400 से अधिक प्रवक्ताओं को बड़ी राहत, सरकार से चार सप्ताह में जवाब तलब
हाईकोर्ट ने वित्त सचिव के आदेश पर लगाई रोक, अप्रैल में होगी अगली सुनवाई

Round The Watch, Desk: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राजकीय इंटर कॉलेजों में कार्यरत 400 से अधिक प्रवक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए चयन एवं प्रोन्नत वेतनमान के पुनर्निर्धारण से संबंधित वित्त सचिव के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं, जबकि मामले की अगली सुनवाई अप्रैल माह में होगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी एवं न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने प्रवक्ता सुशील तिवारी, धीरेंद्र मिश्रा, विनोद पैन्यूली, शंकर बोरा सहित 400 से अधिक प्रवक्ताओं की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान पारित किया।
याचिकाओं में सरकारी सेवक वेतन नियमावली प्रथम संशोधन 2025 तथा वित्त सचिव द्वारा 18 दिसंबर 2025 को जारी उस शासनादेश को चुनौती दी गई है, जिसमें चयन एवं प्रोन्नत वेतनमान के पुनर्निर्धारण के निर्देश दिए गए थे।
क्या है विवाद
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वर्ष 2016 की सरकारी सेवक वेतन नियमावली के तहत प्रवक्ता एवं सहायक अध्यापक (एलटी ग्रेड) को चयन व प्रोन्नत वेतनमान दिए जाने पर एक अतिरिक्त वेतन वृद्धि देय थी। लेकिन राज्य सरकार ने नियमावली में संशोधन कर सरकारी सेवक वेतन नियमावली प्रथम संशोधन 2025 को भूतलक्षी प्रभाव से 1 जनवरी 2016 से लागू कर दिया, जिससे चयन व प्रोन्नत वेतनमान पर दी जाने वाली उक्त एक वृद्धि समाप्त कर दी गई।
इतना ही नहीं, वित्त सचिव द्वारा 18 दिसंबर 2025 को जारी आदेश में संशोधित नियमावली के अनुसार चयन एवं प्रोन्नत वेतनमान का पुनर्निर्धारण करने के निर्देश दे दिए गए, जिससे शिक्षकों के वेतन और भविष्य की वित्तीय स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई।
याचिकाकर्ताओं की दलील
प्रवक्ताओं ने अदालत में तर्क दिया कि यह संशोधन केवल शैक्षणिक संवर्ग के कर्मचारियों पर ही लागू किया गया है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 16 के तहत समानता और समान अवसर के अधिकार का उल्लंघन है। साथ ही, राज्य सरकार पूर्व में लागू वेतन नियमों के तहत दी गई वैधानिक वृद्धि को किसी भी प्रभाव से समाप्त नहीं कर सकती। यह कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों के भी विपरीत है।
हाईकोर्ट का रुख
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने वित्त सचिव के आदेश पर अग्रिम आदेशों तक रोक लगा दी है और राज्य सरकार से चार सप्ताह में विस्तृत जवाब मांगा है।
इस अंतरिम आदेश से प्रदेश भर के राजकीय इंटर कॉलेजों में कार्यरत सैकड़ों प्रवक्ताओं को तत्काल राहत मिली है और फिलहाल उनके चयन एवं प्रोन्नत वेतनमान में कोई कटौती नहीं होगी।




