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देहरादून में महिला से दुष्कर्म और निर्मम हत्या के आरोपी को आजीवन कैद

डीएनए और दांतों के निशान बने अकाट्य सबूत, हाथीबड़कला में कूड़ेदान के पास मिला था अज्ञात महिला का शव

Amit Bhatt, Dehradun: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में तीन साल पहले हुए एक सनसनीखेज और रूह कंपा देने वाले बलात्कार व हत्याकांड मामले में अदालत ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट (पोक्सो)/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंजू सिंह मुंडे की अदालत ने आरोपी राजेश (पुत्र मुन्नू, निवासी कैनाल रोड, बाड़ीघाट, राजपुर, देहरादून) को महिला के साथ जबरन बलात्कार, उसकी निर्मम हत्या और साक्ष्य छुपाने का दोषी करार दिया है।

यह मामला वैज्ञानिक साक्ष्यों (FSL और DNA) के आधार पर मुकाम तक पहुंचा, जहां आरोपी के दांतों के निशान और डीएनए रिपोर्ट ने उसे कानून के शिकंजे में पूरी तरह जकड़ दिया।

क्या था पूरा मामला?

अभियोजन कथानक के अनुसार, यह खौफनाक वारदात 31 जुलाई 2023 से पहले अंजाम दी गई थी। 31 जुलाई 2023 की सुबह हाथीबड़कला क्षेत्र में सर्वे गेट के सामने एक कूड़ेदान के पास लगभग 36-37 वर्ष की एक अज्ञात महिला का शव संदिग्ध और अचेत अवस्था में मिला था। नगर निगम के सफाई कर्मी शिव कुमार ने सबसे पहले शव को देखा और पुलिस को सूचना दी। महिला के सिर, चेहरे, गर्दन और छाती पर चोटों के गहरे निशान थे और खून बह रहा था। पुलिस ने महिला को दून अस्पताल भिजवाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

सीसीटीवी फुटेज से खुला था राज

तत्कालीन चौकी प्रभारी आशीष रावत ने जब घटनास्थल के पास ‘हिमाद्री अपार्टमेंट’ के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, तो एक बेहद चौंकाने वाला दृश्य सामने आया। फुटेज में 31 जुलाई की रात लगभग 3:00 बजे एक अज्ञात व्यक्ति सुलभ शौचालय की तरफ से महिला के शव को घसीटते हुए सड़क पार कराकर कूड़ेदान के पास साक्ष्य छुपाने के इरादे से फेंकता हुआ नजर आया। इसके बाद थाना डालनवाला में अज्ञात के खिलाफ हत्या (302) और साक्ष्य छुपाने (201) की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई, जिसके बाद आरोपी राजेश को गिरफ्तार किया गया।

पोस्टमार्टम और पंचायतनामे में खुली हैवानियत की परतें

उप-निरीक्षक हिमानी चौधरी द्वारा तैयार किए गए पंचायतनामे और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आरोपी की हैवानियत साफ बयां हो रही थी। मृतका के चेहरे, गाल, होठों, दोनों ब्रेस्ट और जांघ पर दांतों से बुरी तरह काटे जाने के खूनालूदा निशान थे। महिला के सिर के पिछले हिस्से में 4 इंच का गहरा घाव था। उसके दाहिने हाथ की मुट्ठी बंद थी, जिसमें कुछ बाल फंसे हुए थे, जो संघर्ष की गवाही दे रहे थे।

कोर्ट में आरोपी ने खुद को बताया निर्दोष, लेकिन विज्ञान ने नहीं छोड़ा

मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियुक्त राजेश ने धारा 313 सीआरपीसी के बयानों में खुद को बेकसूर बताते हुए कहा था कि उसे झूठा फंसाया गया है। आरोपी ने पुलिस को दिए बयान में कुबूला था कि महिला द्वारा विरोध करने पर उसने गुस्से में उसका सिर दीवार पर दे मारा था, जिससे वह बेहोश हो गई थी और फिर उसने बलात्कार किया। हालांकि, उसने बाद में इन बयानों से इनकार किया।

लेकिन अदालत में वैज्ञानिक और फोरेंसिक साक्ष्य अकाट्य साबित हुए। विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की डीएनए रिपोर्ट में मृतका के प्राइवेट पार्ट्स से मिले सीमेन का मिलान आरोपी राजेश के डीएनए से हूबहू हो गया। साथ ही मृतका के शरीर पर मिले दांतों के निशान भी आरोपी के दांतों के सैंपल से मैच कर गए।

अदालत की सख्त टिप्पणी: दोष पूरी तरह साबित

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंजू सिंह मुंडे ने पत्रावली पर मौजूद मौखिक, दस्तावेजी और वैज्ञानिक साक्ष्यों का गहन अध्ययन करने के बाद पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी राजेश के खिलाफ धारा 376 (बलात्कार), 302 (हत्या) और 201 (साक्ष्य छुपाना) के आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह सफल रहा है।

अदालत ने आरोपी राजेश को इन सभी जघन्य धाराओं के तहत दोषी सिद्ध (Convicted) करार दिया है। सजा की अवधि का निर्धारण अदालत के मुख्य आदेश के तहत किया गया है। इस फैसले के बाद मृतका के परिवार को जहां एक तरफ न्याय मिला है, वहीं समाज में जघन्य अपराध करने वालों के खिलाफ एक कड़ा संदेश गया है।

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