आधी रात तक छापेमारी, लकड़ी कारोबारियों ने किया 05 करोड़ का वारा-न्यारा
राज्य कर विभाग ने काशीपुर में की ताबड़तोड़ कार्रवाई, 64 लाख मौके पर जमा कराए

Rajkumar Dhiman, Dehradun: राज्य कर विभाग की सतर्कता इकाई ने कर चोरी पर बड़ी चोट करते हुए टिंबर (लकड़ी) कारोबार से जुड़े व्यापारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद विभाग ने संयुक्त आयुक्त के निर्देश पर छापेमारी अभियान चलाया, जिसमें करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा हुआ है। यह कार्रवाई आयुक्त राज्य कर सोनिका के निर्देशन और संयुक्त आयुक्त एसएस तिरुवा के मार्गदर्शन में की गई।
आधी रात तक चली कार्रवाई, 02 टीमों ने घेरा नेटवर्क
27 अप्रैल 2026 को शुरू हुई यह कार्रवाई देर रात तक जारी रही। विभाग ने दो अलग-अलग टीमें गठित की थीं, जिनका नेतृत्व उपायुक्त और सहायक आयुक्त स्तर के अधिकारियों ने किया। जांच के दौरान व्यापारियों के दस्तावेज, बिलिंग रिकॉर्ड और सप्लाई चैन की गहन पड़ताल की गई।
5 करोड़ से अधिक की संदिग्ध खरीद दिखाकर टैक्स बचाने की कोशिश
जांच में सामने आया कि संबंधित व्यापारी बाहरी फर्मों से 5 करोड़ रुपये से अधिक की खरीद दिखा रहे थे, लेकिन जिन फर्मों से सप्लाई दिखाई गई, वे या तो सस्पेंड थीं या कैंसिल। यानी कागजों पर सौदे दिखाकर GST की चोरी की जा रही थी। इतना ही नहीं, कई मामलों में यह भी पाया गया कि वास्तव में माल की आपूर्ति हुई ही नहीं—सिर्फ फर्जी दस्तावेजों के जरिए लेनदेन दर्शाया गया।
गलती मानी, 64 लाख रुपये मौके पर किए सरेंडर
कड़ी पूछताछ के बाद व्यापारियों ने अपनी गलती स्वीकार कर ली। कार्रवाई के दौरान ही दोनों फर्मों की ओर से कुल 64 लाख रुपये नकद सरेंडर किए गए। यह रकम टैक्स चोरी की आंशिक भरपाई के रूप में जमा कराई गई है। कार्रवाई करने वाली टीम में उपायुक्त विनय प्रकाश ओझा, जीशान मलिक, सहायक आयुक्त अमर कुमार और विश्वजीत बिष्ट, मुकेश पांडे, आकांक्षा, निशा और देवेश फुलेरिया (राज्य कर अधिकारी) आदि शामिल रहे।
बड़े नेटवर्क की आशंका, जांच जारी
विभाग का मानना है कि यह मामला सिर्फ दो फर्मों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि आगे और भी छापेमारी और कार्रवाई संभव है।
कर चोरी पर सख्त रुख
राज्य कर विभाग ने साफ कर दिया है कि GST चोरी या फर्जी बिलिंग करने वालों के खिलाफ अब जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी। विभाग लगातार डेटा एनालिसिस और शिकायतों के आधार पर ऐसे मामलों की पहचान कर रहा है।



