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वीडियो: कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने खुद पर पेट्रोल छिड़का, नर्सिंग भर्ती आंदोलन ने लिया उग्र रूप

40 से अधिक घंटों से देहरादून में चढ़े हैं नर्सिंग बेरोजगार, स्वास्थ्य विभाग ने पहुंचाए डायपर

Amit Bhatt, Dehradun: देहरादून में लंबित नर्सिंग भर्ती को लेकर चल रहा आंदोलन मंगलवार शाम अचानक विस्फोटक मोड़ पर पहुंच गया। वर्षवार भर्ती की मांग को लेकर परेड ग्राउंड स्थित पानी की टंकी (ओवरहेड टैंक) पर पिछले 40 से अधिक घंटे से कुछ आंदोलनकारियों के साथ डटी महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने खुद पर पेट्रोल डाल आत्मदाह का प्रयास किया, जिसके बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

मौके पर मौजूद नर्सिंग अभ्यर्थियों ने किसी तरह उन्हें रोक लिया। घटना के बाद प्रदर्शनकारी और अधिक आक्रोशित हो गए। बड़ी संख्या में महिला अभ्यर्थी और समर्थक परेड ग्राउंड के सामने सड़क पर लेट गए और चक्का जाम कर दिया। देखते ही देखते दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और इलाके में यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया।

आंदोलनकारियों ने साफ चेतावनी दी कि जब तक सरकार वर्षवार भर्ती को लेकर लिखित आश्वासन जारी नहीं करती, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा। ज्योति रौतेला का दावा है कि सोमवार सुबह पांच बजे से उन्होंने न भोजन किया है और न ही पानी पिया है। आंदोलन स्थल पर उनकी स्थिति को देखते हुए मंगलवार दोपहर प्रदर्शनकारियों के लिए डायपर तक मंगवाए गए।

स्वास्थ्य मंत्री से वार्ता बेनतीजा, बढ़ा आक्रोश
इससे पहले नर्सिंग एकता मंच के अध्यक्ष नवल किशोर पुंडीर के नेतृत्व में अभ्यर्थियों ने स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल से मुलाकात की थी, लेकिन बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। वार्ता विफल रहने के बाद आंदोलनकारियों का गुस्सा और भड़क गया।

159 दिनों से धरना, 24 दिन से आमरण अनशन
नर्सिंग अभ्यर्थियों का कहना है कि वे पिछले 159 दिनों से देहरादून के एकता विहार में धरना दे रहे हैं। सोमवार को आंदोलन को तेज करते हुए वे परेड ग्राउंड पहुंच गए। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, पिछले 24 दिनों से आमरण अनशन भी जारी है, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।

अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि प्रदेश में तीन से चार हजार से अधिक नर्सिंग पद खाली पड़े हैं, इसके बावजूद भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा रही। उनका कहना है कि सरकार केवल मौखिक आश्वासन दे रही है, जबकि उन्हें लिखित आदेश चाहिए।

पांच साल बाद भी पूरी नहीं हुई 2020 की भर्ती
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, राज्य सरकार ने वर्ष 2020 में करीब तीन हजार नर्सिंग पदों पर भर्ती की घोषणा की थी। हजारों युवाओं ने आवेदन कर तैयारी शुरू की, लेकिन पांच साल बीतने के बाद भी परीक्षा तक आयोजित नहीं हो सकी। इसी देरी ने अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती अटकने से कई उम्मीदवार अन्य सरकारी नौकरियों के लिए ओवरएज होने की कगार पर पहुंच गए हैं। उनका आरोप है कि वर्षों की पढ़ाई और तैयारी के बावजूद रोजगार नहीं मिल पा रहा, जिससे उनका भविष्य अधर में लटक गया है।

सरकार के दावों पर भी उठे सवाल
प्रदर्शनकारी सरकार के रोजगार संबंधी दावों पर भी सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार लगातार पांच वर्षों में 26 हजार से अधिक सरकारी नौकरियां देने की बात कर रहे हैं, लेकिन नर्सिंग भर्ती अब तक फाइलों में अटकी हुई है। आंदोलनकारी वर्षवार भर्ती प्रक्रिया शुरू करने और उसे लेकर लिखित आश्वासन जारी करने की मांग पर अड़े हुए हैं।

चिकित्सा निदेशक पहुंचे, प्रदर्शनकारियों ने किया विरोध
नर्सिंग अभ्यर्थियों के उग्र प्रदर्शन को देखते हुए चिकित्सा विभाग के निदेशक भी मौके पर पहुंचे और आंदोलनकारियों से वार्ता कर आंदोलन समाप्त करने की अपील की। हालांकि, निदेशक के पहुंचते ही प्रदर्शनकारी भड़क गए और उनका विरोध शुरू कर दिया। अभ्यर्थियों ने दो टूक कहा कि जब तक उनकी वर्षवार भर्ती की मांग पर ठोस और लिखित फैसला नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

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