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चाय बागान: फर्जी रजिस्ट्री से खनन भंडारण का अड्डा और लिया बिजली कनेक्शन

रजिस्ट्री फर्जीवाड़े और सीलिंग भूमि खुर्द-बुर्द करने के मामले में समाने आई एक और फर्जी रजिस्ट्री

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Round The Watch: रजिस्ट्री फर्जीवाड़े और सरकार में निहित सीलिंग भूमि को खुर्द-बुर्द किए जाने के मामले में एक फर्जी रजिस्ट्री और सामने आई है। अब तक कुल मिलाकर आठ फर्जी रजिस्ट्री सामने आ चुकी है। यह रजिस्ट्री लाडपुर क्षेत्र में सरकार में निहित चाय बागान की भूमि पर की जानी दिखाई गई है। गंभीर यह की इस रजिस्ट्री के माध्यम से जिस भूखंड पर कब्जा जमाया गया है, वहां अवैध खनन भंडारण का कार्य किया जा रहा है। साथ ही इस भूमि पर बिजली का कनेक्शन प्राप्त करने के लिए भी फर्जी रजिस्ट्री का ही प्रयोग किया गया है।
लाडपुर क्षेत्र में जिस भूखंड पर फर्जी रजिस्ट्री तैयार की गई है, वह भूमि वर्ष 2010 में शमशेर बहादुर की संपत्ति का वारिश होने का दावा करने वाली पद्मा कुमारी ने शशिबाला नौटियाल को बेची थी। इसी रजिस्ट्री को स्कैन कर भूमि को विनोद कुमार ने दीपचंद्र से क्रय करना दिखाया है। स्कैन रजिस्ट्री के आधार पर विनोद कुमार ने संबंधित भूमि पर न सिर्फ कब्जा प्राप्त कर लिया, बल्कि खुशी बिल्डिंग मटीरियल सप्लायर के नाम से बिना पंजीकरण के खनन भंडारण भी शुरू कर दिया। अवैध खनन भंडारण के लिए बिजली का कनेक्शन भी फर्जी रजिस्ट्री के आधार पर लिया गया। हाल में जिला प्रशासन विनोद कुमार को नोटिस भी जारी कर चुका है। हालांकि, यह नोटिस इस आशय के साथ भेजा गया है कि संबंधित भूमि सरकार में निहित है और स्वामित्व के दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएं। जबकि अब रजिस्ट्री के ही फर्जी होने की बात सामने आ रही है। क्योंकि, विक्रेता दीपचंद अग्रवाल व क्रेता विनोद कुमार के नाम की यह रजिस्ट्री देहरादून के सब रजिस्ट्रार कार्यालय में भी दाखिल नहीं पाई गई। दूसरी तरफ इसी जमीन पर पद्मा कुमारी से अपने नाम रजिस्ट्री कराने वाली शशिबाला भी कब्जे को लेकर समाने नहीं आ रही हैं। माना जा रहा है कि दोनों रजिस्ट्री फर्जी हो सकती हैं, लेकिन इसका सच सामने आना अभी बाकी है।

जिला प्रशासन को सुपुर्द की गई फर्जी रजिस्ट्री
सरकार में निहित चाय बागान और ग्रामीण सीलिंग की भूमि को बचाने की लड़ाई लड़ रहे अधिवक्ता विकेश नेगी ने विनोद कुमार की फर्जी रजिस्ट्री जिला प्रशासन के सुपुर्द कर दी है। इससे पहले भी वह सरकारी भूमि खुर्द-बुर्द करने वाले तमाम व्यक्तियों की रजिस्ट्री व नाम प्रशासन को दे चुके हैं। जिस पर प्रशासन की कार्रवाई अभी नोटिस तक ही सीमित है। रजिस्ट्री फर्जीवाड़े व अभिलेख गायब किए जाने के मामले में दर्ज किए गए दो मुकदमों में भी अभी इनमें से किसी व्यक्ति का नाम सूचीबद्ध नहीं किया जा सका है। न ही अभी तक सरकारी भूमि को कब्जे में लिया जा सका है।

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