
Amit Bhatt, Dehradun: देहरादून में परिवहन विभाग एक बार फिर विवादों में घिर गया है। हर्रावाला क्षेत्र में तैनात एक आरटीओ इंस्पेक्टर पर ट्रांसपोर्ट कारोबारियों से हर महीने कथित तौर पर रिश्वत वसूलने के आरोप लगे हैं। आरोपों से नाराज़ लोगों ने सोमवार को इंस्पेक्टर को एक दुकान के अंदर करीब दो घंटे तक बंधक बनाकर रखा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जिसमें बंद किए गए इंस्पेक्टर/एसआई कभी कह रहे हैं कि वह पेशाब करने आए थे और तभी उनके किए रसमलाई मंगा ली गई। वह यहां बैठक रसमलाई खाने लग गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इंस्पेक्टर नियमित रूप से वाहनों से “मासिक वसूली” करता था। सोमवार को भी वह कथित तौर पर पैसे लेने पहुंचा था, तभी ट्रांसपोर्ट कारोबारियों और स्थानीय लोगों ने उसे पकड़ लिया। मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया। जिस दुकान में इंस्पेक्टर को बंद किया गया था, वहां टेबल पर कागज में लिपटी नोटों की एक गड्डी भी रखी थी।
“छोटी गाड़ी के दो हजार, बड़ी के 12 हजार तक”
पीड़ित कारोबारियों का आरोप है कि वाहनों के हिसाब से रिश्वत की रकम तय थी। व्यापारियों का दावा है कि यह सिलसिला पिछले कई वर्षों से चल रहा था और अब तक लाखों रुपये की वसूली हो चुकी है। वसूली का शुल्क कुछ इस प्रकार बताया गया।
-छोटी गाड़ियों से ₹2,000 प्रतिमाह
-6 टायर वाहन से ₹8,000
-10 टायर वाहन से ₹10,000
-12 टायर वाहन से ₹12,000 तक वसूले जाते थे
“बिना पैसे गाड़ियां नहीं चलने दूंगा”
घटना के दौरान नाराज़ लोगों ने एक पोस्टर भी लगाया, जिसमें लिखा था, “मैं देहरादून आरटीओ हूं, बिना पैसे गाड़ियां नहीं चलने दूंगा।” इस पोस्टर ने पूरे मामले को और अधिक चर्चा में ला दिया।
वीडियो वायरल होने के बाद मचा हड़कंप
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में आरटीओ इंस्पेक्टर को दुकान के अंदर बैठे देखा जा सकता है, जबकि बाहर लोग नारेबाजी करते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद परिवहन विभाग में हड़कंप मच गया।
परिवहन सचिव ने दिए जांच और कार्रवाई के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए परिवहन सचिव ने आरटीओ प्रशासन को तत्काल जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आरटीओ प्रशासन संदीप सैनी ने बताया कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक इंस्पेक्टर को निलंबित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
सवालों के घेरे में परिवहन विभाग
इस घटना ने परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार सामने आ रहे भ्रष्टाचार के आरोपों से आम जनता और ट्रांसपोर्ट कारोबारियों में नाराज़गी बढ़ती जा रही है। अब सबकी नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है कि आखिर इस मामले में कितनी पारदर्शी और सख्त कार्रवाई होती है।



