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बद्रीनाथ धाम में ‘कल्चरल फेस्टिवल’ पर डीएम ने सेना से मांगा जवाब, पूछा- किसकी अनुमति से हुआ आयोजन?

तेज साउंड सिस्टम के इस्तेमाल पर चमोली डीएम गौरव कुमार ने गढ़वाल स्काउट के कमांडिंग ऑफिसर से मांगा स्पष्टीकरण, भविष्य में पुनरावृत्ति रोकने के निर्देश

Rajkumar Dhiman, Dehradun: बद्रीनाथ धाम में आयोजित देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल-2026 अब आयोजन से ज्यादा उसके स्वरूप और अनुमति को लेकर चर्चा में है। कार्यक्रम के दौरान तेज आवाज में साउंड सिस्टम और डीजे के इस्तेमाल के वीडियो सामने आने के बाद धार्मिक संस्थाओं की आपत्ति के बीच चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने सेना के गढ़वाल स्काउट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल शांतनु को पत्र भेजकर जवाब मांगा है।

 

डीएम के 23 सितंबर 2026 के पत्र में कहा गया है कि बद्रीनाथ धाम में बड़ी संख्या में लोग जुटे और कार्यक्रम में उच्च ध्वनि वाले साउंड सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। पत्र में बदरीनाथ को पवित्र धार्मिक स्थल बताते हुए कहा गया है कि इस प्रकार के आयोजन और तेज ध्वनि से पूजा-अर्चना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। डीएम ने सीधे पूछा है कि कार्यक्रम आयोजित करने की सक्षम स्तर से अनुमति ली गई थी या नहीं और उच्च ध्वनि वाले साउंड सिस्टम के इस्तेमाल का कारण क्या था। साथ ही भविष्य में बदरीनाथ धाम में इस प्रकार की पुनरावृत्ति नहीं होने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।

सेना और प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में हुआ था आयोजन
मामला 19 और 20 सितंबर 2026 को बद्रीनाथ के टूरिस्ट अराइवल प्लाजा में आयोजित दो दिवसीय देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल-2026 का है। आयोजन भारतीय सेना और चमोली जिला प्रशासन ने ऑपरेशन सद्भावना के तहत किया था। इसकी थीम ‘हमारी विरासत, हमारा भविष्य’ रखी गई थी। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक उद्देश्य लोक संस्कृति, सीमांत क्षेत्रों की परंपराओं, स्थानीय उत्पादों, पर्यटन और स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देना था।

महोत्सव में लोक नृत्य, लोक संगीत, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद और पारंपरिक खान-पान को प्रदर्शित किया गया। महिला स्वयं सहायता समूहों, कारीगरों, किसानों और युवा उद्यमियों ने स्टॉल लगाए। भारतीय सेना ने अपनी सैन्य प्रदर्शनी के माध्यम से सीमा सुरक्षा और ऑपरेशन सद्भावना के तहत किए जा रहे सामाजिक कार्यों की जानकारी भी दी।

मंच पर इन कलाकारों ने दी प्रस्तुति
उपलब्ध कार्यक्रम विवरण के अनुसार पहले दिन कुसुम भट्ट, गिरीश सुंदरियाल, संगीता ढौंडियाल, आलोक मलासी और लोक गायक किशन महिपाल ने प्रस्तुतियां दीं। आलोक मलासी ने हारमोनियम, त्रिष्ठव बडोनी ने तबला और सोनू ने गिटार पर संगत की। कार्यक्रम का संचालन गढ़वाली साहित्यकार एवं शिक्षक धर्मेंद्र नेगी ने किया।

विवादित बताए गए वीडियो में गायिका प्रियंका महर की प्रस्तुति का भी उल्लेख है। रिपोर्टों के अनुसार किशन महिपाल और प्रियंका महर ने महोत्सव में प्रस्तुति दी थी। इन्हीं प्रस्तुतियों के दौरान तेज संगीत और डीजे को लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारित हुए और विवाद शुरू हुआ।

समापन में सीएम धामी भी पहुंचे
20 सितंबर को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य अतिथि के रूप में समापन समारोह में भाग लिया। उन्होंने सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के विजेताओं और उपविजेताओं को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने महिला स्वयं सहायता समूहों, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल देखे तथा सेना की सैन्य प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।

समापन समारोह में जीओसी-इन-सी सेंट्रल कमान लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, जीओसी उत्तर भारत एरिया लेफ्टिनेंट जनरल डीजी मिश्रा, हरक सिंह, ब्रिगेडियर गौरव बत्रा, माधव प्रसाद सेमवाल, गजपाल सिंह बर्त्वाल, गजेंद्र सिंह रावत, विनोद कनवासी, अरुण मैठाणी, डीएम गौरव कुमार और एसपी सुरजीत सिंह पंवार समेत सेना के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, स्थानीय नागरिक, युवा, विद्यार्थी और अन्य अतिथि मौजूद थे।

आयोजन के बाद क्यों उठा विवाद?
कार्यक्रम के बाद सामने आए वीडियो में तेज संगीत, डीजे और नृत्य आधारित प्रस्तुतियां दिखाई देने पर उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत और ज्योतिर्मठ से जुड़े संतों ने आपत्ति जताई। महापंचायत के महासचिव डॉ. बृजेश सती ने कहा कि आपत्ति सांस्कृतिक आयोजन के उद्देश्य से नहीं, बल्कि उसके स्वरूप और प्रस्तुति से है। ज्योतिर्मठ के स्वामी प्रत्यक्चैतन्य मुकुंदानंद गिरी ने भी मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की। बदरीनाथ विधायक लखपत बुटोला ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है।

दूसरी ओर, जिला प्रशासन की ओर से बाद में यह स्पष्ट किया गया कि कार्यक्रम में प्रस्तुतियों और उनके स्वरूप का चयन एवं निर्धारण सेना की ओर से किया गया था। प्रशासन ने यह भी बताया कि बामणी और माणा जैसे सीमांत गांवों की लोक संस्कृति, परंपराओं और रीति-रिवाजों को दर्शाती प्रस्तुतियां भी कार्यक्रम का हिस्सा थीं।

अब सबसे बड़ा सवाल अनुमति का
डीएम के पत्र ने विवाद को एक नए बिंदु पर ला दिया है। अब सवाल केवल यह नहीं है कि बदरीनाथ जैसे धार्मिक स्थल पर कार्यक्रम का स्वरूप कैसा था, बल्कि यह भी है कि आयोजन के लिए सक्षम स्तर से अनुमति किसने दी, अनुमति में कार्यक्रम का स्वरूप और ध्वनि व्यवस्था क्या निर्धारित थी और वास्तविक आयोजन में उच्च ध्वनि वाले साउंड सिस्टम के इस्तेमाल की अनुमति किस स्तर से थी।

डीएम ने अपने पत्र में इन्हीं बिंदुओं पर सेना से जवाब मांगा है और भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति रोकने को कहा है। इस तरह धार्मिक मर्यादा को लेकर उठे सवालों के बीच अब सेना से मांगा गया प्रशासनिक स्पष्टीकरण पूरे प्रकरण का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव बन गया है।

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