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IMA की पासिंग आउट परेड में इतिहास रचा गया, पहली बार 9 महिला कैडेट्स बनीं सेना की अधिकारी

प्रेरित करने वाली हैं नवयुवा महिला सैन्य अफसरों की कहानी

Rajkumar Dhiman, Dehradun: भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) की 158वीं पासिंग आउट परेड कई मायनों में यादगार बन गई। अकादमी के इतिहास में पहली बार प्रशिक्षण पूरा करने वाली 9 महिला कैडेट्स ने पुरुष कैडेट्स के साथ कदमताल करते हुए ‘अंतिम पग’ पार किया और भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में अपनी नई यात्रा शुरू की। इस उपलब्धि को भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

इन नव नियुक्त अधिकारियों में हरियाणा की श्रीति दक्ष और शनन डाका विशेष रूप से चर्चा में रहीं। दोनों ने अपने परिवार की सैन्य परंपराओं से प्रेरणा लेकर देशसेवा का मार्ग चुना और अब सेना की वर्दी पहनकर अपने सपने को साकार किया है।

सैन्य माहौल ने श्रीति दक्ष को दी प्रेरणा
हरियाणा के बहादुरगढ़ की रहने वाली 23 वर्षीय श्रीति दक्ष उन महिला कैडेट्स में शामिल हैं, जिन्होंने IMA के पहले महिला कैडेट बैच का हिस्सा बनकर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज कराया।

श्रीति का परिवार लंबे समय से रक्षा सेवाओं से जुड़ा रहा है। उनके पिता योगेश कुमार दक्ष भारतीय वायुसेना में विंग कमांडर के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं, जबकि उनकी बड़ी बहन कृति दक्ष वर्तमान में भारतीय वायुसेना में फ्लाइट लेफ्टिनेंट के रूप में सेवाएं दे रही हैं। ऐसे परिवेश में पली-बढ़ीं श्रीति के लिए देशसेवा केवल एक करियर विकल्प नहीं बल्कि एक प्रेरणा रही।

श्रीति ने बताया कि परिवार के सदस्यों को वर्दी में देश की सेवा करते देख उनके भीतर भी सेना में शामिल होने का संकल्प मजबूत हुआ। उन्होंने कहा कि उनके पिता और बहन हमेशा मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत रहे हैं।

शिक्षा में भी दिखाई उत्कृष्टता
सैन्य प्रशिक्षण से पहले श्रीति ने पढ़ाई में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं। उन्होंने दसवीं में 10 सीजीपीए और बारहवीं की कॉमर्स स्ट्रीम में 99 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। शैक्षणिक सफलता के बावजूद उन्होंने सेना में करियर बनाने का निर्णय लिया और अब अधिकारी बनकर अपने लक्ष्य तक पहुंच गई हैं।

उनका कहना है कि प्रशिक्षण के दौरान महिला और पुरुष कैडेट्स के लिए समान मानक रहे। यही कारण है कि यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो रक्षा सेवाओं में करियर बनाना चाहती हैं।

परिवार के लिए गौरव का क्षण
श्रीति की सफलता पर उनके परिवार में खुशी का माहौल है। उनके दादा रामफल दक्ष ने इसे परिवार के लिए गर्व का अवसर बताया। उन्होंने कहा कि पहले उनके बेटे ने वायुसेना में अधिकारी बनकर परिवार का नाम रोशन किया और अब दोनों पोतियां भी रक्षा सेवाओं में अधिकारी के रूप में देश की सेवा कर रही हैं। श्रीति की मां अंजू दक्ष नोएडा के एक विद्यालय में इतिहास विभाग की प्रमुख हैं। परिवार का मानना है कि देशसेवा की भावना ने ही बेटियों को इस मुकाम तक पहुंचाया है।

युवतियों को दिया आत्मविश्वास का संदेश
सेना में अधिकारी बनने के बाद श्रीति ने युवतियों से अपने सपनों पर विश्वास रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि मेहनत, अनुशासन और स्पष्ट लक्ष्य के साथ कोई भी चुनौती कठिन नहीं रहती। उनके अनुसार महिलाओं की क्षमताएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं।

शनन डाका ने कायम रखी पारिवारिक सैन्य विरासत
पहले महिला बैच का हिस्सा बनीं शनन डाका की कहानी भी प्रेरणादायक है। उन्होंने बताया कि उनके पिता और दादा दोनों भारतीय सेना में रह चुके हैं। बचपन से सैन्य वातावरण देखने के कारण सेना में शामिल होने का सपना उनके मन में काफी पहले से था।

शनन के अनुसार परिवार की परंपरा और देशसेवा की भावना ने उन्हें इस दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि सेना की वर्दी पहनना उनके लिए सम्मान और जिम्मेदारी दोनों का विषय है।

ऐतिहासिक बैच का हिस्सा बनने पर गर्व
शनन ने कहा कि IMA के इतिहास में पहले महिला कैडेट बैच का हिस्सा बनना उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। उनके मुताबिक यह केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं बल्कि उन तमाम महिलाओं के लिए प्रेरणादायक क्षण है जो सशस्त्र बलों में अपना भविष्य देखती हैं।

युवाओं के नाम संदेश
पासिंग आउट परेड के बाद शनन ने युवाओं को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता और समर्पण, अनुशासन तथा निरंतर प्रयास ही व्यक्ति को मंजिल तक पहुंचाते हैं।

नए दौर का संकेत
IMA की 158वीं पासिंग आउट परेड में 9 महिला कैडेट्स का अधिकारी बनना भारतीय सैन्य इतिहास की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। यह न केवल अकादमी के लिए ऐतिहासिक क्षण है, बल्कि सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और बदलती सोच का भी मजबूत संकेत माना जा रहा है।

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