उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट का निधन, लंबे राजनीतिक सफर का हुआ अंत
लंबे समय से चल रहे थे अस्वस्थ, राजनीतिक जगत में शोक की लहर

Rajkumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पूर्व कैबिनेट मंत्री और प्रदेश की राजनीति के वरिष्ठ हस्ताक्षर हीरा सिंह बिष्ट का शनिवार देर रात निधन हो गया। वह लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन से प्रदेश की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई। मुख्यमंत्री समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार रविवार को देहरादून के नालापानी श्मशान घाट पर किया जाएगा।
हीरा सिंह बिष्ट उत्तराखंड राज्य गठन से पहले से ही कांग्रेस की राजनीति का सक्रिय और प्रभावशाली चेहरा रहे। राज्य बनने के बाद भी उन्होंने संगठन और सरकार, दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वह पूर्व मुख्यमंत्री एन.डी. तिवारी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे और परिवहन, श्रम तथा तकनीकी शिक्षा जैसे अहम विभागों का दायित्व संभाला। उन्हें सादगी, स्पष्टवादिता और जनसरोकारों से जुड़े नेता के रूप में जाना जाता था।
तीन बार विधायक रहे
हीरा सिंह बिष्ट उत्तराखंड विधानसभा के तीन बार सदस्य रहे। वर्ष 2002 में उन्होंने राजपुर विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की। बाद में डोईवाला विधानसभा क्षेत्र का भी प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने 2007, 2012, 2014 के उपचुनाव, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में भी कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा।
संगठन में भी निभाई अहम भूमिका
सरकारी जिम्मेदारियों के साथ ही हीरा सिंह बिष्ट लंबे समय तक कांग्रेस संगठन में सक्रिय रहे। वह इंटक (INTUC) उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे और श्रमिक हितों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाते रहे। संगठन और सरकार के बीच समन्वय बनाने वाले नेताओं में उनकी पहचान थी।
शिक्षा और पेशा
हीरा सिंह बिष्ट ने डीएवी पीजी कॉलेज, देहरादून से एम.ए. और एलएल.बी. की पढ़ाई की। सार्वजनिक जीवन में आने से पहले उन्होंने वकालत और कृषि कार्य से भी जुड़ाव रखा।
रायपुर क्रिकेट स्टेडियम के लिए भी याद किए जाते हैं
प्रदेश के खेल ढांचे को मजबूत करने में भी उनका योगदान माना जाता है। उनके पहले विधायक कार्यकाल के दौरान रायपुर क्रिकेट स्टेडियम के लिए भूमि आवंटन की पहल हुई, जो बाद के वर्षों में पूर्ण होकर उत्तराखंड के प्रमुख खेल परिसरों में शामिल हुआ।
व्यक्तिगत जीवन
साल 2022 में उनकी पत्नी प्रेमलता बिष्ट का भी निधन हो गया था। उनके परिवार में एक पुत्र और दो पुत्रियां हैं। पत्नी के निधन के बाद भी वह समय-समय पर सार्वजनिक कार्यक्रमों और राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेते रहे।
सादगी और साफगोई थी पहचान
करीब पांच दशक से अधिक समय तक सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे हीरा सिंह बिष्ट को उनके समर्थक और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी समान रूप से सादगी, ईमानदारी और बेबाक राय रखने वाले नेता के रूप में याद करते हैं। उत्तराखंड की राजनीति में उनका योगदान लंबे समय तक स्मरण किया जाएगा।



