महाराष्ट्र के साइबर ठगों ने श्रीनगर के व्यक्ति से ठगे 1.31 करोड़, मोटे मुनाफे का दिया झांसा
उत्तराखंड एसटीएफ ने साइबर ठगी के तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार, मुनाफे के लोभ में न आने की अपील

Rajkumar Dhiman, Dehradun: देवभूमि उत्तराखंड में साइबर अपराध पर अंकुश लगाने के अभियान के तहत एसटीएफ उत्तराखंड की साइबर क्राइम टीम को बड़ी सफलता मिली है। निवेश के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने 03 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ के दिशा-निर्देशन और एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह के नेतृत्व में की गई।
मामला श्रीनगर (पौड़ी गढ़वाल) निवासी एक व्यक्ति से जुड़ा है, जिसे साइबर ठगों ने अधिक मुनाफा कमाने का लालच देकर अपने जाल में फंसा लिया। ठगों ने उसे अलग-अलग बैंक खातों में पैसे निवेश करने के लिए प्रेरित किया और धीरे-धीरे उससे कुल 1 करोड़ 31 लाख रुपये की ठगी कर ली। पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून में मुकदमा संख्या 62/2025 दर्ज किया गया, जिसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 61(2) और आईटी एक्ट की धारा 66(डी) के तहत केस पंजीकृत किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने त्वरित जांच के निर्देश दिए। सहायक पुलिस अधीक्षक (साइबर) कुश मिश्रा के पर्यवेक्षण में टीम ने तकनीकी विश्लेषण शुरू किया। जांच के दौरान ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, ईमेल आईडी और मोबाइल नंबरों की गहन पड़ताल की गई, जिससे आरोपियों की पहचान सामने आई।
तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने महाराष्ट्र से जुड़े तीन आरोपियों—प्रीतेक उत्तम बाफना (32 वर्ष), आशीष कुमार (27 वर्ष) और मोहम्मद शरिम उर्फ नासिर (31 वर्ष)—को गिरफ्तार कर लिया। तीनों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी इसी तरह के अन्य साइबर अपराधों में भी शामिल रहे हैं। इस पूरे ऑपरेशन को सफल बनाने में निरीक्षक अनिल कुमार, अपर उपनिरीक्षक गोपाल सिंह और अपर उपनिरीक्षक पवन कुमार की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने इस मामले के बाद आम जनता से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि साइबर ठग लोगों को जल्दी मुनाफा देने के नाम पर झांसा देते हैं और धीरे-धीरे उनसे बड़ी रकम ठग लेते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी सरकारी एजेंसी ऑनलाइन गिरफ्तारी नहीं करती, इसलिए “डिजिटल अरेस्ट” जैसे झांसे में न आएं। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि अनजान नंबरों से आने वाली वीडियो कॉल से बचें, किसी को भी अपनी निजी जानकारी या दस्तावेज साझा न करें और फर्जी निवेश योजनाओं, टेलीग्राम या यूट्यूब आधारित ऑफर से दूर रहें।
पुलिस ने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार होता है तो वह तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करे या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराए। यह कार्रवाई एक बार फिर यह साबित करती है कि साइबर अपराध तेजी से फैल रहा है, लेकिन समय रहते सतर्कता और पुलिस की सक्रियता से ऐसे गिरोहों पर लगाम लगाई जा सकती है।



