पतंजलि के आंवला मुरब्बे और पापड़ पर उठे सवाल, फफूंदी और दुर्गंध की शिकायत के बाद सैंपल जांच को भेजे गए
आरटीआई एक्टिविस्ट और आरटीआई क्लब की उपाध्यक्ष रीता सूरी की शिकायत पर हरकत में आया खाद्य सुरक्षा विभाग

Amit Bhatt, Dehradun: योग और आयुर्वेद के क्षेत्र में देश-दुनिया में पहचान बना चुकी पतंजलि के खाद्य उत्पाद एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। आरटीआई एक्टिविस्ट एवं आरटीआई क्लब की उपाध्यक्ष रीता सूरी ने पतंजलि के आंवला मुरब्बा, अचार और पापड़ में गंभीर गुणवत्ता संबंधी खामियां मिलने का आरोप लगाते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने संबंधित उत्पादों के नमूने लेकर उन्हें जांच के लिए रुद्रपुर स्थित प्रयोगशाला भेज दिया है।
जानकारी के अनुसार, 2 मई को रीता सूरी ने अपने गनर के माध्यम से रेसकोर्स स्थित भंडारी इंटरप्राइजेज से पतंजलि के आंवला मुरब्बा, अचार और पापड़ खरीदे थे। उनका आरोप है कि जब घर पर इन उत्पादों को खोला गया तो आंवला मुरब्बे के डिब्बे से तेज दुर्गंध आने लगी और उसमें फफूंदी दिखाई दी। वहीं पापड़ों में भी असामान्य दुर्गंध महसूस हुई।
रीता सूरी ने बताया कि उन्होंने तत्काल मामले की शिकायत सहायक खाद्य सुरक्षा आयुक्त मनीष सयाना से की। शिकायत के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग हरकत में आया और खाद्य सुरक्षा अधिकारी संजय तिवारी ने 3 जून को संबंधित प्रतिष्ठान का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान विधिवत प्रक्रिया अपनाते हुए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट के तहत नमूने लिए गए तथा उन्हें परीक्षण के लिए रुद्रपुर लैब भेज दिया गया।
रीता सूरी का दावा है कि वह कई वर्षों से पतंजलि के खाद्य उत्पादों का उपयोग करती रही हैं, लेकिन समय-समय पर गुणवत्ता संबंधी शिकायतें सामने आती रही हैं। उनका कहना है कि पहले उत्पाद बदल दिए जाते थे, लेकिन इस बार मामला केवल उपभोक्ता अधिकारों का नहीं बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा होने के कारण उन्होंने इसे उच्च स्तर तक उठाने का निर्णय लिया।
उन्होंने कहा कि यदि कोई उपभोक्ता ऐसे उत्पादों का सेवन कर ले तो फूड प्वाइजनिंग जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। उनके अनुसार यह सीधे-सीधे लोगों के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है, इसलिए इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
उधर, पतंजलि के अधिकारियों ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि कंपनी गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर पूरी तरह गंभीर है। कंपनी का कहना है कि आंतरिक गुणवत्ता निगरानी प्रणाली को और अधिक सशक्त बनाया जाएगा ताकि किसी भी प्रकार का संदिग्ध या मानकविहीन उत्पाद बाजार तक न पहुंच सके। अधिकारियों ने यह भी कहा कि यदि कहीं डुप्लीकेट अथवा नकली उत्पाद की आशंका पाई जाती है तो उसके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।
रीता सूरी ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई और भविष्य में ऐसे उत्पादों की बिक्री पर प्रभावी रोक नहीं लगी तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगी। फिलहाल पूरे मामले की निगाहें रुद्रपुर प्रयोगशाला की रिपोर्ट पर टिकी हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित उत्पाद गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं। यदि नमूने मानकविहीन पाए जाते हैं तो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत संबंधित पक्षों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।पृष्ठभूमि: पतंजलि उत्पादों को लेकर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
फैक्ट फाइल: पतंजलि उत्पादों पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
1. उत्तराखंड में घी का सैंपल दो लैब में फेल पिथौरागढ़ में वर्ष 2020 में लिए गए पतंजलि गाय के घी के सैंपल को पहले रुद्रपुर स्थित राज्य खाद्य प्रयोगशाला और बाद में गाजियाबाद की केंद्रीय प्रयोगशाला में जांच के दौरान मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। मामले में वर्ष 2025 में अदालत ने पतंजलि पर एक लाख रुपये, जबकि वितरक और विक्रेता पर कुल 40 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
2. रक्षा मंत्रालय की कैंटीनों से हटाया गया था आंवला जूस वर्ष 2017 में रक्षा मंत्रालय के कैंटीन स्टोर्स डिपार्टमेंट (CSD) ने पतंजलि के आंवला जूस को बिक्री से हटाने का निर्णय लिया था। कारण यह था कि राज्य लैब की प्रतिकूल रिपोर्ट के बाद केंद्रीय खाद्य प्रयोगशाला ने भी उत्पाद को उपभोग के लिए अनुपयुक्त बताया था।
3. सरसों के तेल की गुणवत्ता पर भी उठे थे सवाल राजस्थान में खाद्य सुरक्षा जांच के दौरान पतंजलि के सरसों तेल के नमूने को भी सब-स्टैंडर्ड श्रेणी में पाए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी।
4. 2024 में सुप्रीम कोर्ट की फटकार भ्रामक विज्ञापनों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि और उसके शीर्ष प्रबंधन को कड़ी फटकार लगाई थी। न्यायालय की कार्रवाई के बाद सार्वजनिक माफीनामे भी प्रकाशित किए गए थे।



