सेवानिवृत्त कुलपति को 12 दिन तक व्हाट्सएप कॉल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखकर ठगे 1.47 करोड़ रुपये
1.47 करोड़ की डिजिटल अरेस्ट ठगी में STF की बड़ी कार्रवाई

Amit Bhatt, Dehradun: उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की साइबर टीम ने 1.47 करोड़ रुपये की चर्चित डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी मामले में बड़ी सफलता हासिल की है। टीम ने हरियाणा के अंबाला जिले से 50 लाख रुपये के लाभार्थी खाताधारक और लंबे समय से फरार चल रहे वांछित आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ न्यायालय से गैर-जमानती वारंट भी जारी किया गया था।
एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि यह मामला वर्ष 2025 में दर्ज हुआ था। नैनीताल निवासी एक वरिष्ठ नागरिक महिला, जो रूहेलखंड विश्वविद्यालय की सेवानिवृत्त कुलपति हैं, को साइबर अपराधियों ने स्वयं को महाराष्ट्र साइबर क्राइम का अधिकारी बताकर झांसे में लिया। आरोपियों ने महिला को बताया कि उनके नाम पर खुले बैंक खाते से 60 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है और जांच के नाम पर उन्हें लगातार व्हाट्सएप कॉल पर रखा गया।
साइबर अपराधियों ने पीड़िता को करीब 12 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ की स्थिति में रखते हुए मानसिक दबाव बनाया और ऑनलाइन सत्यापन का झांसा देकर विभिन्न बैंक खातों में कुल 1.47 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए।
जांच के दौरान एसटीएफ ने तकनीकी विश्लेषण, डिजिटल साक्ष्यों और लगातार निगरानी के आधार पर हरियाणा के अंबाला जिले के शाह थाना क्षेत्र स्थित ग्राम पिलखनी निवासी भूपिंदर सिंह (41 वर्ष) को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि साइबर ठगी से प्राप्त 50 लाख रुपये आरोपी के बैंक खाते में स्थानांतरित किए गए थे।
एसटीएफ ने बताया कि इस मामले में इससे पहले तीन अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। अब चौथे आरोपी की गिरफ्तारी से मामले की जांच को और मजबूती मिली है तथा साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
उत्तराखंड एसटीएफ ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा पुलिस, सीबीआई, ईडी, साइबर क्राइम या अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर वीडियो या व्हाट्सएप कॉल पर डराने-धमकाने की स्थिति में तुरंत सतर्क रहें। किसी भी परिस्थिति में धनराशि ट्रांसफर न करें और तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 या निकटतम साइबर थाने से संपर्क करें।



