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वीडियो: पीएम मोदी ने मां डाट काली से ली आज्ञा और देश को समर्पित किया दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर

धरातल पर उतरा सपने सरीखा 12 हजार करोड़ रुपये का 213 किमी लंबा एक्सप्रेसवे

Rajkumar Dhiman, Dehradun: प्रधानमंत्री Narendra Modi ने मंगलवार को गढ़ी कैंट स्थित जसवंत सिंह आर्मी ग्राउंड में आयोजित भव्य समारोह में करीब 210 किलोमीटर लंबे दिल्ली–देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का लोकार्पण किया। रिमोट बटन दबाकर परियोजना का शुभारंभ करते हुए उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए प्रगति, प्रकृति और संस्कृति का संतुलित संगम अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विकास का मॉडल ऐसा होना चाहिए जिसमें आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत तीनों साथ-साथ आगे बढ़ें। लोकार्पण से पहले प्रधानमंत्री ने लगभग 12 किलोमीटर लंबे रोड शो में हिस्सा लिया और इसके बाद Dat Kali Temple में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया।

चारधाम यात्रा और उत्तराखंड की प्रगति का उल्लेख
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत बैसाखी और बिहू की शुभकामनाओं के साथ की। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में उत्तराखंड के पवित्र चारधामों की यात्रा भी शुरू होने जा रही है, जिसका देशभर के श्रद्धालु बेसब्री से इंतजार करते हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली–देहरादून कॉरिडोर बनने से चारधाम यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलेगी और यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड अब अपने गठन के 26वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है और विकास की नई ऊंचाइयों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि उन्होंने कुछ वर्ष पहले Kedarnath Temple की धरती से कहा था कि यह दशक उत्तराखंड का होगा, और आज वह बात सच होती दिखाई दे रही है।

बाबा साहेब को श्रद्धांजलि और सामाजिक न्याय का संदेश
प्रधानमंत्री ने B. R. Ambedkar की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में सरकार के निर्णय संविधान की गरिमा को मजबूत करने वाले रहे हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय, समान अवसर और गरीबों के उत्थान की दिशा में केंद्र सरकार लगातार कार्य कर रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि बाबा साहेब औद्योगिकीकरण और आधुनिक बुनियादी ढांचे के प्रबल समर्थक थे, क्योंकि वे जानते थे कि संतुलित आर्थिक विकास ही सामाजिक न्याय की सबसे मजबूत नींव बन सकता है।

सड़कें बन रही हैं राष्ट्र की भाग्य रेखाएं
प्रधानमंत्री ने कहा कि जैसे लोग भविष्य जानने के लिए हाथ की रेखाओं को देखते हैं, वैसे ही आज आधुनिक भारत में सड़कें राष्ट्र की भाग्य रेखाएं बनती जा रही हैं। उन्होंने कहा कि ये सड़कें केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि आर्थिक समृद्धि, रोजगार और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य की गारंटी हैं। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में देशभर में अभूतपूर्व इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश हुआ है और उत्तराखंड में भी सड़कों, रेल परियोजनाओं और रोपवे नेटवर्क पर तेजी से काम हो रहा है।

उत्तराखंड में तेज गति से बदल रही तस्वीर
प्रधानमंत्री ने कहा कि चारधाम महामार्ग परियोजना, रेल विस्तार, Kedarnath Temple और Hemkund Sahib रोपवे जैसी परियोजनाएं उत्तराखंड की विकास यात्रा को नई गति दे रही हैं। उन्होंने कहा कि जिन गांवों में कभी सड़क पहुंचने में पीढ़ियां बीत जाती थीं, वहां आज सड़कें तेजी से पहुंच रही हैं और वीरान गांव फिर से जीवंत हो रहे हैं।

नए भारत में स्पीड और स्केल की मिसाल
प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी का भारत जिस गति और पैमाने पर काम कर रहा है, उसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। उन्होंने दिल्ली मेट्रो विस्तार, मेरठ तक मेट्रो सेवा, Noida International Airport और अब दिल्ली–देहरादून कॉरिडोर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह नए भारत की कार्यशैली का उदाहरण है।

किसानों, व्यापार और पर्यटन को मिलेगा लाभ
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस कॉरिडोर से लोगों के यात्रा समय में कमी आएगी, ईंधन की खपत घटेगी और किराया व मालभाड़ा कम होगा। साथ ही किसानों को अपने उत्पाद बड़ी मंडियों तक तेजी से पहुंचाने में सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि इसका सबसे बड़ा लाभ उत्तराखंड के पर्यटन उद्योग को मिलेगा।

बारामासी पर्यटन की दिशा में उत्तराखंड
प्रधानमंत्री ने राज्य सरकार की विंटर टूरिज्म, विंटर स्पोर्ट्स और वेड इन उत्तराखंड जैसी पहलों की सराहना की। उन्होंने कहा कि अब उत्तराखंड केवल मौसमी नहीं, बल्कि बारामासी पर्यटन मॉडल की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने अपनी Adi Kailash यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

प्रकृति संरक्षण के साथ विकास
प्रधानमंत्री ने कहा कि विकास कार्यों के दौरान वन्यजीवों और प्रकृति का संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इसी सोच के तहत दिल्ली–देहरादून कॉरिडोर में 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ सेक्शन बनाया गया है, ताकि जंगल और वन्यजीवों की प्राकृतिक आवाजाही प्रभावित न हो।

स्वच्छ देवभूमि का संदेश
प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के लोगों और यहां आने वाले पर्यटकों से देवभूमि को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक कचरा और गंदगी इस पवित्र भूमि की गरिमा को आहत करती है, इसलिए स्वच्छता हम सबकी साझा जिम्मेदारी है।

महिला आरक्षण और सैन्य परंपरा पर जोर
प्रधानमंत्री ने महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कहा कि संसद द्वारा पारित महिला आरक्षण कानून आने वाले समय में लोकतंत्र को और मजबूत करेगा। साथ ही उन्होंने उत्तराखंड की सैन्य परंपरा का उल्लेख करते हुए Jaswant Singh Rawat को नमन किया और पूर्व सैनिकों के सम्मान में लागू वन रैंक, वन पेंशन योजना का भी उल्लेख किया।

उत्तराखंड में 1.3 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट गतिमान
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने अपने संबोधन में कहा कि दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर उत्तराखंड के विकास को नई गति प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से उत्तराखण्ड में करीब एक लाख 30 हजार करोड़ रूपए के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है।

गडकरी ने कहा कि सहारनपुर बाईपास से हरिद्वार तक 51 किलोमीटर छह लेन रोड़ का भी जून में उद्घाटन होने जा रहा है। इसी तरह 1650 करोड़ रूपए की लागत से पॉंवटा साहिब से देहरादून फोर लेन मार्ग अगले महीने तक शुरू हो जाएगा। 1600 करोड़ रूपए की लागत से हरिद्वार में फोर लेन ग्रीन फील्ड बाईपास फेज-1 अक्टूबर, 2026 तक पूरा हो जाएगा, जिससे हरिद्वार और ऋषिकेश जाने में ट्रैफिक जाम की समस्या हल होगी। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने ₹1100 करोड़ की लागत से ऋषिकेश बाईपास परियोजना को भी मंजूरी प्रदान कर दी है, जिस पर अगस्त तक काम शुरू हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि ₹1050 करोड़ की लागत से रुद्रपुर में 21 किमी. लंबा फोरलेन बाईपास इसी साल अक्टूबर और ₹936 करोड़ की लागत से काशीपुर से 15 किमी. लंबा फोरलेन बाईपास दिसंबर 2026 में पूरा होगा। साथ ही ₹716 करोड़ की लागत से 12 किमी. लंबा देहरादून-झाझरा-आशारोड़ी फोर लेन एलिवेडेट रोड़ अगले साल अप्रैल और ₹745 करोड़ की लागत से भानियावाला, जॉलीग्रांट से ऋषिकेश तक 20 किमी. लंबा फोर लेन मार्ग अप्रैल 2028 तक पूरा होगा। साथ ही साथ ₹800 करोड़ की लागत से श्रीनगर में भी टू लेन बाईपास की डीपीआर बन रही है।

उन्होंने कहा कि पहले हमें मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल और चीन से होकर जाना पड़ता था, लेकिन अब ₹5200 करोड़ रूपये की लागत से टनकपुर-पिथौरागढ़ होकर लिपुलेख तक मार्ग बनाया जा रहा है। 370 किमी लंबे इस प्रोजेक्ट में से करीब 200 किमी. का कार्य पूरा हो चुका है।इसी तरह ₹12 हजार करोड़ की लागत से निर्माणाधीन 825 किमी लंबी चारधाम सड़क परियोजना में 640 किमी. का काम पूरा हो चुका है। 1300 करोड़ रूपए की लागत से रुद्रप्रयाग से गौरीकुंड तक का कार्य दिसम्बर 2026 तक शुरू किया जाएगा। इसके साथ-साथ गंगोत्री धाम जाने के लिए 142 किमी का काम पूरा हुआ है और बाकी 100 किमी. का काम चरणबद्ध तरीके से हो रहा है। यमुनोत्री धाम में ₹2500 करोड़ की लागत से धरासू से यमुनोत्री तक 46 किमी. का काम पूरा हो चुका है और 30 किमी. का काम अप्रैल, 2028 तक पूरा हो जाएगा।

केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी ने कहा कि केंद्र सरकार सोनप्रयाग-केदारनाथ और गोंविदघाट से हेमकुंट साहिब रोप-वे पर भी काम कर रही है। प्रदेश में अनेक जगहों पर टनल भी बनाई जा रही है।

प्रधानमंत्री का प्रत्येक दौर सौगात लेकर आया: सीएम धामी 
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के उत्तराखंड आगमन पर स्वागत करते हुए कहा कि उनका प्रत्येक दौरा उत्तराखंड के लिए नई ऊर्जा और विकास की नई सौगात लेकर आता है। उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश और उत्तराखण्ड को ₹12 हजार करोड़ की लागत से बने एशिया के सबसे लंबे ऐलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर की सौगात मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन कई मायनों में विशेष है। एक ओर जहां दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के रूप में उत्तराखंड की विकास यात्रा को नई गति मिल रही है, वहीं यह अवसर डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती का भी है। उन्होंने बाबा साहेब को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि बाबा साहेब ने सामाजिक सौहार्द एवं समरसता को मजबूत करने के लिए वंचित वर्ग को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का काम किया है।

मुख्यमंत्री ने देशवासियों को बैसाखी और सिख नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व हमारे सांस्कृतिक वैभव और कृषि परंपराओं का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश ने बीते वर्षों में अभूतपूर्व प्रगति की है। 2014 के बाद भारत ने आधारभूत संरचना, अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तिकरण, राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुआ है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने 21वीं सदी का तीसरा दशक, उत्तराखंड का दशक बताकर सभी का उत्साहवर्धन किया है। प्रधानमंत्री ने सीमांत गांव माणा में आकर उसे देश का प्रथम गांव घोषित किया, इन्वेस्टर समिट के उद्घाटन पर वेड इन उत्तराखंड का संदेश दिया, आदि-कैलाश का दर्शन कर इस तीर्थ को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाई, राष्ट्रीय खेलों के उद्घाटन से देवभूमि को खेलभूमि के रूप पहचान दिलाई, हर्षिल मुखबा से शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा दिया एवं रजत जयंती वर्ष के अवसर पर अगले 25 वर्षों के लिए राज्य को एक नया विजन दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार, प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनने के लिए अपने विकल्प रहित संकल्प के साथ “विकास भी और विरासत भी’’ की अवधारणा के अनुरूप प्रत्येक क्षेत्र में कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन का समापन “अब रफ्ता-रफ्ता नहीं, पूरी रफ्तार के साथ आगे बढ़ रहा है भारत”, “अब नक्सलवाद, उग्रवाद और आतंकवाद से जीत रहा है भारत”, “अब अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार के साथ-साथ नवाचार में भी कीर्तिमान बना रहा है भारत” कविता से किया। उन्होंने कविता के माध्यम से प्रधानमंत्री के नेतृत्व, विकास कार्यों और जनसेवा के प्रति उनके समर्पण को सराहा और आभार व्यक्त किया।

इससे पहले, मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को नंदा राजजात पर आधारित स्मृति चिन्ह भेंट किया, जिसमें मां नंदा की डोली, यात्रा की अगुवाई करते खाड़ू तथा स्थानीय लोगों का सुंदर चित्रण किया गया है।

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