी दिए जाने की बात सामने आई है।

एसटीएफ को संदेह है कि यह व्यक्ति मोहम्मद इब्राहिम जुबैर हो सकता है, जिसका नाम पहले भी अल-कायदा से जुड़े मामलों में सामने आ चुका है। इसी कारण तेलंगाना कनेक्शन की जांच को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।

मोबाइल चैट्स में मिले हथियार और विस्फोटक संबंधी संकेत
एसटीएफ की डिजिटल जांच में आरोपित के मोबाइल फोन से कई संदिग्ध चैट्स मिली हैं। इनमें हथियारों, विस्फोटक सामग्री और उनके सुरक्षित भंडारण से जुड़ी बातचीत होने के संकेत मिले हैं।

जांच एजेंसी इन चैट्स की तकनीकी और फोरेंसिक जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि इन संवादों से नेटवर्क के अन्य लोगों की पहचान और संभावित साजिश की प्रकृति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।

डिलीट डेटा से खुल सकते हैं बड़े राज
पूछताछ के दौरान सलाउद्दीन ने स्वीकार किया है कि उसने अपने मोबाइल से कुछ चैट्स और कई नंबर डिलीट कर दिए थे। अब साइबर विशेषज्ञ उन डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने में जुटे हैं।

एसटीएफ का मानना है कि मोबाइल से हटाई गई जानकारी में ऐसे संपर्क और बातचीत मौजूद हो सकती हैं, जो पूरे नेटवर्क की परतें खोल सकती हैं। जांच एजेंसियां इस डेटा को मामले का अहम सुराग मान रही हैं।

पाकिस्तान और विदेशी नेटवर्क की भूमिका की भी जांच
एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ और गोपनीय स्रोतों से मिली जानकारी में सीमापार और विदेशी तत्वों की संभावित भूमिका के संकेत मिले हैं। इसी आधार पर जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि कहीं सलाउद्दीन को विदेश में बैठे किसी नेटवर्क द्वारा प्रभावित, प्रशिक्षित या निर्देशित तो नहीं किया जा रहा था।

फिलहाल एजेंसियां उसके सभी डिजिटल संपर्कों, वित्तीय लेनदेन, सोशल मीडिया गतिविधियों और अंतरराज्यीय नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं। जांचकर्ताओं का मानना है कि आने वाले दिनों में डिलीट डेटा की रिकवरी और डिजिटल फोरेंसिक रिपोर्ट से इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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