बाघ के जबड़े से साथी को खींच लाए 04 साहसी वन कर्मी
कार्बेट टाइगर रिजर्व में गश्त के दौरान दैनिक कर्मी पर झपट पड़ा था बाघ

Amit Bhatt, Dehradun: कार्बेट टाइगर रिजर्व में सोमवार शाम गश्त के दौरान बाघ के हमले में एक दैनिक श्रमिक गंभीर रूप से घायल हो गया। हालांकि, उसके साथ मौजूद 04 वनकर्मियों ने अदम्य साहस और त्वरित कार्रवाई का परिचय देते हुए उसे बाघ के चंगुल से सुरक्षित बाहर निकाल लिया। वनकर्मियों ने हवाई फायरिंग की, शोर मचाया और लाठियां जमीन पर फटकारकर बाघ को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। घायल श्रमिक को पहले सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए काशीपुर के एक निजी अस्पताल रेफर किया गया।
कार्बेट टाइगर रिजर्व के सर्पदुली रेंज में दैनिक श्रमिक के रूप में कार्यरत 30 वर्षीय पीतांबर सौनी, पुत्र मोहन राम, रामनगर के सुंदरखाल गांव के निवासी हैं। सोमवार शाम करीब चार बजे पीतांबर अपने साथ वनकर्मी योगेंद्र रावत, नवीन, रामनाथ और मनोज कुमार के साथ जंगल में नियमित गश्त पूरी कर सर्पदुली कैंप की ओर लौट रहे थे। सुरक्षा के लिए टीम के पास सरकारी बंदूकें और लाठियां मौजूद थीं।
वापसी के दौरान चारों वनकर्मी आगे चल रहे थे, जबकि पीतांबर सबसे पीछे था। इसी दौरान झाड़ियों में घात लगाए बैठे बाघ ने अचानक पीछे से उस पर हमला कर दिया। बाघ के तेज झपट्टे से पीतांबर जमीन पर गिर पड़ा और बाघ उसे अपने जबड़ों में दबोचने का प्रयास करने लगा।
साथी पर हमला होते देख आगे चल रहे वनकर्मियों ने बिना देर किए बचाव अभियान शुरू कर दिया। एक वनकर्मी ने सरकारी बंदूक से लगातार कई राउंड हवाई फायरिंग की, जबकि अन्य वनकर्मी जोर-जोर से शोर मचाने लगे और लाठियां जमीन पर फटकारते हुए बाघ की ओर बढ़े। वनकर्मियों की इस त्वरित और साहसिक कार्रवाई से बाघ घबरा गया और पीतांबर को छोड़कर जंगल की ओर भाग निकला।
बाघ के हटते ही वनकर्मियों ने घायल पीतांबर को तत्काल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और अधिकारियों को घटना की सूचना दी। विभागीय वाहन से उसे सरकारी अस्पताल ले जाया गया। चिकित्सकों के अनुसार उसके गले के आगे वाले हिस्से के पास बाघ के पंजों के गहरे घाव हैं। प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए काशीपुर के एक निजी अस्पताल रेफर कर दिया गया।
घटना की सूचना मिलने पर पार्क वार्डन बिंदर पाल और सर्पदुली रेंज के रेंजर संजय पांडे ने मामले की जानकारी ली। पार्क वार्डन बिंदर पाल ने बताया कि वनकर्मियों ने बेहद साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए हवाई फायरिंग और त्वरित कार्रवाई से अपने साथी को बाघ के हमले से सुरक्षित बचा लिया। यदि कुछ सेकंड की भी देरी होती तो बड़ा हादसा हो सकता था।
यह घटना एक बार फिर बताती है कि कार्बेट के जंगलों में ड्यूटी करने वाले वनकर्मी हर दिन जान जोखिम में डालकर वन्यजीव संरक्षण का कार्य करते हैं और कई बार उन्हें अपनी जान की परवाह किए बिना साथियों की सुरक्षा के लिए भी मोर्चा संभालना पड़ता है।
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