अंकिता हत्याकांड में जेल से बाहर नहीं आएंगे पुलकित आर्य समेत तीनों दोषी, हाई कोर्ट ने नहीं दी राहत
तीनों की ओर से कहा गया- निर्दोष हैं और साजिश के तहत फंसाया गया

Amit Bhatt, Dehradun: उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में दोषी ठहराए जा चुके मुख्य अभियुक्त पुलकित आर्य समेत तीनों अभियुक्तों को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। हाई कोर्ट ने सोमवार को तीनों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई की, लेकिन कोई राहत नहीं दी। न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 अगस्त की तारीख तय की है। उस दिन अभियोजन और शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से जमानत याचिकाओं पर अपना पक्ष रखा जाएगा।
सोमवार को खंडपीठ के समक्ष मुख्य अभियुक्त पुलकित आर्य, रिसॉर्ट प्रबंधक सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई हुई। तीनों की ओर से अधिवक्ताओं ने बचाव में दलीलें पेश कीं। उनका कहना था कि तीनों निर्दोष हैं और अभियोजन पक्ष ने उन्हें जबरन मामले में फंसाया है। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि मामले में उनके विरुद्ध पेश किए गए तथ्य और साक्ष्य उन्हें दोषी साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। अधिवक्ताओं ने उन वाट्सएप संदेशों की सत्यता पर भी सवाल उठाया, जिनके आधार पर अभियोजन की कहानी को आगे बढ़ाया गया। बचाव पक्ष के अनुसार ये संदेश सत्यापित नहीं हैं और साजिश के तहत तैयार किए गए हैं।
ट्रायल कोर्ट ने तीनों को सुनाई है उम्रकैद
मामले में 30 मई 2025 को कोटद्वार की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रीना नेगी की अदालत ने फैसला सुनाया था। कोर्ट ने वनंतरा रिसॉर्ट के स्वामी और पूर्व भाजपा नेता के पुत्र पुलकित आर्य को भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 201 और 354(ए) के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। वहीं रिसॉर्ट के प्रबंधक सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को धारा 302 और 201 के तहत आजीवन कारावास तथा साक्ष्य मिटाने का दोषी करार दिया गया था। तीनों ने ट्रायल कोर्ट के इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। उनकी अपील पर सुनवाई अभी लंबित है।
18 सितंबर 2022 को लापता हुई थी अंकिता
अंकिता भंडारी 18 सितंबर 2022 को ऋषिकेश स्थित वनंतरा रिसॉर्ट से संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुई थी। इसके बाद 24 सितंबर को उसका शव चीला बैराज से बरामद किया गया था। शुरुआत में मामला राजस्व पुलिस के पास रहा, जिसे बाद में नियमित पुलिस को सौंप दिया गया। मामले की जांच के लिए वरिष्ठ आइपीएस अधिकारी पी. रेणुका देवी की अध्यक्षता में एसआइटी गठित की गई थी। एसआइटी ने जांच पूरी करने के बाद आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया था।
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर पूरे उत्तराखंड में व्यापक आक्रोश देखने को मिला था। घटना के विरोध में प्रदेशभर में प्रदर्शन हुए और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग उठी थी। अब हाई कोर्ट में 18 अगस्त को अभियोजन और शिकायतकर्ता पक्ष की दलीलों के बाद तीनों की जमानत याचिकाओं पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।



