सचिव नितेश कुमार झा को हाई कोर्ट की अवमानना का नोटिस, अनदेखी पर देना होगा जवाब
17 मार्च को हटाए गए कार्मिक विस्तार गुप्ता से जुड़ा है मामला, आदेश के बाद भी नहीं लिया निर्णय

Rajkumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखंड हाई कोर्ट ने अपने आदेश के पालन में लापरवाही बरतने के मामले में शहरी विकास विभाग के सचिव नितेश कुमार झा को अवमानना नोटिस जारी किया है। मामला शहरी विकास निदेशालय में शहरी अवसंरचना विशेषज्ञ (Urban Infrastructure Expert) के पद पर कार्यरत रहे विस्तार गुप्ता से जुड़ा है, जिन्हें 17 मार्च 2026 को सेवा से हटा दिया गया था। इसके बाद उन्होंने अपनी सेवा समाप्ति को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
हाई कोर्ट ने 28 अप्रैल 2026 को पारित आदेश में विस्तार गुप्ता को सचिव नितेश कुमार झा के समक्ष पुनर्नियोजन (री-एंगेजमेंट) के लिए दो सप्ताह के भीतर प्रतिनिधित्व (रिप्रेजेंटेशन) देने की अनुमति दी थी। साथ ही अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि यदि प्रतिनिधित्व तय समय में प्राप्त हो जाए तो सचिव 10 सप्ताह के भीतर उस पर निर्णय लेंगे।
याचिकाकर्ता ने अदालत के आदेश के अनुरूप 5 मई 2026 को सचिव नितेश कुमार झा के समक्ष अपना प्रतिनिधित्व दाखिल कर दिया। इसके साथ हाई कोर्ट के आदेश की प्रति भी सौंपी गई। आरोप है कि निर्धारित 10 सप्ताह की अवधि समाप्त होने के बाद भी सचिव स्तर पर प्रतिनिधित्व पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। इसे अदालत के आदेश की अवहेलना बताते हुए अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 12 के तहत अवमानना याचिका दायर की गई।
न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने प्रथम दृष्टया मामला विचारणीय मानते हुए सचिव नितेश कुमार झा को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का नोटिस जारी किया है। अदालत ने यह भी कहा है कि यदि इस अवधि में मूल आदेश का पालन करते हुए याचिकाकर्ता के प्रतिनिधित्व पर निर्णय ले लिया जाता है तो इसकी जानकारी भी न्यायालय को दी जा सकती है। मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर 2026 को होगी।
हालांकि, अवमानना नोटिस जारी होने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने सचिव को दोषी ठहरा दिया है। इसका मतलब केवल इतना है कि हाई कोर्ट ने प्रथम दृष्टया आदेश के पालन न होने के आरोप को गंभीर माना है और अब सचिव नितेश कुमार झा से जवाब मांगा है कि आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ, अथवा यदि पालन कर दिया गया है तो उसका विवरण न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।



