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देहरादून में उत्तरांचल कॉलेज उतरवा रहा छात्राओं की बिंदी और पूजा का लाल धागा, सख्त हुआ मानवाधिकार आयोग

उत्तरांचल पीजी कॉलेज मामले में NHRC ने UGC समेत छह को नोटिस जारी किया

Amit Bhatt, Dehradun: उत्तरांचल पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में छात्रों के साथ कथित धार्मिक भेदभाव के आरोप अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) तक पहुंच गए हैं। आयोग ने शिकायत का प्रारंभिक परीक्षण करने के बाद इसे प्रथम दृष्टया मानवाधिकारों के संभावित उल्लंघन से जुड़ा मामला माना है और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), उत्तराखंड सरकार, कॉलेज प्रशासन तथा देहरादून जिला प्रशासन समेत संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। आयोग ने सभी पक्षों से दो सप्ताह के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) उपलब्ध कराने को कहा है।

शिकायत में क्या कहा गया?
आयोग के समक्ष प्रस्तुत शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कॉलेज परिसर में हिंदू छात्राओं को बिंदी लगाने और छात्रों को माथे पर तिलक तथा हाथ में बंधा पूजा का लाल धागा (कलावा) पहनकर आने से रोका गया। शिकायत के अनुसार, निर्देशों का पालन नहीं करने वाले कुछ छात्रों को अनुपस्थित दर्ज किया गया। साथ ही उनके हाथों से कथित तौर पर पूजा का धागा उतरवाया गया और अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए उनकी तस्वीरें भी ली गईं।

शिकायत में यह दावा भी किया गया है कि दूसरी ओर मुस्लिम छात्राओं को बुर्का पहनने की अनुमति दी जा रही थी। इसी आधार पर कॉलेज प्रशासन पर धार्मिक आधार पर अलग-अलग व्यवहार करने का आरोप लगाया गया है।

संवैधानिक अधिकारों का हवाला
शिकायतकर्ता ने आयोग से कहा कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह नागरिकों को प्राप्त समानता, धार्मिक स्वतंत्रता, गरिमा और अंतरात्मा की स्वतंत्रता जैसे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होगा। शिकायत में निष्पक्ष जांच, छात्रों की सुरक्षा, दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तथा धार्मिक प्रतीकों को लेकर स्पष्ट और भेदभावरहित नीति लागू करने की मांग भी की गई है।

NHRC ने क्या कदम उठाया?
7 जुलाई 2026 को मामले पर सुनवाई के दौरान आयोग ने शिकायत का परीक्षण किया। इसके बाद मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया गया।

आयोग ने UGC के अध्यक्ष, उत्तराखंड के उच्च शिक्षा सचिव, चिकित्सा शिक्षा सचिव, उत्तरांचल (पीजी) कॉलेज ऑफ बायो-मेडिकल साइंसेज एंड हॉस्पिटल के प्राचार्य, जिलाधिकारी देहरादून और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) देहरादून को नोटिस जारी किए हैं। सभी अधिकारियों को मामले की जांच कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट आयोग को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। शिकायत की प्रति भी संबंधित विभागों को उपलब्ध करा दी गई है।

आयोग ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि उसने अभी केवल शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर संज्ञान लिया है। आरोपों की पुष्टि या खंडन जांच रिपोर्ट मिलने और उसके परीक्षण के बाद ही किया जाएगा।

विवाद कैसे शुरू हुआ?
यह मामला 29 जून 2026 को सामने आया था। देहरादून के ट्रांसपोर्ट नगर स्थित उत्तरांचल पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज के कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें तिलक लगाकर और हाथ में पूजा का लाल धागा (कलावा) बांधकर कॉलेज आने से रोका गया। छात्रों का कहना था कि कॉलेज प्रशासन ने ड्रेस कोड का हवाला देते हुए धार्मिक प्रतीकों को हटाने के लिए कहा और ऐसा न करने पर प्रवेश रोकने की चेतावनी दी गई।

घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद और बढ़ गया। इसके बाद बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने कॉलेज पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। संगठन का कहना था कि तिलक और पूजा का लाल धागा सनातन परंपरा और धार्मिक आस्था के प्रतीक हैं तथा इन्हें प्रतिबंधित करना धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के विपरीत है। उन्होंने कॉलेज प्रशासन से ऐसे निर्देश वापस लेने और भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं न होने देने की मांग की थी।

बाद में इसी पूरे घटनाक्रम को आधार बनाकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई गई, जिस पर अब आयोग ने संबंधित अधिकारियों से जवाब और कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।

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