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15 होटल-रेस्तरां पर जीएसटी के छापे, स्टील कारोबारी पर भी शिकंजा, जमा कराए 1.79 करोड़

आयुक्त राज्य कर प्रतीक जैन के निर्देश पर राजधानी देहरादून और विकासनगर में एक्शन

Rajkumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखंड में कर चोरी के खिलाफ राज्य कर विभाग की सख्ती तेज हो गई है। देहरादून मंडल में तीन दिन तक चले विशेष अभियान और विकासनगर की एक स्टील कारोबारी फर्म पर की गई अलग कार्रवाई के दौरान विभाग ने 1.79 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा कराई है। अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों की जांच अभी जारी है और दस्तावेजों की पड़ताल के बाद कर देनदारी और बढ़ सकती है।

आयुक्त राज्य कर प्रतीक जैन के निर्देश पर चल रहे अभियान का फोकस उन कारोबारियों पर है जिन पर जीएसटी जमा न करने, फर्जी बिलिंग करने या गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) लेने के आरोप हैं। विभाग का दावा है कि हालिया जांच में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां वित्तीय रिकॉर्ड और वास्तविक कारोबारी गतिविधियों में अंतर मिला है।

पर्यटन सीजन में होटल-रेस्तरां कारोबार विभाग के रडार पर
राज्य में बढ़ती पर्यटन गतिविधियों के बीच कर चोरी की आशंकाओं को देखते हुए 6 से 8 जून तक देहरादून संभाग में होटल और रेस्तरां प्रतिष्ठानों की विशेष जांच की गई। संयुक्त आयुक्त (कार्यपालक) अनुराग मिश्रा के नेतृत्व में 15 प्रतिष्ठानों के रिकॉर्ड, कर विवरणियों और कारोबारी दस्तावेजों का परीक्षण किया गया।

जांच के दौरान ऐसे मामले सामने आए, जिनमें ग्राहकों से जीएसटी वसूले जाने के बावजूद राशि सरकारी खाते में जमा नहीं की गई थी। कुछ प्रतिष्ठानों में आईटीसी के उपयोग को लेकर भी सवाल खड़े हुए। प्राथमिक स्तर पर मिली अनियमितताओं के आधार पर विभाग ने चार होटल एवं रेस्तरां संचालकों से करीब 79.64 लाख रुपये जमा कराए।

अनुराग मिश्रा के अनुसार पर्यटन सीजन के दौरान कारोबार में बढ़ोतरी के साथ कर अनुपालन की निगरानी भी बढ़ाई गई है। उन्होंने कहा कि जिन प्रतिष्ठानों के खिलाफ साक्ष्य मिले हैं, उनके मामलों में आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।

स्टील कारोबार में खरीद-बिक्री के आंकड़ों पर सवाल
देहरादून मंडल में होटल-रेस्तरां क्षेत्र की कार्रवाई के समानांतर विकासनगर स्थित आयरन-स्टील और रूफिंग प्रोफाइल शीट निर्माण से जुड़ी एक फर्म की भी जांच की गई। यह कार्रवाई आयुक्त प्रतीक जैन, अपर आयुक्त डी.एस. गर्ब्याल और संयुक्त आयुक्त अजय कुमार के निर्देशन में हुई।

अधिकारियों के अनुसार जांच में संकेत मिले कि कारोबार से जुड़े कुछ वास्तविक लेनदेन कर रिकॉर्ड में पूरी तरह परिलक्षित नहीं हो रहे थे। साथ ही आईटीसी के दावों को लेकर भी विसंगतियां पाई गईं। टीम ने फर्म के घोषित और वास्तविक व्यावसायिक स्थलों का निरीक्षण कर दस्तावेजों का सत्यापन किया।

जांच के दौरान सामने आई अनियमितताओं के बाद फर्म ने 79 लाख रुपये जमा करा दिए। विभाग ने खरीद-बिक्री से संबंधित कई महत्वपूर्ण अभिलेख अपने कब्जे में लिए हैं, जिनकी विस्तृत जांच की जा रही है।

राज्य कर एसआईबी, देहरादून के प्रभारी उपायुक्त सुरेश कुमार ने बताया कि दस्तावेजों के विश्लेषण के बाद कर देनदारी का वास्तविक आकलन किया जाएगा। यदि अतिरिक्त अनियमितताएं सामने आती हैं तो कर, ब्याज और जुर्माने की अलग से कार्रवाई की जाएगी।

एक अन्य मामले में भी 10 लाख रुपये जमा
विभाग ने यह भी बताया कि होटल और रेस्तरां सेवाओं से जुड़े एक अन्य कारोबारी मामले में कर संबंधी विसंगतियां मिलने पर 10 लाख रुपये अतिरिक्त जमा कराए गए हैं।

अभियान में इन अधिकारियों ने निभाई भूमिका
होटल एवं रेस्तरां क्षेत्र में की गई जांच में उपायुक्त प्रीति मनराल, विजय कुमार, अजय बिरथरे, योगेश मिश्रा और निखिलेश श्रीवास्तव, जबकि सहायक आयुक्त अवनीश कुमार पांडे, दीपक सेमवाल, अनंत रजनीश, राजीव तिवारी और उमेश दुबे शामिल रहे। राज्य कर अधिकारियों गजेंद्र भंडारी, मिनी झिंक्वाण, गुलाम गौश और रघुवीर सिंह चौहान ने भी अभियान में भागीदारी की। विकासनगर की स्टील फर्म की जांच में सहायक आयुक्त टीआर चन्याल और धर्मवीर सैनी, राज्य कर अधिकारी अनुराग पाठक तथा भूपेंद्र जंगपांगी शामिल रहे।

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