बेटे की जीत को मां ने लिया कॉलेज में दाखिला, छात्रसंघ अध्यक्ष बन जाने पर हुईं भावुक
नैनीताल के डीएसबी परिसर में छात्रसंघ चुनाव का परिणाम मां की ममता ने बदल डाला, 1355 वोटों से भानु प्रताप बने अध्यक्ष

Round The Watch News: नैनीताल के डीएसबी परिसर में छात्रसंघ चुनाव का परिणाम घोषित हुआ तो जीत का जश्न समर्थकों के बीच था, लेकिन सबसे भावुक तस्वीर एक मां की रही। निर्दलीय प्रत्याशी भानु प्रताप सिंह चौहान के अध्यक्ष बनने की खबर सुनते ही उनकी मां बीना चौहान की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। बेटे को गले लगाकर वह कुछ देर तक भावुक खड़ी रहीं। यह जीत उनके लिए सिर्फ चुनावी परिणाम नहीं, बल्कि कई दिनों की मेहनत और बेटे के सपने के पूरा होने का क्षण था।
हल्द्वानी के वार्ड नंबर-10, मल्ली गोरखपुर की पार्षद बीना चौहान ने बेटे के चुनाव को पूरी तरह अपना अभियान बना लिया था। वह केवल प्रचार में उसके साथ नहीं चलीं, बल्कि डीएसबी परिसर में एमए राजनीति विज्ञान में दाखिला तक ले लिया। कई दिनों तक वह परिसर में छात्रों के बीच जाकर बेटे के लिए समर्थन जुटाती रहीं। प्रचार के दौरान उन्होंने कई बार बिना जूते-चप्पल के भी परिसर में घूमकर लोगों से भानु के पक्ष में मतदान की अपील की।
बीना चौहान के मुताबिक, भानु ने भी उनके पार्षद चुनाव के दौरान दिन-रात मेहनत की थी। तभी उन्हें बेटे के भीतर नेतृत्व की क्षमता नजर आई। हाल ही में एलएलबी की पढ़ाई पूरी करने वाले भानु पढ़ाई के साथ कॉलेज के छात्रों की समस्याओं को लेकर सक्रिय रहे हैं। मां की इच्छा थी कि वह छात्रसंघ अध्यक्ष बनकर छात्रों के बीच काम करें। इसी सपने को पूरा करने के लिए वह बेटे के साथ चुनावी मैदान में डटी रहीं।
‘बेटे का साथ देना मां की जिम्मेदारी’
परिणाम आने के बाद बीना चौहान ने कहा कि बेटे का सहयोग करना मां होने के नाते उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पूरे शहर ने उन्हें बहुत सहयोग दिया है। आगे भी बेटे का साथ देने के सवाल पर उनका जवाब था, “बिल्कुल! इतना बड़ा परिवार मिला है, इस परिवार को छोड़कर कौन जाएगा।”
उन्होंने कहा कि छात्र नेताओं की ओर से आमतौर पर कई मुद्दे उठाए जाते हैं, लेकिन छात्रों से जुड़े कुछ दूसरे विषय भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। इनमें खेलकूद से जुड़ी समस्याएं और प्रवेश के दौरान दूसरे क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों को होने वाली परेशानियां शामिल हैं। उनका कहना है कि डीएसबी परिसर में बड़ी संख्या में बाहरी क्षेत्रों के विद्यार्थी पढ़ते हैं और दाखिले के समय उन्हें कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। भानु की प्राथमिकताओं में प्रवेश प्रक्रिया को व्यवस्थित कर ऐसे विद्यार्थियों की परेशानी कम करना भी रहेगा।
1355 वोटों ने बदल दिया चुनाव का परिणाम
डीएसबी परिसर के अध्यक्ष पद पर मुकाबला तीन प्रत्याशियों के बीच रहा। निर्दलीय भानु प्रताप सिंह चौहान को 1355 वोट मिले। एबीवीपी समर्थित शुभम कुमार को 873 वोट, जबकि हिमांशु आर्या को 283 वोट मिले। इस तरह भानु प्रताप ने दोनों प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़कर अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की।
चुनाव प्रचार के दौरान बीना चौहान और उनके बेटे को लेकर बाहरी होने के सवाल भी उठाए गए थे। परिणाम आने के बाद बीना ने कहा कि छात्रों के 1355 वोटों ने ऐसे सवाल उठाने वालों को जवाब दे दिया है। उनके लिए यह संख्या केवल मतों का आंकड़ा नहीं, बल्कि बेटे के साथ छात्रों के खड़े होने का संदेश भी है।
भगवा और काले झंडे के बीच मुकाबला
डीएसबी परिसर का अध्यक्ष पद का मुकाबला अपनी राजनीतिक रंगत के कारण भी चर्चा में रहा। एबीवीपी समर्थित शुभम कुमार भगवा झंडे के साथ चुनाव मैदान में थे, जबकि निर्दलीय भानु प्रताप सिंह चौहान ने काले झंडे को अपनी पहचान बनाया। हिमांशु आर्या भी अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल थे।
मंगलवार को परिणाम घोषित होते ही भानु प्रताप के समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। वहीं, बेटे की जीत की खबर सुनकर मां बीना चौहान की आंखों में आंसू आ गए। कई दिनों तक बेटे के लिए परिसर में पसीना बहाने वाली मां के लिए वह पल भावनाओं से भरा था—जिस बेटे के सपने के लिए उन्होंने खुद कॉलेज में दाखिला लिया, उसके सिर पर अब छात्रसंघ अध्यक्ष का ताज था।



