
Round The Watch News: देश को झकझोर कर रख देने वाले सौरभ राजपूत हत्याकांड में मेरठ की अदालत ने बुधवार को पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को मृत्युदंड की सजा सुनाई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा द्वितीय ने दोनों को सौरभ की नृशंस हत्या का दोषी मानते हुए कहा, ”अधर्म के काम पर सजा देना धर्म होता है। मुस्कान-साहिल, आप दोनों ने ही सौरभ राजपूत की नृशंस हत्या की है। इसे छोड़ा नहीं जा सकता। इसमें किसी भी तरीके की माफी स्वीकार नहीं होगी।” अदालत ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई। इसके साथ ही भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत 50 हजार रुपये और धारा 238ए के तहत 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। हालांकि, मृत्युदंड पर अंतिम फैसला उच्च न्यायालय और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
सजा सुनाए जाने के दौरान जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये अदालत से जोड़ा गया था। फैसला सुनते ही दोनों फूट-फूटकर रोने लगे। सजा सुनाने से पहले न्यायाधीश ने मुस्कान से पूछा कि वह अपने पति सौरभ राजपूत की हत्या में दोषी है, तो क्या सजा चाहती है। इस पर मुस्कान ने कहा, ”मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।” इसके बाद वह खामोश हो गई। साहिल से भी यही सवाल किया गया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया।
नीले ड्रम में छिपाया था शव
सौरभ राजपूत की हत्या तीन मार्च 2025 को की गई थी। अभियोजन के अनुसार, मुस्कान और साहिल ने हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने के लिए शव के पांच टुकड़े किए और उन्हें नीले ड्रम में भर दिया। इसके बाद ड्रम में सीमेंट का घोल डाल दिया गया था। मामला सामने आने के बाद देशभर में इसकी चर्चा हुई और मुकदमे की सुनवाई पर लोगों की नजरें टिकी रहीं।
फैसला आने के बाद सौरभ की मां भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि उन्हें शांति से न्याय मिला है। वहीं, मेरठ कोर्ट के बाहर अधिवक्ताओं ने लड्डू बांटकर फैसले पर प्रतिक्रिया दी। अधिवक्ता कृष्ण कुमार दुबे ने इसे महत्वपूर्ण फैसला बताते हुए कहा कि अदालत ने दोनों दोषियों को मृत्युदंड सुनाया है। उन्होंने कहा कि पूरे देश की नजर इस मामले पर थी।
हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक जाएगी फाइल
जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) केके चौबे ने बताया कि फैसले को लगभग एक सप्ताह बाद मृत्युदंड की पुष्टि के लिए हाईकोर्ट भेजा जाएगा। हाईकोर्ट से पुष्टि होने पर मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा सकता है। इसके बाद दोषियों के पास राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दाखिल करने का विकल्प भी रहेगा। उन्होंने बताया कि पूरी प्रक्रिया में दो से तीन वर्ष या इससे अधिक समय भी लग सकता है। उच्च न्यायालय या सुप्रीम कोर्ट से सजा बदलने अथवा राष्ट्रपति से दया मिलने की स्थिति में फांसी नहीं होगी।
मेरठ में महिला को पहली बार मृत्युदंड
वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के अनुसार, मेरठ की चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में आखिरी बार वर्ष 1975 में मुजफ्फरनगर के करम सिंह को फांसी दी गई थी। उसके बाद यहां किसी को फांसी नहीं दी गई। यदि मुस्कान को मृत्युदंड पर अंतिम मुहर लगने के बाद फांसी दी जाती है, तो वह मेरठ जेल में फांसी पाने वाली पहली महिला होगी। साहिल के मामले में यह जेल में किसी पुरुष को फांसी दिए जाने का दूसरा मामला होगा। वर्ष 2014 में निठारी कांड के दोषी सुरेंद्र कोली को यहां फांसी देने की तैयारी की गई थी, लेकिन अंतिम समय में प्रक्रिया रोक दी गई थी।
23 साल का न्यायिक अनुभव
मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड सुनाने वाले जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा द्वितीय का जन्म दो जुलाई 1971 को उत्तर प्रदेश के मऊ में हुआ था। उन्होंने बीए, एलएलबी और एलएलएम की पढ़ाई की। 31 मई 2003 को सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के रूप में न्यायिक सेवा शुरू की। लगभग 23 वर्ष के सेवाकाल में वह गाजीपुर, अलीगढ़, गोरखपुर, कानपुर और मिर्जापुर सहित कई जिलों में तैनात रहे। नवंबर 2024 में वह मिर्जापुर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश बने और 21 मई 2026 से मेरठ में तैनात हैं।
मेरठ के एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने कहा कि सौरभ की हत्या के मामले में जिन लोगों ने जांच और कार्रवाई में अच्छा काम किया, वे प्रशंसा के पात्र हैं। उन्होंने बताया कि संबंधित पुलिसकर्मियों और अधिकारियों को प्रशस्ति पत्र तथा नकद पुरस्कार देने की कार्रवाई की जाएगी।



