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गुंडा एक्ट मामले में बिल्डर पुनीत अग्रवाल को झटका, हाईकोर्ट ने साफ किया-प्रशासन कानून के तहत कार्रवाई को स्वतंत्र

अपीलकर्ताओं की दलीलों में कोर्ट ने पाया दम, सिर्फ मंडलायुक्त के समक्ष अपील में उपस्थित होने की मिलेगी छूट

Amit Bhatt, Dehradun: गुंडा एक्ट की कार्रवाई को लेकर चल रहे बहुचर्चित एटीएस सोसाइटी मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बिल्डर पुनीत अग्रवाल को मिले संरक्षण आदेश की सीमा स्पष्ट करते हुए बड़ा संकेत दिया है। अदालत ने कहा है कि 21 मई 2026 को दिया गया संरक्षण आदेश आयुक्त के समक्ष लंबित अपील की कार्यवाही को प्रभावित नहीं करेगा और न ही यह प्रशासन को कानून के तहत कार्रवाई करने से रोकेगा। जिससे साफ होता है कि पुनीत अग्रवाल के विरुद्ध दिया गया जिला बदर का आदेश प्रभावी हैं। हालांकि, इससे उलट पुनीत बेखौफ देहरादून में घूम रहे हैं और निवास कर रहे हैं।

न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से कहा गया कि जिला मजिस्ट्रेट देहरादून द्वारा गुंडा एक्ट के तहत अंतिम आदेश पारित किया जा चुका है। इसके खिलाफ पुनीत अग्रवाल ने आयुक्त के समक्ष अपील दायर कर रखी है। ऐसे में 21 मई को हाईकोर्ट द्वारा दिया गया “नो कोर्सिव एक्शन” संरक्षण आदेश अपीलीय प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।

सुनवाई के बाद अदालत ने हस्तक्षेपकर्ताओं की दलीलों में दम पाया और स्पष्ट किया कि 21 मई का संरक्षण आदेश केवल अपने सीमित दायरे में ही माना जाएगा। कोर्ट ने कहा कि आयुक्त अपील पर स्वतंत्र रूप से सुनवाई और निर्णय लेने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं तथा हाईकोर्ट का संरक्षण आदेश उनके अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं करेगा। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि संरक्षण आदेश को ऐसा नहीं माना जा सकता जिससे संबंधित प्राधिकरण कानून के अनुसार कार्रवाई करने से वंचित हो जाएं।

मामले की सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि 21 मई 2026 के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर 9 जून 2026 को सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने नोटिस जारी किया है और मामले को 21 जुलाई 2026 के लिए सूचीबद्ध किया है। हालांकि हाईकोर्ट के समक्ष यह भी बताया गया कि सर्वोच्च न्यायालय ने 21 मई के आदेश पर कोई स्थगन (स्टे) नहीं दिया है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से एक महत्वपूर्ण आश्वासन भी दर्ज कराया गया। सरकारी अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि जिस दिन आयुक्त के समक्ष पुनीत अग्रवाल की अपील सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होगी, उस दिन उनके खिलाफ कोई कोर्सिव कार्रवाई नहीं की जाएगी। अदालत ने इस आश्वासन को आदेश का हिस्सा बनाया।

कानूनी जानकारों के अनुसार आदेश का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पुनीत अग्रवाल को मिला संरक्षण पूर्ण और निरंतर नहीं माना जाएगा। अदालत ने प्रशासनिक और वैधानिक कार्रवाई के रास्ते खुले रखते हुए केवल आयुक्त के समक्ष अपील की सुनवाई को निष्पक्ष बनाए रखने पर जोर दिया है।

इसी सुनवाई में डांडा लाखौंड स्थित विवादित परियोजना से जुड़े सीलिंग आदेश पर भी सुनवाई हुई। हस्तक्षेपकर्ताओं द्वारा पेड़ न काटने और निर्माण गतिविधियां न चलाने का आश्वासन देने के बाद अदालत ने सीलिंग आदेश वापस लेने का निर्देश दिया। हालांकि लेआउट प्लान और निर्माण संबंधी मामलों की जांच एमडीडीए की गठित समिति द्वारा जारी रहेगी।

अब पूरे मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई 2026 को होगी, जबकि गुंडा एक्ट से जुड़े आदेश और उससे उत्पन्न कानूनी विवाद पर सभी पक्षों की नजरें टिकी हुई हैं।

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