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ऊर्जा निगम कर्मचारी को रिश्वतखोरी में सश्रम कारावास

एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए विजिलेंस की टीम ने किया था गिरफ्तार

देहरादून: बिजली का बिल कम कराने की एवज में एक लाख रुपये की रिश्वत मांगने वाले बिजली कर्मी को चार वर्ष सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। साथ ही एक अन्य धारा में भी तीन वर्ष का सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड है। वर्ष 2010 के इस मामले में एडीजे सप्तम अंजलि नौलियाल की भ्रष्टाचार निवारण विशेष अदालत ने यह सजा सुनाई थी।विजिलेंस के अभियोजन अधिकारी अनुज साहनी ने बताया कि सरकार लोक कल्याण आश्रम हरकी पौड़ी हरिद्वार के प्रबंधक संजीव दीक्षित ने छह फरवरी 2010 को एक शिकायती प्रार्थना विजिलेंस देहरादून को दिया था। जिसमें कहा कि विद्युत वितरण केंद्र भूपतवाला में आंकिक के तौर पर कार्यरत महेंद्र कुमार भार्गव निवासी अंबेडकर नगर मोहल्ला ज्वालापुर हरिद्वार ने उनसे रिश्वत मांगी है। आश्रम के विद्युत बिलों की धनराशि को संशोधित कर कम करने की एवज में एक लाख रुपये मांगे गए हैं और वे आरोपित को पकड़वाना चाहते हैं। जिस पर विजिलेंस की ट्रैप टीम ने दो स्वतंत्र साक्षीगणों की उपस्थिति में आठ फरवरी 2010 को आरोपित महेंद्र कुमार भार्गव को एक लाख रुपये रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। विवेचना पूर्ण कर नियमानुसार आरोप पत्र सात अप्रैल 2010 को विशेष न्यायालय भष्ट्राचार निवारण अधिनियम देहरादून में दाखिल किया गया। कोर्ट ने गुरुवार को मामले में आरोपित के विरुद्ध दोष तय कर सजा सुनाई। धारा-7 के आरोप में तीन साल का सश्रम कारावास व 50 हजार का अर्थदंड और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-1988 में चार वर्ष का सश्रम कारावास व 50 हजार का अर्थदंड की सजा सुनाई गई। दोनों सजा एक साथ चलेंगी।

 

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