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नक्शा फर्जीवाड़े में चर्चित सहायक अभियंता पंकज पाठक को विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि, आचरण से जुड़ा गंभीर मामला

मुख्यमंत्री धामी की सख्ती के बाद फंदे में फंसे पाठक, प्राधिकरण उपाध्यक्ष ने की कार्रवाई

Rajkumar Dhiman, Dehradun: जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण, टिहरी ने मानचित्र स्वीकृति से जुड़े गंभीर मामले में सहायक अभियंता पंकज पाठक के खिलाफ कड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष दिनेश प्रताप सिंह ने पाठक को विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि जारी कर दी है। जिसमें स्वीकृत मानचित्र में सक्षम स्तर की अनुमति के बिना बदलाव कर संशोधित मानचित्र अपलोड करने, परिवर्तित/कूटरचित अभिलेख तैयार करने, निर्धारित अधिकारिता का उल्लंघन करने और अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं करने जैसे आरोपों का उल्लेख किया है। यह आदेश पंकज पाठक की सेवा पुस्तिका में अलग से दर्ज करने के निर्देश के साथ जारी हुआ है। इस पूरी कार्रवाई की शुरुआत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देशों के क्रम में हुई।

मामला मानचित्र संख्या MAP/TSN/NE/AA/0002/25-26 से संबंधित ऑनलाइन पत्रावली का है। दस्तावेज के अनुसार आवेदक ने यह मानचित्र 31 दिसंबर 2025 को स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया था। तकनीकी जांच और संस्तुति के आधार पर उपाध्यक्ष ने 6 अप्रैल 2026 को इसे स्वीकृति दी। लेकिन पत्रावली की जांच में पाया गया कि सहायक अभियंता पंकज पाठक की ओर से 29/30 जून 2026 को एक नया मानचित्र अपलोड किया गया, जो 6 अप्रैल को स्वीकृत मानचित्र से अलग था। प्राधिकरण के अनुसार संशोधित मानचित्र के लिए सक्षम स्तर से पूर्वानुमति अथवा अलग से अनुमोदन लिए जाने का कोई अभिलेख नहीं मिला। आदेश में सक्षम स्तर की स्वीकृति के बिना स्वीकृत मानचित्र में बदलाव कर नया मानचित्र अपलोड करने को गंभीर अनियमितता और कदाचार की श्रेणी में माना गया है।

इस तरह किया खेल, 6 अप्रैल का नक्शा 15 जुलाई को जारी, लेकिन जून में ही दूसरा नक्शा अपलोड
प्राधिकरण के अनुसार उपाध्यक्ष ने 6 अप्रैल 2026 को स्वीकृत मानचित्र को 15 जुलाई 2026 को जारी किया, जबकि पत्रावली में 29/30 जून 2026 को पहले ही एक अलग संशोधित मानचित्र अपलोड किया जा चुका था। जांच में यह भी पाया गया कि 6 अप्रैल को स्वीकृत मानचित्र में स्टिल्ट पार्किंग/बेसमेंट आदि से संबंधित कुछ प्रावधान भवन उपविधि, 2011 (संशोधित-2024) के प्रासंगिक प्रावधानों के अनुरूप प्रथमदृष्टया नहीं पाए गए।

इस संबंध में पंकज पाठक को 16 सितंबर 2026 को नोटिस दिया गया था। उनसे मामले में अपनी भूमिका और उत्तरदायित्व को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया। उन्होंने 21 सितंबर 2026 को अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया, लेकिन प्राधिकरण ने पत्रावली और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इसे संतोषजनक नहीं माना। आदेश में कहा गया है कि आरोपों का तथ्यात्मक एवं विधिसम्मत प्रत्युत्तर देने के बजाय स्पष्टीकरण में एक अन्य मानचित्र को जबरन स्वीकृत किए जाने की बात कही गई तथा संबंधित वास्तुविद की ओर से प्रश्नगत मानचित्र को लंबित करने और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जाने का उल्लेख किया गया।

सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और निर्माण पर भी सवाल
प्राधिकरण ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और निर्माण को लेकर भी पंकज पाठक को कारण बताओ/स्पष्टीकरण नोटिस जारी किया था। आदेश के अनुसार इस संबंध में भी उनके स्तर से आतिथि तक कोई प्रत्युत्तर प्रस्तुत नहीं किया गया। प्राधिकरण ने कहा कि प्रथमदृष्टया विकास प्राधिकरण के विकास क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर सरकारी भूमि पर बड़े स्तर पर अतिक्रमण कर अनधिकृत निर्माण किए जा रहे हैं। कुछ मामलों में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे स्थापित किए जाने के साथ-साथ प्राधिकरण की अनुमति और विधिवत मानचित्र स्वीकृति के बिना निर्माण कार्य किए जाने की बात सामने आई।

आदेश में कहा गया है कि इससे सार्वजनिक संपत्ति की हानि और विधिक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। प्राधिकरण ने इसे सरकारी सेवा आचरण नियमावली में निर्धारित प्रावधानों के तहत पद के दुरुपयोग और पदीय दायित्वों के निर्वहन में शिथिलता से जोड़ते हुए गंभीर विषय माना है। ऐसे मामलों में सरकारी संपत्ति को हुई क्षति के संबंध में सरकारी संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम के तहत आवश्यक वैधानिक कार्रवाई किए जाने की भी बात आदेश में कही गई है।

अवैध निर्माण पर कार्रवाई नहीं होने का भी मामला
प्राधिकरण ने पंकज पाठक की कार्यप्रणाली को लेकर एक व्यापक सवाल भी उठाया है। आदेश में कहा गया है कि अनाधिकृत निर्माणों के विरुद्ध बार-बार नोटिस जारी किए जाने के बावजूद प्रभावी निगरानी, स्थलीय निरीक्षण, तत्काल रोकथाम तथा संबंधित अधिनियम के तहत समयबद्ध सीलिंग/ध्वस्तीकरण की कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की गई। इसके परिणामस्वरूप कई मामलों में अनधिकृत निर्माण पर्याप्त स्तर तक पूरे हो गए।

प्राधिकरण ने इसे प्रवर्तन कार्यों के पर्यवेक्षण और पदीय दायित्वों के निर्वहन में प्रशासनिक शिथिलता और लापरवाही का संकेत माना है। आदेश में यह भी कहा गया कि ऐसी स्थिति में भ्रष्टाचार और मिलीभगत की संलिप्तता उजागर होती है। हालांकि ये आदेश में दर्ज प्राधिकरण के आरोप और निष्कर्ष हैं, किसी न्यायिक निर्णय में सिद्ध तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी हवाला
विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि में याचिका लोगनाथ बनाम तमिलनाडु राज्य एवं अन्य में पारित 20 मई 2026 के आदेश तथा शासन की ओर से जारी निर्देशों का भी उल्लेख किया गया है। प्राधिकरण के अनुसार इन निर्देशों के बावजूद अनधिकृत निर्माणों के विरुद्ध समयबद्ध, प्रभावी और विधिसम्मत प्रवर्तन कार्रवाई नहीं की गई।

प्राधिकरण ने इन तमाम परिस्थितियों के आधार पर प्रथमदृष्टया माना कि सहायक अभियंता पंकज पाठक ने अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन में अपेक्षित सावधानी, तत्परता और प्रशासनिक अनुशासन का समुचित पालन नहीं किया।

कूटरचित दस्तावेज और मीडिया में गलत तथ्य प्रसारित करना और भी गंभीर
आदेश में पंकज पाठक के खिलाफ लापरवाही और प्रशासनिक शिथिलता के साथ सक्षम प्राधिकारी के आदेशों/अनुमोदनों की अपेक्षाओं की अवहेलना करते हुए आपराधिक कृत्य करना, कूटरचित दस्तावेज तैयार करना तथा प्रचलित नियमों एवं भवन उपविधियों का अनुपालन नहीं करना कदाचार की श्रेणी में आने की बात कही गई है।

इसके अलावा प्राधिकरण ने आरोप लगाया है कि पंकज पाठक की ओर से जांच को प्रभावित करने के उद्देश्य से समाचार पत्रों, टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर भ्रामक एवं गलत तथ्य प्रसारित किए जा रहे हैं। आदेश के अनुसार इससे सरकार और प्राधिकरण की छवि धूमिल हो रही है और यह सरकारी सेवा आचरण नियमावली में निहित प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है।

सेवा पुस्तिका में दर्ज होगी विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि
पूरे मामले के आधार पर जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण, टिहरी के उपाध्यक्ष दिनेश प्रताप सिंह ने पंकज पाठक को विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि प्रदान करने का निर्णय लिया है। आदेश में इसके प्रमुख आधार के रूप में सक्षम स्तर की पूर्वानुमति के बिना स्वीकृत मानचित्र में परिवर्तन कर संशोधित मानचित्र अपलोड करना, परिवर्तित/कूटरचित अभिलेख तैयार करना, निर्धारित अधिकारिता का उल्लंघन करना, भवन उपविधियों का अनुपालन न करना और अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ समयबद्ध, प्रभावी एवं विधिसम्मत प्रवर्तन कार्रवाई नहीं करना गिनाया गया है।

आदेश के अंत में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि इस विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि का अंकन सहायक अभियंता पंकज पाठक की सेवा पुस्तिका में पृथक रूप से किया जाए। यानी मानचित्र स्वीकृति से शुरू हुआ मामला अब अधिकारी के सेवा अभिलेख में दर्ज होने वाली प्रतिकूल प्रविष्टि तक पहुंच गया है।

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