
Rajkumar Dhiman, Dehradun: देहरादून में फरार बिल्डर दीपक मित्तल को भारत लाने की कोशिशें अब तेज होती दिख रही हैं, लेकिन इस पूरे मामले में दो वरिष्ठ अफसरों की कथित भूमिका इसे पेचीदा बना रही है। ये दोनों बिल्डर के घोषित/अघोषित पार्टनर बताए जा रहे हैं और इनके कई निजी राज भी बिल्डर के पास हैं।
बिल्डर दीपक मित्तल और उसकी पत्नी राखी मित्तल फ्लैट खरीदारों से 45 करोड़ रुपये से अधिक की रकम लेकर साल 2020 से फरार हैं। हाल में दीपक मित्तल की पत्नी राखी को दुबई में Interpol की मदद से गिरफ्तार किया गया है। इस कार्रवाई के बाद दीपक की गिरफ्तारी की उम्मीद भी बढ़ गई है। हालांकि, पुलिस को इंटरपोल तक पहुंचने में पांच साल से ज्यादा का समय लगना कई सवाल खड़े कर रहा है।
अफसरों की नजदीकियां बनीं अड़चन
सूत्रों के मुताबिक, दीपक मित्तल के साथ एक वरिष्ठ आईएएस और एक आईपीएस अधिकारी की करीबी रही है। चर्चा यह भी है कि इन अधिकारियों ने दीपक के जरिए विभिन्न कारोबारी योजनाओं में निवेश किया था।
एक अधिकारी उसके साथ विदेश यात्राओं पर भी जा चुका है। दूसरे अधिकारी ने दीपक की एक क्लब निर्माण परियोजना में खुद को निदेशक तक बनवा लिया था। हालांकि, बिल्डर के फर्जीवाड़े के बाद यह परियोजना कभी जमीन पर नहीं उतर सकी।
निजी वीडियो और फोटो का डर
बताया जा रहा है कि फरार होने से पहले दीपक मित्तल के पास इन दोनों अधिकारियों के साथ बिताए गए समय के कई निजी वीडियो और तस्वीरें मौजूद हैं। यही वजह है कि यदि दीपक को भारत लाया जाता है, तो जांच एजेंसियों के सामने इन अधिकारियों के नाम उजागर होने का खतरा बना हुआ है।
जांच में देरी पर उठे सवाल, क्या समय देगा जवाब
यही कारण माना जा रहा है कि लंबे समय तक कार्रवाई सिर्फ लुकआउट सर्कुलर और ब्लू कॉर्नर नोटिस तक सीमित रही। मामला आगे नहीं बढ़ पाया। बाद में राज्य सरकार की सख्ती के बाद ही रेड कॉर्नर नोटिस जारी हुआ और इंटरपोल की सक्रिय भूमिका शुरू हो सकी।
राखी मित्तल की गिरफ्तारी के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि इंटरपोल जल्द ही दीपक मित्तल तक भी पहुंच सकता है। वहीं, जिन अधिकारियों के नाम चर्चा में हैं, वे संभावित खुलासों को लेकर अंदरखाने काफी असहज बताए जा रहे हैं।



