Uttarakhand

उत्तराखंड में मधुमक्खी घोटाला! शहद की आस और मरी हुई मिली मधुमक्खियां

मोरी में हनी मिशन योजना के बी-बॉक्स पर विवाद, किसानों ने लगाए अधूरे वितरण के आरोप

Round The Watch News: प्रधानमंत्री हनी मिशन स्वरोजगार योजना के तहत विकासखंड मोरी क्षेत्र में वितरित किए गए मधुमक्खी पालन के बी-बॉक्स (Bee Box) को लेकर विवाद गहरा गया है। क्षेत्र के किसानों और बागवानों ने खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) पर योजना के मानकों के अनुरूप सामग्री उपलब्ध न कराने का आरोप लगाया है।

किसानों का कहना है कि फरवरी 2026 में योजना के तहत उन्हें जो बी-बॉक्स दिए गए, उनमें कई बॉक्स अधूरे थे और कुछ में मधुमक्खियां मृत अवस्था में मिलीं। इससे मधुमक्खी पालन का कार्य शुरू होने से पहले ही प्रभावित हो गया और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 8 और 9 फरवरी 2026 को मोरी क्षेत्र के 14 किसानों और बागवानों को योजना के अंतर्गत बी-बॉक्स वितरित किए गए थे। योजना के नियमों के अनुसार प्रत्येक बॉक्स में जीवित मधुमक्खियों की कॉलोनी, रानी मधुमक्खी, फ्रेम और अन्य जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए जाने थे, ताकि लाभार्थी तुरंत मधुमक्खी पालन शुरू कर सकें।

हालांकि, किसानों का आरोप है कि कई बॉक्स खोलने पर उनमें या तो मधुमक्खियां मृत मिलीं या फिर केवल खाली फ्रेम ही मौजूद थे। कुछ बॉक्स में कॉलोनी विकसित होने लायक सामग्री ही नहीं थी।

सांकरी निवासी किसान भगत सिंह राणा ने बताया कि वितरण के लगभग 7 से 10 दिन बाद जब बी-बॉक्स की जांच की गई, तो उनमें मधुमक्खियां मौजूद नहीं थीं। इसके कारण कॉलोनी तैयार नहीं हो सकी और मधुमक्खी पालन का पूरा प्रयास विफल हो गया।

किसानों का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में विभागीय अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन अब तक कोई संतोषजनक जवाब या समाधान नहीं मिला। उनका आरोप है कि इस लापरवाही से योजना का मूल उद्देश्य प्रभावित हुआ है और लाभार्थियों का भरोसा भी कमजोर हुआ है।

प्रभावित किसानों ने मांग की है कि विभाग उन्हें मधुमक्खियों सहित पूरी तरह तैयार और मानक अनुसार बी-बॉक्स दोबारा उपलब्ध कराए, ताकि वे फिर से स्वरोजगार के इस कार्य को शुरू कर सकें।

इसके साथ ही किसानों ने जिलाधिकारी उत्तरकाशी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

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