
Amit Bhatt, Dehradun: नागरिक सुविधाओं के मामले में फिसड्डी साबित होता जा रहा देहरादून कैंट बोर्ड भ्रष्टाचार में न सिर्फ निरंतर आगे बढ़ता दिख रहा है, बल्कि बोर्ड के अस्पताल में चहेते अभ्यर्थी की नियुक्ति के लिए नियम कानून को भी ताक पर रखा जा रहा है। पूर्व में जिस अभ्यर्थी को कैंट बोर्ड के अस्पताल में मेडिकल अधिकारी (डॉक्टर) के पद पर नियुक्त के लिए अनुभव के मानक दरकिनार कर दिए थे, इस बार भर्ती प्रक्रिया से अनुभव की सीमा को ही हटा दिया गया है। बताया जा रहा है कि यह सब अस्पताल में सीनियर फार्मेसिस्ट पद पर तैनात व्यक्ति की पुत्री गुंजन पांथरी के लिए किया जा रहा है। गंभीर यह कि दो अभ्यर्थी ऐसे भी शामिल किए गए हैं, जो एमबीबीएस से कोसों दूर बीए की शैक्षिक योग्यता रखते हैं।
इससे पहले जब मेडिकल ऑफिसर के पद के लिए आवेदन मांगे गए थे तो तीन साल के अनुभव की शर्त शामिल की गई थी। लेकिन, ऐन वक्त पर अनुभव के नियम को दरकिनार करते हुए गैर अनुभव वाली अभ्यर्थी गुंजन पांथरी की नियुक्ति की तैयारी कर दी गई थी। तब एक योग्य अभ्यर्थी की ओर से कैंट बोर्ड अध्यक्ष और तत्कालीन सीईओ हरेंद्र सिंह ने शिकायत का संज्ञान लेकर आवेदन प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी।
चूंकि अब हरेंद्र सिंह का सीईओ पद से ट्रांसफर हो गया है तो फिर से मेडिकल ऑफिसर के पद पर नियुक्ति के खेल नए रूप में शुरू कर दिया गया है। माना जा रहा है कि यदि बोर्ड स्तर पर इस तरह की मनमर्जी हावी है तो इस पूरे प्रकरण में लेनदेन की भूमिका भी हो सकती है। ऐसे में पारदर्शी प्रक्रिया के हिमायती अभ्यर्थियों की मांग है कि रक्षा मंत्रालय और सीबीआई को हस्तक्षेप करना चाहिए। ताकि दोषी और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा सके।



