पहले ही फेरे में हादसे का शिकार हुआ रोडवेज का नया चालक, प्रशिक्षण पर उठे सवाल
ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर तीनधारा के पास निगम के टेंपो ट्रैवलर और ट्रक की आमने-सामने की टक्कर

Amit Bhatt, Dehradun: चारधाम यात्रा के दौरान उत्तराखंड परिवहन निगम के एक नव नियुक्त चालक का पर्वतीय मार्ग पर पहला फेरा ही हादसे में बदल गया। सोमवार को ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर तीनधारा के पास निगम के टेंपो ट्रैवलर और ट्रक की आमने-सामने की टक्कर में चालक समेत दो लोग घायल हो गए। दुर्घटना के बाद नए चालकों के प्रशिक्षण और पर्वतीय मार्गों पर उनकी तैयारियों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार उत्तराखंड परिवहन निगम ने चालकों की कमी दूर करने के लिए हाल ही में एक नई एजेंसी के माध्यम से नियुक्तियां शुरू की हैं। इसी प्रक्रिया के तहत नियुक्त चालक हरदीप सिंह को सोमवार को पहली बार टेंपो ट्रैवलर संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। यह उनका पर्वतीय रूट पर पहला परिचालन था। लेकिन बदरीनाथ से यात्रियों को लेकर लौटते समय तीनधारा क्षेत्र में वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
देवप्रयाग पुलिस के अनुसार टेंपो ट्रैवलर बदरीनाथ से ऋषिकेश की ओर आ रहा था, जबकि सामने से एक ट्रक बदरीनाथ की तरफ जा रहा था। दोपहर करीब 12 बजे दोनों वाहनों के बीच आमने-सामने की टक्कर हो गई। हादसे में चालक हरदीप सिंह (45) निवासी अहमदपुर ग्रांट, हरिद्वार को चोटें आईं, जबकि वाहन में सवार चारधाम यात्री धीरज कुमार (35) निवासी सीतापुर, उत्तर प्रदेश के सिर में गंभीर चोट लगी। दोनों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।
हादसे के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर दोनों ओर लंबा जाम लग गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया और क्रेन की सहायता से क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाकर यातायात बहाल कराया।
चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले अप्रैल में ऋषिकेश डिपो को छह नए टेंपो ट्रैवलर उपलब्ध कराए गए थे। मई से इनका संचालन यात्रा मार्गों पर किया जा रहा है। निगम अधिकारियों के अनुसार अब दुर्घटना की तकनीकी और विभागीय जांच कराई जाएगी। जांच में यह भी देखा जाएगा कि नव नियुक्त चालक को पर्वतीय मार्गों के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव दिया गया था या नहीं।
उल्लेखनीय है कि चारधाम यात्रा मार्गों पर चालक प्रशिक्षण को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। पिछले महीने शिवपुरी के पास यात्रियों से भरी एक निजी बस दुर्घटनाग्रस्त हुई थी। ऐसे में तीनधारा हादसे ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि संवेदनशील पर्वतीय मार्गों पर नए चालकों की तैनाती से पहले प्रशिक्षण और मूल्यांकन की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।



