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यूक्रेनी नागरिक को उत्तराखंड में 02 साल की सजा, 02 लाख जुर्माना भी लगा

आव्रजन और विदेशियों विषयक अधिनियम के उल्लंघन में सीजेएम कोर्ट का फैसला, जुर्माना नहीं देने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास

Aryan Walia, Uttarakhand: बागेश्वर के ग्राम डौला में घायल अवस्था में मिले यूक्रेन के नागरिक को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संदीप कुमार तिवारी की अदालत ने 02 वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने अभियुक्त पर 02 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर उसे 06 माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। यह मामला आव्रजन और विदेशियों विषयक अधिनियम, 2025 की धारा 3/23 के उल्लंघन से संबंधित है।

अभियोजन के अनुसार, 24 मई 2026 को कपकोट थाना पुलिस को ग्राम डौला में एक विदेशी पर्यटक के घायल अवस्था में मिलने की सूचना मिली थी। सूचना पर उपनिरीक्षक गोल्डी घुघत्याल पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। वहां विदेशी नागरिक चोटिल हालत में दर्द से कराह रहा था। पूछताछ में उसने अपना नाम मेक्सिम स्टार चेंको, पिता स्टार चेंको एंड्रिया और निवासी खार्किव, यूक्रेन बताया। ग्रामीण गजेंद्र सिंह ने उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कपकोट में भर्ती कराया, जहां उसका प्राथमिक उपचार किया गया।

जिला अस्पताल से छुट्टी मिलने पर शुरू हुई कानूनी कार्रवाई
25 मई को चिकित्सकों ने विदेशी नागरिक की हालत को देखते हुए उसे बेहतर उपचार के लिए जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया। पुलिसकर्मी अस्पताल में उसकी देखरेख के लिए तैनात रहे। 26 मई को जिला चिकित्सालय से उसे डिस्चार्ज किए जाने की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू की। कपकोट थाने में आव्रजन और विदेशियों विषयक अधिनियम, 2025 की धारा 3/23 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। विवेचना पूरी करने के बाद पुलिस ने आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया।

चार माह 28 दिन जेल में रहा अभियुक्त
मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने अभियुक्त को दोषसिद्ध करार देते हुए दो वर्ष के साधारण कारावास और दो लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। जुर्माना अदा नहीं करने पर छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। अभियुक्त 26 मई से 24 अक्टूबर 2026 तक जेल में रहा। इस अवधि को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 428 के प्रयोजन के लिए दर्ज किया गया है। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक अभियोजन अधिकारी रश्मि कुलकोड़िया ने पैरवी की, जबकि बचाव पक्ष की ओर से चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसल चंद्रशेखर मिश्रा ने न्यायालय में पक्ष रखा।

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