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सिल्क्यारा टनल में फिर हादसा: शॉटक्रीट लाइनिंग का ब्लॉक गिरने से झारखंड के 21 वर्षीय श्रमिक की मौत

सुरंग के 900 मीटर भीतर हुआ हादसा, लक्ष्य से बहुत पीछे चल रही परियोजना

Rajkumar Dhiman, Dehradun: उत्तरकाशी जिले की सिल्क्यारा-बड़कोट सुरंग परियोजना में बुधवार तड़के एक बार फिर हादसा हो गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार रात करीब दो बजे बड़कोट साइड से लगभग 900 मीटर अंदर सुरंग की कंक्रीट लाइनिंग का एक हिस्सा टूटकर नीचे गिर गया। इसकी चपेट में आने से झारखंड निवासी 21 वर्षीय श्रमिक नरेश की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक का शव पोस्टमार्टम के लिए नौगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया है।

सिल्क्यारा सुरंग का निर्माण कार्य कर रही नवयुग कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर श्रीराम ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि मृतक श्रमिक झारखंड का रहने वाला था और हादसे के बाद उसे तत्काल बाहर निकाला गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।

क्या होता है शॉटक्रीट, जिसकी लाइनिंग का हिस्सा गिरा?
टनल निर्माण में पहाड़ की खुदाई के बाद उसकी दीवारों और छत को मजबूत करने के लिए सीमेंट, रेत और विशेष मिश्रण को उच्च दबाव से स्प्रे किया जाता है। इसे तकनीकी भाषा में शॉटक्रीट (Shotcrete) कहा जाता है।

इसे आम भाषा में समझें तो यह सुरंग की “कंक्रीट की सुरक्षा परत” होती है, जो चट्टानों को टूटकर गिरने से रोकती है। जब इस परत का कोई हिस्सा टूटकर गिर जाता है तो उसे लाइनिंग फेलियर या लाइनिंग ब्लॉक फॉल कहा जाता है। यह सुरंग निर्माण के दौरान सबसे गंभीर जोखिमों में से एक माना जाता है।

हादसा कहां हुआ?
प्रारंभिक सूचना के अनुसार दुर्घटना बड़कोट पोर्टल की तरफ से लगभग 900 मीटर अंदर हुई। इसका मतलब है कि श्रमिक सुरंग के काफी अंदर निर्माण कार्य में लगे थे, तभी ऊपर लगी कंक्रीट लाइनिंग का एक ब्लॉक टूटकर गिर पड़ा।

हालांकि, दुर्घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि अभी नहीं हुई है। जिला आपदा परिचालन केंद्र (DEOC) उत्तरकाशी के अनुसार मामले की विस्तृत जांच और तथ्यात्मक रिपोर्ट NHIDCL तैयार कर रही है। जांच रिपोर्ट के बाद ही हादसे के कारणों पर आधिकारिक बयान जारी होगा।

यही है वही सिल्क्यारा टनल, जिसने 2023 में दुनिया का ध्यान खींचा था
12 नवंबर 2023 को इसी सिल्क्यारा-बड़कोट सुरंग में निर्माणाधीन हिस्से के ढह जाने से 41 मजदूर अंदर फंस गए थे। सुरंग के प्रवेश द्वार से करीब 200 मीटर अंदर लगभग 60 मीटर लंबा हिस्सा धंस गया था, जिससे मजदूर मलबे के दूसरी तरफ फंस गए थे।

17 दिन चला था देश का सबसे लंबा टनल रेस्क्यू
सिल्क्यारा रेस्क्यू ऑपरेशन भारत के इतिहास के सबसे लंबे और जटिल सुरंग बचाव अभियानों में शामिल हुआ। यह अभियान पूरे 17 दिन चला। इसमें एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना, बीआरओ, राज्य पुलिस, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय टनल विशेषज्ञ तथा सैकड़ों इंजीनियर शामिल हुए थे।

शुरुआत में अमेरिकी ऑगर मशीन से मलबे में ड्रिलिंग की गई, लेकिन मशीन लोहे के सरियों में फंसकर खराब हो गई। इसके बाद अंतिम चरण में तथाकथित “रैट-होल माइनर्स” को बुलाया गया, जिन्होंने हाथों से खुदाई कर स्टील पाइप आगे बढ़ाया और अंततः 41 मजदूरों तक पहुंच बनाई।

28 नवंबर 2023 की रात सभी 41 मजदूरों को 90 सेंटीमीटर चौड़े पाइप के जरिए सुरक्षित बाहर निकाला गया था। पूरे देश ने इस रेस्क्यू ऑपरेशन को लाइव देखा था।

क्या है सिल्क्यारा-बड़कोट टनल परियोजना?
सिल्क्यारा-बड़कोट सुरंग चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह लगभग 4.5 किलोमीटर लंबी दो लेन वाली द्विदिशीय सुरंग है, जो राष्ट्रीय राजमार्ग-134 पर धरासू और यमुनोत्री के बीच यात्रा दूरी और समय दोनों कम करेगी। परियोजना में एक अलग एस्केप पैसेज भी प्रस्तावित है ताकि आपात स्थिति में निकासी संभव हो सके। सुरंग बनने के बाद यमुनोत्री धाम जाने वाले यात्रियों को पहाड़ी मोड़ों और भूस्खलन प्रभावित हिस्सों से राहत मिलने की उम्मीद है।

फिर उठे सुरक्षा पर सवाल
2023 की सुरंग दुर्घटना के बाद देशभर में निर्माणाधीन सुरंगों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे थे और कई परियोजनाओं की सुरक्षा समीक्षा कराई गई थी। अब उसी परियोजना में एक बार फिर श्रमिक की मौत ने निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों, भूगर्भीय परिस्थितियों और लाइनिंग गुणवत्ता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

फिलहाल सभी की नजर NHIDCL की जांच रिपोर्ट पर है, जो यह स्पष्ट करेगी कि यह हादसा तकनीकी खामी, भूगर्भीय दबाव, निर्माण प्रक्रिया की त्रुटि या किसी अन्य कारण से हुआ।

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