महिला शिक्षिका के 15 बैंक खाते और मिला करोड़ों का ट्रांजेक्शन, भैया थार खरीदने की कर रहा था तैयारी
हरिद्वार से गिरफ्तार की गई 26 वर्षीय सोनम से पूछताछ में पुलिस कर रही नए-नए खुलासे

Rajkumar Dhiman, Dehradun: हरिद्वार के पिरान कलियर क्षेत्र से गिरफ्तार की गई शिक्षिका सोनम से जुड़ी जांच में लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं। करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन की जांच कर रही एजेंसियों को अब पता चला है कि सोनम के पास करीब 15 बैंक खातों तक पहुंच थी और इन्हीं खातों के जरिए रकम को एक जगह से दूसरी जगह भेजा जाता था। पढ़ाई के बाद सोनम एक इंटर कॉलेज में शिक्षिका बन गई थीं और वह कथित रूप से पाकिस्तान से ऑपरेटर किए जा रहे गिरोह के निर्देशों का निरंतर पालन कर रही थी।
जांच अधिकारियों के अनुसार सोनम किसी एक स्थायी खाते पर निर्भर नहीं थी। जैसे ही कोई खाता बंद होता, उसकी जगह नया बैंक खाता, एटीएम कार्ड और पासबुक उपलब्ध करा दिए जाते थे। एजेंसियों को शक है कि इसी तरीके से लंबे समय तक बड़े पैमाने पर पैसों का ट्रांजेक्शन किया जाता रहा।
वॉट्सएप पर आता था मैसेज, फिर तुरंत निकलती थी पैसे निकालने
पूछताछ में सामने आया है कि खातों में रकम जमा होते ही सोनम को वॉट्सएप पर सूचना भेजी जाती थी। कई बार यदि वह मैसेज नहीं देखती थी तो उसे कॉल कर जानकारी दी जाती थी। इसके बाद वह तुरंत बैंक या एटीएम पहुंचकर रकम निकालती और दूसरे खातों में जमा करा देती थी। यह मनी ट्रेल मनी लॉन्ड्रिंग के भी सीधे तौर पर दायरे में है।
जांच में यह भी पता चला है कि वह एक बार में आमतौर पर करीब 30 हजार रुपये जमा कराती थी। पुलिस को संदेह है कि इसी प्रक्रिया के जरिए बड़ी रकम अलग-अलग खातों के माध्यम से इधर-उधर पहुंचाई जाती रही। इस पूरे ट्रांजेक्शन को संदिग्ध आतंकी गतिविधि के रूप में भी देखा जा रहा है और पूरे पत्ते खुलना अभी बाकी है।
निजी खाते का इस्तेमाल नहीं करती थी सोनम
जम्मू-कश्मीर पुलिस की पूछताछ में यह बात भी सामने आई है कि सोनम अपने निजी बैंक खाते का उपयोग नहीं करती थी। उसे अलग-अलग खातों के एटीएम कार्ड और पासबुक दिए जाते थे। अब जांच एजेंसियां इन खातों के वास्तविक धारकों की पहचान करने में जुटी हैं।
साथ ही पिछले एक साल के दौरान इन खातों से हुए लेनदेन, बैंक रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और सोशल मीडिया गतिविधियों की भी गहन जांच की जा रही है।
गांव की युवती ने कराया संपर्क, फिर शुरू हुआ नेटवर्क से जुड़ाव
पूछताछ में सोनम ने बताया कि आर्थिक तंगी के कारण वह काम की तलाश में थी। इसी दौरान गांव की एक युवती ने उसकी पहचान उमर नाम के व्यक्ति से कराई। शुरुआत में दोनों के बीच केवल वॉट्सएप कॉल पर बातचीत होती रही और करीब एक महीने तक उमर ही उससे संपर्क में रहा।
बाद में उमर ने उसकी बातचीत आदिल और हजीब नाम के लोगों से कराई। सोनम का दावा है कि वह कभी इन लोगों से आमने-सामने नहीं मिली और पूरा संपर्क ऑनलाइन माध्यम से ही होता था। अब जांच एजेंसियां उमर, आदिल और हजीब की भूमिका खंगाल रही हैं।
परिवार को बताया ऑनलाइन बिजनेस, भाई देख रहा था थार खरीदने का सपना
सोनम के पिता की कुछ वर्ष पहले मौत हो चुकी है। परिवार में पांच बहनें और एक भाई हैं। दो बहनों की शादी हो चुकी है। पढ़ाई पूरी करने के बाद सोनम एक इंटर कॉलेज में पढ़ाने लगी थी और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी भी संभाल रही थी।
ग्रामीणों के मुताबिक सोनम घरवालों और आसपास के लोगों को बताती थी कि वह ऑनलाइन बिजनेस से अच्छी कमाई कर रही है। इसी दौरान उसका बेरोजगार भाई गांव में ईद के बाद थार खरीदने की बातें करता था। अब अचानक बढ़ी आर्थिक गतिविधियों को लेकर गांव में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
राहुल खान के मोबाइल से मिला था सुराग
जांच एजेंसियों के अनुसार जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले से गिरफ्तार राहुल खान के मोबाइल फोन से सोनम का नंबर मिला था। मोबाइल की जांच के दौरान खातों से जुड़े कुछ दस्तावेज भी बरामद हुए थे। इसी के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस हरिद्वार पहुंची और स्थानीय पुलिस की मदद से सोनम को हिरासत में लिया गया।
अब एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि सोनम केवल ट्रांजेक्शन नेटवर्क का हिस्सा थी या उसे पूरे गिरोह की गतिविधियों की जानकारी थी। जांच का फोकस इस बात पर है कि रकम कहां से आ रही थी, किन खातों के जरिए घूम रही थी और आखिरकार किस तक पहुंचाई जा रही थी।



