देहरादून पहुंचे निहंग रात 2.30 पर लौटे, डीएम-एसएसपी की वार्ता के बाद टला टकराव
कुल्हाल बॉर्डर पर बैरिकेडिंग तोड़ने और तलवारें लहराने के बाद बढ़ी थी हलचल, पुलिस सुरक्षा में जत्था वापस पांवटा साहिब रवाना

Rajkumar Dhiman, Dehradun: नगरासू गुरुद्वारा विवाद के बाद उत्तराखंड पहुंचने का ऐलान करने वाले निहंग सिखों का जत्था गुरुवार को कूल्हाल बॉर्डर पर पहुंचे घटनाक्रम के बाद देर रात वापस लौट गया। दिनभर चले तनावपूर्ण घटनाक्रम के बाद निहंगों का जत्था पांवटा साहिब से देहरादून पहुंचा और प्रेमनगर से पहले अलग-अलग मार्गों से होते हुए रेसकोर्स स्थित गुरुद्वारा पहुंच गया। इसकी भनक लगते ही पुलिस और प्रशासन भी मौके पर पहुंच गया।
रेसकोर्स गुरुद्वारे में देर रात तक पुलिस अधिकारियों और निहंग प्रतिनिधियों के बीच लंबी वार्ता चली। सरकार के निर्देश पर जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान और एसएसपी प्रमेन्द्र डोबाल देर रात तक मौके पर डटे रहे और वार्ता के सूत्रधार की भूमिका निभाई। बातचीत के बाद रात करीब 2:30 बजे निहंगों का जत्था दो जिप्सियों में वापस पांवटा साहिब के लिए रवाना हो गया। पुलिस की टीमें भी उनके साथ भेजी गई हैं, जो जत्थे को सुरक्षित हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब बॉर्डर तक छोड़कर लौटेंगी।
कुल्हाल बॉर्डर पर बैरिकेडिंग तोड़ने से बढ़ा था तनाव
इससे पहले गुरुवार को हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब से उत्तराखंड की ओर बढ़े निहंगों के जत्थे को कूल्हाल बॉर्डर पर रोक दिया गया था। पुलिस की बैरिकेडिंग लगाए जाने के बाद कुछ निहंगों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी और देहरादून की ओर बढ़ने लगे। इस दौरान कई निहंग तलवारें लहराते दिखाई दिए और तलवार से वार करने के इशारे भी किए गए। जत्थे में कुछ नकाबपोश लोगों की मौजूदगी भी सामने आई, जिससे सुरक्षा एजेंसियां अतिरिक्त सतर्क हो गईं।
हालांकि, पूरे घटनाक्रम के दौरान आईटीबीपी, पीएसी और उत्तराखंड पुलिस ने संयम बनाए रखा। सुरक्षा बलों ने बल प्रयोग से बचते हुए स्थिति को नियंत्रित रखने का प्रयास किया और किसी भी बड़े टकराव को टाल दिया।
पांवटा साहिब में वार्ता नहीं बनी थी
कूल्हाल बॉर्डर पहुंचने से पहले पांवटा साहिब गुरुद्वारे में प्रशासनिक अधिकारियों और निहंग प्रतिनिधियों के बीच वार्ता हुई थी, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद पंजाब और चंडीगढ़ से आए निहंगों का जत्था उत्तराखंड की ओर रवाना हो गया। प्रशासन को पहले से ही बड़ी संख्या में निहंगों के आने की सूचना थी, जिसके चलते सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी।
नगरासू गुरुद्वारा विवाद से जुड़ा है पूरा मामला
पूरा घटनाक्रम रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू स्थित गुरुद्वारा साहिब में हुए विवाद के बाद शुरू हुआ। पंजाब से आए निहंगों के एक समूह ने गुरुद्वारे में पहुंचकर विरोध दर्ज कराया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर 25 जून को बड़ी संख्या में उत्तराखंड पहुंचने का आह्वान किया गया था। कई वीडियो भी वायरल हुए, जिनमें उत्तराखंड पहुंचने की घोषणा की गई थी।
निहंग प्रतिनिधियों का कहना है कि वे उत्तराखंड के गुरुद्वारों और सिख श्रद्धालुओं की व्यवस्थाओं का जायजा लेने आए हैं। उनका यह भी कहना है कि वे विवाद का समाधान बातचीत से चाहते हैं और मारपीट के मामले में गिरफ्तार चार निहंगों को सम्मानपूर्वक पंजाब वापस ले जाने की मांग कर रहे हैं। उनका दावा है कि विवाद में गलती उनकी ओर से नहीं हुई।
पहले से हाई अलर्ट पर था प्रशासन
निहंगों के प्रस्तावित कूच की सूचना के बाद उत्तराखंड पुलिस, प्रशासन और खुफिया एजेंसियां पहले से हाई अलर्ट पर थीं। हिमाचल प्रदेश से लगने वाली सीमाओं पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। कूल्हाल बॉर्डर के अलावा अन्य संवेदनशील स्थानों पर भी आईटीबीपी, पीएसी और स्थानीय पुलिस को तैनात किया गया।
राज्य सरकार ने अधिकारियों को सभी पक्षों के साथ संवाद बनाए रखने और कानून-व्यवस्था हर हाल में कायम रखने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि उत्तराखंड आने वाले सभी श्रद्धालुओं का सम्मान किया जाएगा, लेकिन कानून-व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होगा।
स्थानीय संगठनों ने भी जताया था विरोध
नगरासू गुरुद्वारा विवाद को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल और उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा ने भी विरोध प्रदर्शन किया था। संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा था कि इसे किसी समुदाय या दो राज्यों के बीच संघर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
फिलहाल स्थिति नियंत्रण में
देर रात वार्ता के बाद निहंगों के वापस लौट जाने से तत्काल टकराव की आशंका टल गई है। हालांकि पुलिस और प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था यथावत रखी गई है और खुफिया एजेंसियां भी हालात पर निगरानी बनाए हुए हैं, ताकि भविष्य में किसी भी अप्रिय स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।



