प्रियंका गांधी के परिवार ने संभाला फार्म हाउस की 08 एकड़ भूमि पर कब्जा, नसरीन सांगा बाहर
कोर्ट के आदेश पर जिला प्रशासन ने की कार्रवाई

Rajkumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के किच्छा स्थित करीब आठ एकड़ के खान फार्म को लेकर चल रहे विवाद में शनिवार देर रात बड़ा घटनाक्रम सामने आया। सिविल कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की जेठानी सायरा वाड्रा को दो वाहनों के साथ फार्म परिसर में प्रवेश कराया। कोर्ट के निर्देशों के पालन के दौरान दूसरे पक्ष की नसरीन सांगा फार्म परिसर से बाहर चली गईं।
कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन की कार्रवाई
शनिवार को सायरा वाड्रा अपने सहयोगियों के साथ किच्छा पहुंचीं। इससे पहले उन्होंने जिला प्रशासन को सिविल कोर्ट के आदेश की प्रति सौंपी। एसएसपी और डीएम कार्यालय में आदेश की कॉपी देने के बाद उन्होंने सिटी क्लब में प्रेस वार्ता कर अपना पक्ष रखा। उनके साथ सिकंदर आलम खान और अधिवक्ता पीयूष पंत भी मौजूद रहे।
प्रशासन ने कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन के लिए फार्म और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। देर रात पुलिस ने न्यायालय का आदेश दूसरे पक्ष को उपलब्ध कराया, जिसके बाद नसरीन सांगा पक्ष के परिसर खाली करने पर सायरा वाड्रा फार्म में प्रवेश कर गईं।
सायरा वाड्रा का दावा: पहले ही हो चुका था समझौता
प्रेस वार्ता में सायरा वाड्रा पक्ष ने आरोप लगाया कि नसरीन सांगा ने 3 मई 2014 को शपथपत्र देकर भूमि से जुड़े सभी दावों से स्वयं को अलग कर लिया था। उनके अनुसार, उस समझौते के तहत बैंक ऑफ बड़ौदा के चेक के माध्यम से नसरीन सांगा को 10 लाख रुपये का भुगतान भी किया गया था।
सायरा पक्ष का कहना है कि कुलसुम खान के निधन के अगले ही दिन नसरीन सांगा ने जमीन पर दावा पेश कर दिया, जबकि उनके अनुसार इस संपत्ति पर उनका कोई वैधानिक अधिकार नहीं बनता।
फार्म में लौटने के बाद क्या बोलीं सायरा वाड्रा
फार्म परिसर में प्रवेश के बाद सायरा वाड्रा ने कहा कि वह अपने घर लौटकर खुश हैं। उन्होंने इसे सत्य की जीत बताया और कहा कि न्यायालय के आदेश के बाद उन्हें दोबारा अपने फार्म में प्रवेश मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि नसरीन सांगा और उनके सहयोगी अब फार्म छोड़ चुके हैं।
अवमानना याचिका के बाद आया नया आदेश
सायरा वाड्रा ने 3 जुलाई को किच्छा की सिविल जज (सीनियर डिवीजन) अदालत में न्यायालय की अवमानना की याचिका दाखिल की थी। उनका आरोप था कि पहले जारी न्यायालयी आदेशों का पालन नहीं किया गया।
याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने शनिवार देर रात 1 जुलाई से पहले की यथास्थिति बहाल करने का आदेश दिया। कोर्ट ने दोनों पक्षों को 1 जुलाई से पूर्व की स्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए और सायरा वाड्रा व उनके सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन को आवश्यक कदम उठाने को कहा।
इसके बाद प्रशासन और पुलिस ने फार्म परिसर में सुरक्षा बढ़ाते हुए न्यायालय के आदेश का पालन कराया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए कोर्ट के निर्देशों का अक्षरशः पालन कराया जा रहा है।
एक जुलाई से शुरू हुआ था विवाद
सायरा वाड्रा पक्ष के अनुसार, 1 जुलाई की सुबह फार्म पर कार्यरत कर्मचारियों को वेतन देने के बाद वह वहां से चली गई थीं। आरोप है कि उनके जाने के बाद नसरीन सांगा पक्ष फार्म में पहुंचा, सीसीटीवी कैमरों को नुकसान पहुंचाया, ताले तोड़े और परिसर पर कब्जा कर लिया।
सायरा वाड्रा ने इस संबंध में पुलिस को शिकायत भी दी थी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया। 2 जुलाई को एडीएम प्रशासन पंकज उपाध्याय की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई, लेकिन समाधान नहीं निकल सका और मामला आगे हाईकोर्ट तक पहुंच गया।
हाईकोर्ट ने एसडीएम और कोतवाल को किया तलब
खान फार्म विवाद अब उत्तराखंड उच्च न्यायालय में भी विचाराधीन है। जबरन कब्जे और प्रशासन की कथित मिलीभगत के आरोपों वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने संबंधित एसडीएम और किच्छा कोतवाली के थानाध्यक्ष को 6 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।
सिकंदर आलम खान की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रशासन की कथित मिलीभगत से फार्म पर कब्जा कराया गया। याचिका में यह भी कहा गया कि फार्म में मौजूद पुरुषों को बाहर निकाल दिया गया, जबकि महिलाओं, बच्चों और पशुओं को परिसर के भीतर ही रोक दिया गया।
हाईकोर्ट ने प्रशासन से इन आरोपों पर जवाब मांगा है और 11 जून 2026 को सिविल कोर्ट द्वारा जारी स्थगन आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को निर्धारित है।
क्या है खान फार्म का पूरा विवाद?
किच्छा के पिपलिया मोड़ स्थित करीब आठ एकड़ के खान फार्म की मालिकाना हक को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं। एक ओर सायरा वाड्रा और उनके चचेरे भाई सिकंदर आलम खान का दावा है कि स्वर्गीय कुलसुम खान उनकी बुआ थीं और उन्होंने वर्ष 2024 में वसीयत के माध्यम से यह संपत्ति उनके नाम कर दी थी।
वहीं, दूसरी ओर नसरीन सांगा स्वयं को इस जमीन की पुश्तैनी उत्तराधिकारी बताती हैं। उनका कहना है कि उनका परिवार वर्ष 1939 से इस भूमि पर रह रहा है और इसलिए उनका इस संपत्ति पर वैध अधिकार है।
दिसंबर 2025 में कुलसुम खान के निधन के बाद विवाद और गहरा गया। सायरा वाड्रा पक्ष ने फार्म पर अवैध कब्जे के आरोप लगाए, जबकि नसरीन सांगा पक्ष ने इसे अपनी पैतृक संपत्ति बताया। विवाद बढ़ने पर प्रशासन ने दोनों पक्षों को दस्तावेजों सहित तलब किया था। एडीएम प्रशासन ने यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश देते हुए स्पष्ट किया था कि संपत्ति पर अंतिम निर्णय न्यायालय ही करेगा।



