दून में नाला पाटकर फ्लैट बनाने की तैयारी? नगर निगम की गरजी जेसीबी, गुमराह कर नक्शा पास
अपनी जमीन की आड़ में नाले पर कब्जा, बिल्डर ने ले ली थी खनन की अनुमति

Rajkumar Dhiman, Dehradun: देहरादून में नदी-नालों पर अतिक्रमण और निर्माण स्वीकृतियों को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। नगर निगम ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए उस नाले को अतिक्रमण से मुक्त कराया, जिसे कथित तौर पर मिट्टी और मलबा डालकर पाट दिया गया था। आरोप है कि इसी भरे हुए नाले पर कब्जा कर बहुमंजिला आवासीय परियोजना तैयार की जा रही थी।
मामला धनवन्ती लग्जरी बिल्डर्स प्रा. लि. से जुड़ा बताया जा रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों का आरोप है कि बिल्डर ने विभागों को गुमराह कर खनन की अनुमति हासिल की और निकाली गई मिट्टी को प्लॉट के पीछे स्थित उस नाले में डाल दिया, जो बिंदाल नदी से जुड़ा है। इसके बाद उसी स्थान पर निर्माण गतिविधियां शुरू कर दी गईं। अब नगर निगम की कार्रवाई के बाद पास किए गए नक्शे पर निरस्तीकरण की तलवार लटक गई है।
मामले को इसलिए गंभीर माना जा रहा है क्योंकि 24 मार्च 2025 को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उर्मिला थापा बनाम राज्य सरकार व अन्य मामले में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि रिस्पना, बिंदाल और उनसे जुड़े नदी-नालों में मलबा डालने वालों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए और अतिक्रमण हटाया जाए। कोर्ट ने प्राकृतिक जल प्रवाह में बाधा बनने वाले अवरोध मानसून से पहले हटाने, संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी लगाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए थे। इसके बावजूद नाले को पाटे जाने के आरोप सामने आए हैं।
शिकायतें हुईं, लेकिन कार्रवाई देर से
बीते 28 मार्च 2026 को पार्षद मोहन बहुगुणा ने जिलाधिकारी को शिकायत देकर आरोप लगाया था कि बिल्डर ने खनन अनुमति की आड़ में नाले को भर दिया है। शिकायत में इसे हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन बताते हुए एफआईआर दर्ज करने, खनन अनुमति निरस्त करने और नाले को मूल स्वरूप में बहाल करने की मांग की गई थी। इससे पहले जनवरी 2026 में हाथीबड़कला क्षेत्र के भूमि स्वामियों ने उपजिलाधिकारी सदर को शिकायत देकर संबंधित भूमि पर अवैध कब्जे और निर्माण के प्रयास का आरोप लगाया था।
बोर्ड बैठक में उठा मामला, तब हुई कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार यह मामला नगर निगम बोर्ड बैठक में भी जोरदार तरीके से उठा। पार्षद भूपेंद्र कठेत ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, जिसके बाद नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची और अतिक्रमण हटाकर नाले को मुक्त कराया।
अब उठ रहे बड़े सवाल
– यदि नाला पाटकर निर्माण हो रहा था, तो संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई?
– एमडीडीए के अभियंताओं को गुमराह कर कैसे पास हो गया नक्शा?
– हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद एफआईआर क्यों नहीं हुई?
– शिकायतों के बावजूद कार्रवाई में देरी के लिए जिम्मेदार कौन?




