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तीन निलंबित अभियंताओं में से दो के पक्ष में खड़ा हुआ इंजीनियर्स संघ, बोला-‘डिजाइन में खामी में दोषी कैसे?

नंदा की चौकी के नवनिर्मित पुल की एप्रोच रोड धंसने के मामले में सहायक अभियंता अमित त्यागी और अपर सहायक अभियंता नवीन गैरोला के निलंबन का विरोध

Amit Bhatt, Dehradun: नंदा की चौकी में टौंस नदी पर बने नवनिर्मित पुल की एप्रोच रोड धंसने के मामले में लोक निर्माण विभाग के दो अधीनस्थ अभियंताओं के निलंबन ने विवाद खड़ा कर दिया है। उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ ने सहायक अभियंता अमित त्यागी और अपर सहायक अभियंता नवीन गैरोला के निलंबन को अनुचित बताते हुए शासन के फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया है। संघ ने दोनों अभियंताओं का निलंबन तत्काल वापस लेने के साथ पूरे प्रकरण की विशेषज्ञों से निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने की मांग की है।

संघ ने अधिशासी अभियंता राजेश कुमार के निलंबन पर कोई टिप्पणी नहीं की है। संगठन का विरोध विशेष रूप से उन अधीनस्थ अभियंताओं की कार्रवाई को लेकर है, जिनकी जिम्मेदारी स्वीकृत डिजाइन, नक्शे और तकनीकी प्रावधानों के मुताबिक निर्माण कार्य की निगरानी तथा गुणवत्ता नियंत्रण तक सीमित रहती है।

डिजाइन सलाहकार की भूमिका पर उठाए सवाल
संघ का कहना है कि शासन की प्रारंभिक जांच में ही डिजाइन सलाहकार की ओर से तकनीकी कमी सामने आने की बात कही गई है। ऐसे में संगठन ने सवाल उठाया है कि यदि परियोजना के डिजाइन में ही खामी थी तो कार्रवाई की शुरुआत अधीनस्थ अभियंताओं से क्यों की गई?

संघ के मुताबिक प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि नदी का मार्ग बदलने की योजना तैयार करते समय डिजाइन सलाहकार ने नदी तल की ढलान और नदी के घुमावदार प्राकृतिक प्रवाह को पर्याप्त रूप से ध्यान में नहीं रखा। इसके अलावा नदी के बहाव को नियंत्रित करने और कटाव रोकने के लिए जरूरी सुरक्षात्मक उपाय भी डिजाइन में शामिल नहीं किए गए।

संघ का तर्क है कि बारिश के दौरान इसी तकनीकी कमी का असर सामने आया। नदी का बहाव एक ओर केंद्रित हो गया, जिससे पुल के ऊपरी धारा वाले हिस्से में तेज कटाव शुरू हुआ। कटाव बढ़ने के साथ पहुंच सड़क की तरफ जमीन खिसकती चली गई और अंततः एप्रोच रोड धंस गई।

‘जब प्रावधान ही नहीं था तो अभियंता अतिरिक्त काम कैसे कराते?’
डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ ने इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने के तरीके पर भी सवाल खड़े किए हैं। संगठन का कहना है कि यदि नदी के प्रवाह को नियंत्रित करने और कटाव से बचाव के लिए आवश्यक सुरक्षात्मक कार्य का प्रावधान स्वीकृत डीपीआर और डिजाइन में था ही नहीं, तो इसके लिए सहायक अभियंता और अपर सहायक अभियंता को सीधे जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।

संघ के अनुसार अधीनस्थ अभियंताओं को स्वीकृत डिजाइन, नक्शे और तकनीकी प्रावधानों के अनुरूप कार्य की निगरानी करनी होती है। वे अपनी ओर से ऐसे अतिरिक्त निर्माण या सुरक्षात्मक कार्य नहीं करा सकते, जिनके लिए स्वीकृत तकनीकी और वित्तीय प्रावधान मौजूद न हों।

पुल सुरक्षित रहा, एप्रोच रोड को नुकसान, संघ ने उठाया सवाल
संघ ने यह भी रेखांकित किया है कि घटना में मुख्य पुल की संरचना सुरक्षित रही, जबकि नुकसान मुख्य रूप से उसकी पहुंच सड़क को हुआ। संगठन के मुताबिक बारिश के दौरान नदी का पानी पूरे नदी क्षेत्र में समान रूप से नहीं फैल पाया और उसका दबाव पहुंच सड़क की ओर बढ़ गया।

तेज बहाव के कारण जमीन का कटाव हुआ और देखते ही देखते एप्रोच रोड धंसकर गहरे गड्ढे में तब्दील हो गई। संघ का कहना है कि इस पहलू की तकनीकी जांच किए बिना केवल निगरानी करने वाले अभियंताओं को दोषी ठहराना पूरे प्रकरण की वास्तविक वजह तक पहुंचने के बजाय जिम्मेदारी को सीमित करने जैसा होगा।

विशेषज्ञों से जांच कराने की मांग
इंजीनियर्स संघ ने शासन से मांग की है कि जांच का दायरा केवल अधीनस्थ अभियंताओं की भूमिका तक सीमित न रखा जाए। संगठन ने डिजाइन सलाहकार द्वारा तैयार किए गए डिजाइन, नदी का मार्ग बदलने की व्यवस्था, जल प्रवाह को नियंत्रित करने के प्रावधान, वास्तविक जल प्रवाह की स्थिति, नदी तल में हुए कटाव और एप्रोच रोड के धंसने के वास्तविक कारणों की विशेषज्ञों से जांच कराने की मांग की है।

संघ का कहना है कि जांच के बाद जिस व्यक्ति, संस्था या स्तर पर वास्तविक तकनीकी चूक सामने आए, उसी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

निलंबन वापस नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ के प्रांतीय अध्यक्ष सीडी सैनी, प्रांतीय महामंत्री एपी सिंह, गढ़वाल मंडल अध्यक्ष सरीन कुमार, मंडल मंत्री अमर सिंह और जनपद अध्यक्ष शरद टम्टा समेत संघ की कार्यकारिणी ने शासन से सहायक अभियंता अमित त्यागी और अपर सहायक अभियंता नवीन गैरोला के निलंबन की समीक्षा करने तथा दोनों को तत्काल बहाल करने की मांग की है।

संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि तकनीकी खामी डिजाइन स्तर पर हुई है तो पहले उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। केवल निर्माण कार्य की निगरानी करने वाले अधीनस्थ अभियंताओं पर कार्रवाई को संगठन ने न्यायसंगत नहीं माना है। निलंबन की समीक्षा और बहाली की मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में संघ ने अपने विरोध को आगे बढ़ाने की चेतावनी दी है।

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