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‘मैं जमीन पर लहूलुहान पड़ा था और बेटे को आंखों के सामने मार दी गोली’ 

पुलिस एनकाउंटर में मारे गए बदमाश अकरम ने 2014 में डकैती डालते समय सहायक कृषि अधिकारी के बेटे की कर दी थी हत्या  

Rajkumar Dhiman, Dehradun: 10 सितंबर 2014 की वह भयावह रात रिटायर्ड सहायक कृषि अधिकारी सुरेंद्र थपलियाल के जीवन में ऐसा जख्म दे गई, जो आज तक नहीं भर पाया। उस रात हुई निर्मम वारदात में उन्होंने अपने बेटे अंकित को अपनी आंखों के सामने खो दिया। वर्षों बाद जब इस हत्याकांड में शामिल मुख्य आरोपी अकरम पुलिस मुठभेड़ में मारा गया, तो परिवार को थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन उस रात की यादें आज भी उन्हें झकझोर देती हैं।
कैसे शुरू हुआ खौफ का वह मंजर
नकरौंदा निवासी सुरेंद्र थपलियाल बताते हैं कि तड़के करीब 4 बजे उन्हें घर के बाहर कुछ हलचल महसूस हुई। जब उन्होंने खिड़की से झांका तो एक व्यक्ति डंडा लिए खड़ा दिखाई दिया। वे तुरंत मुख्य दरवाजे की ओर बढ़े, जहां चटखनी खुली हुई थी। जैसे ही वे दरवाजा बंद करने लगे, अचानक जोर से धक्का देकर बदमाश अंदर घुस आया।
उन्होंने परिवार को आवाज दी ही थी कि हमलावर ने उनके सिर पर डंडे से वार कर दिया। शोर सुनकर उनकी पत्नी अंजनी और सास विंदेश्वरी गुसाईं भी बाहर आईं, लेकिन बदमाशों ने उन्हें भी बुरी तरह घायल कर दिया।
बेटे ने किया मुकाबला, लेकिन…
हंगामा सुनकर उनका बेटा अंकित भी कमरे से बाहर आया और बदमाश से भिड़ गया। वह हमलावर पर भारी पड़ रहा था, तभी उसके पांच और साथी खिड़की के रास्ते घर में घुस आए। बदमाश पहले ही खिड़की के पेंच खोल चुके थे।
सभी के पास हथियार थे। उन्होंने अंकित को पकड़ लिया और इससे पहले कि परिवार कुछ कर पाता, अकरम ने उसे गोली मार दी। अंकित ने अपने पिता के सामने ही दम तोड़ दिया, जबकि सुरेंद्र थपलियाल खुद गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर पड़े थे। करीब 10 मिनट तक घर में लूटपाट करने के बाद बदमाश दुलहनी नदी के रास्ते फरार हो गए।
पूरे इलाके में फैला था डर
इस डकैती और हत्या की घटना ने पूरे नकरौंदा क्षेत्र को हिला कर रख दिया था। लोगों में भारी आक्रोश था और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। हालात को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत खुद पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए उसी दिन शाम को बालावाला में पुलिस चौकी स्थापित की गई।
घटना के बाद इलाके के लोगों में इतना भय बैठ गया कि उन्होंने अपने घरों में लकड़ी की जगह लोहे की खिड़कियां लगवानी शुरू कर दीं।
अधूरा वादा: आज भी इंतजार
स्थानीय निवासी नीतू देवरानी के मुताबिक, घटना के बाद सरकार ने आश्वासन दिया था कि जिस रास्ते से बदमाश आए और भागे, उस दुलहनी नदी क्षेत्र में सुरक्षा दीवार बनाई जाएगी। लेकिन सालों बाद भी यह वादा पूरा नहीं हो सका है।
अंकित की तस्वीर के सामने निशब्द खड़े हो जाते हैं थपलियाल दंपती 
समय के साथ सुरेंद्र थपलियाल के चेहरे की चमक फीकी पड़ चुकी है। उनकी आंखों में अब स्थायी उदासी बस गई है। उनकी पत्नी अंजनी भी बेटे को याद कर अक्सर गम में डूब जाती हैं। अंकित चार बहनों का इकलौता भाई और परिवार का सबसे छोटा सदस्य था। बहनों की शादी हो चुकी है और वे अपने-अपने घरों में हैं। ऐसे में अंकित ही माता-पिता का सहारा था, जिसे उन्होंने एक ही पल में खो दिया। आज भी उनके घर के ड्राइंग रूम में अंकित की तस्वीर टंगी है। जब यादें हद से ज्यादा दर्द देती हैं, तो माता-पिता उस तस्वीर के सामने खड़े होकर खामोशी से अपने अनुत्तरित सवालों के साथ समय बिताते हैं। यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं थी, बल्कि पूरे इलाके के लिए एक ऐसा जख्म बन गई, जिसकी टीस आज भी महसूस की जाती है।

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