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जिला बदर ही रहेगा बिल्डर पुनीत अग्रवाल, नहीं मिली राहत, कमिश्नर कोर्ट ने मांगे सभी दस्तावेज

पुलिस बमुश्किल करा पाई जिला बदर आदेश का पालन, राहत की उम्मीद पर कोर्ट ने फेरा पानी

Amit Bhatt, Dehradun: सहस्रधारा रोड स्थित एटीएस कॉलोनी से जुड़े विवादित बिल्डर पुनीत अग्रवाल को जिला बदर किए जाने के मामले में फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। जिलाधिकारी के आदेश को चुनौती देते हुए उन्होंने कमिश्नर कोर्ट में जिला बदर की कार्रवाई पर रोक (स्टे) लगाने और आदेश निरस्त करने की मांग की थी। हालांकि, कोर्ट ने तत्काल कोई अंतरिम राहत देने के बजाय मामले से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। दस्तावेजों के अध्ययन के बाद ही अगली सुनवाई में निर्णय लिया जाएगा।

जिलाधिकारी ने छह महीने के लिए किया है जिला बदर
जिला प्रशासन ने मई 2026 में पुनीत अग्रवाल के खिलाफ उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें छह महीने के लिए जिला बदर किया था। इसी कार्रवाई के तहत उनका शस्त्र लाइसेंस भी निरस्त कर दिया गया था। प्रशासन का मानना था कि आरोपी की गतिविधियां कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति के लिए खतरा बन रही थीं।

डीआरडीओ वैज्ञानिक के परिवार से मारपीट का मामला बना कार्रवाई का आधार
प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार, 13 अप्रैल को एटीएस कॉलोनी में डीआरडीओ से जुड़े एक परिवार के साथ मारपीट की घटना सामने आई थी। आरोप है कि इस हमले में पीड़ित के कान का पर्दा फट गया था। मामले में महिलाओं और बुजुर्गों के साथ भी अभद्र व्यवहार किए जाने के आरोप लगाए गए थे।

इसके अलावा वर्ष 2025 की दीपावली के दौरान कॉलोनी में बच्चों के सामने लाइसेंसी पिस्टल लहराने का मामला भी जिला प्रशासन के संज्ञान में आया था। उस समय जिलाधिकारी ने स्वतः संज्ञान लेते हुए पहले शस्त्र लाइसेंस निलंबित किया था, जिसे बाद में निरस्त कर दिया गया। इसके बाद जिला बदर की कार्रवाई भी की गई।

कई गंभीर मामलों में दर्ज हैं मुकदमे
प्रशासनिक अभिलेखों के मुताबिक पुनीत अग्रवाल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में पांच आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इनमें डीआरडीओ के वैज्ञानिक से मारपीट, आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों को धमकाने, नशे की हालत में उत्पात मचाने, बच्चों पर पिस्टल तानने, गाली-गलौज करने, वाहन से टक्कर मारने का प्रयास और जमीन पर कब्जा करने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।

कोर्ट में क्या दलील दी आरोपी ने
कमिश्नर कोर्ट में दायर प्रार्थनापत्र में पुनीत अग्रवाल की ओर से कहा गया कि उनके छोटे-छोटे बच्चे स्कूल जाते हैं और स्कूल खुलने के बाद उनके आने-जाने में दिक्कत हो रही है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि घर पर उनकी बुजुर्ग मां हैं, जिनकी देखभाल के लिए उनका घर पर रहना आवश्यक है।

बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि उनके खिलाफ दर्ज कुछ पुराने मुकदमे समाप्त या खारिज हो चुके हैं। इसलिए जिला बदर के आदेश पर पुनर्विचार करते हुए उन्हें राहत प्रदान की जानी चाहिए।

दस्तावेजों के बाद होगा अगला फैसला
फिलहाल कमिश्नर कोर्ट ने मामले में कोई अंतरिम राहत नहीं दी है। अदालत ने आरोपी से सभी संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है। अब रिकॉर्ड और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद ही यह तय होगा कि जिला बदर के आदेश को बरकरार रखा जाएगा या आरोपी को कोई राहत मिलेगी।

कॉलोनी में इस तरह ‘खौफ’ का पर्याय बनता गया बिल्डर, पत्नी पर भी आरोप
एटीएस कॉलोनी के निवासियों के मुताबिक, वर्ष 2021 से ही पुनीत अग्रवाल का व्यवहार लगातार आक्रामक और दबंगई भरा रहा है। समय-समय पर हुई घटनाओं और विवादों के चलते उनके खिलाफ अब तक पांच मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। कुछ घटनाओं में बिल्डर अग्रवाल के साथ उनकी पत्नी पर भी अभद्रता के आरोप लगाए गए हैं। बकायदे विभिन्न एफआईआर की विषय-वस्तु में उनके नाम का उल्लेख किया गया है।

बिल्डर की गुंडागर्दी का हालिया मामला उस वक्त सामने आया, जब उन्होंने डीआरडीओ से जुड़े एक वैज्ञानिक के साथ मारपीट कर दी। आरोप है कि पहले वैज्ञानिक के माता-पिता के साथ अभद्रता की गई और बाद में विरोध करने पर वैज्ञानिक को अपने परिसर में बुलाकर सहयोगियों के साथ हमला किया गया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। इस मामले में पीड़ित पक्ष की शिकायत पर रायपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।

पुराने मामलों की भी लंबी फेहरिस्त
बिल्डर के खिलाफ सामने आए मामलों का रिकॉर्ड भी गंभीर है। वर्ष 2025 में कॉलोनी के अध्यक्ष के साथ मारपीट और गाली-गलौज का आरोप लगा। इसी साल एक सरकारी अधिकारी के साथ भी हाथापाई का मामला दर्ज हुआ। बच्चों द्वारा पटाखे जलाने जैसी मामूली बात पर पिस्टल तानने की घटना ने भी लोगों को दहशत में डाल दिया था।

उससे पहले 2021 में एक महिला निवासी के साथ गाली-गलौज का मामला सामने आया था, जिसकी शिकायत उच्च स्तर तक पहुंची, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते सख्ती नहीं होने से ही आरोपी के हौसले बढ़ते गए।

अवैध निर्माण और जमीन कब्जाने के आरोप
मारपीट और अभद्रता के मामलों के अलावा, बिल्डर पर अवैध निर्माण और सरकारी जमीन पर कब्जा करने जैसे गंभीर आरोप भी लग चुके हैं। विभिन्न स्तरों पर हुई जांचों में इन आरोपों की पुष्टि होने की बात भी सामने आई है।

पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
जिला बदर की कार्रवाई से पहले भी प्रशासन बिल्डर के खिलाफ कुछ सख्त कदम उठा चुका था। पुनीत का शस्त्र लाइसेंस निरस्त किया जा चुका था और एटीएस सोसाइटी की आमसभा में भी उसकी सदस्यता भी समाप्त कर दी गई थी।

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