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जीटीएम बिल्डर 10.75% की दर से लौटाएगा 30.10 लाख

रेरा ने दिया आदेश, रकम लौटाने को 45 दिन का समय, 25 हजार की पेनाल्टी भी लगाई

Amit Bhatt, Dehradun: उत्तराखंड रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने जीटीएम बिल्डर को 30.10 लाख रुपये की धनराशि ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। यह राशि फ्लैट बुक कराने वाले व्यक्ति को अदा की जाएगी। इसके अलावा रेरा ने बिल्डर पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

जीटीएम बिल्डर के विरुद्ध दर्ज शिकायत के क्रम में रेरा का आदेश।

रेरा सदस्य अमिताभ मैत्रा के आदेश के मुताबिक शिकायत अनुराधा श्रीवास्तव व कमल कुमार ने जीटीएम बिल्डर की फॉरेस्ट लवाना (जीटीएम फॉरेस्ट एंड हिल्स) के विरुद्ध दर्ज कराई। जिसमें कहा गया है कि उन्होंने परियोजना में नवंबर 2014 में टू-बीएचके का फ्लैट बुक कराया था। इसके एवज में उन्होंने समय के भीतर बिल्डर को 30 लाख 10 हजार रुपये का पूरा भुगतान भी कर दिया था। तय किया गया था कि जून 2017 तक फ्लैट पर कब्जा दे दिया जाएगा।

तय समय के भीतर फ्लैट पर कब्जा देने में असफल रहने पर बिल्डर ने अनुराधा श्रीवास्तव व कमल कुमार को विकल्प दिया कि या तो वह कब्जे के लिए तैयार एक-बीएचके फ्लैट या तीन-बीएचके फ्लैट का विकल्प चुन लें या वह पूरी धनराशि छह प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने को तैयार हैं। इन विकल्प में से किसी का भी चुनाव न करने पर यह माना जाएगा कि वह बिना शर्त बुक किए गए फ्लैट के तैयार होने तक इंतजार करने को तैयार हैं।

इनमें से कोई भी विकल्प न अपनाने पर बिल्डर ने मान लिया कि वह इंतजार को तैयार हैं। वहीं, प्रकरण में अनुराधा और कमल ने रेरा में शिकायत दर्ज कराकर फ्लैट बुकिंग की पूरी धनराशि 20 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने की मांग उठाई।
रेरा के समक्ष की गई सुनवाई में बिल्डर ने कहा कि कंपनी की शर्तों के मुताबिक किसी भी विकल्प का चुनाव न किए जाने पर बिना शर्त फ्लैट के इंतजार के विकल्प को अंतिम माना गया है।

हालांकि, रेरा ने इस तरह की शर्त को खारिज कर दिया। सुनवाई में रेरा सदस्य ने पाया कि बिल्डर तय समय के भीतर फ्लैट पर कब्जा देने में असफल रहा है। लिहाजा, आदेश दिया गया कि बुकिंग की पूरी राशि 30.10 लाख रुपये को 45 दिन के भीतर 10.75 प्रतिशत वार्षिक व्याज की दर से लौटाया जाएगा। इसके साथ ही जुर्माने के 25 हजार रुपये 15 दिन के भीतर रेरा के पक्ष में जमा कराने को कहा गया है। साथ ही रेरा ने व्यवस्था दी कि यदि शिकायतकर्ता किसी भी तरह का हर्जाना चाहते हैं तो वह न्याय निर्णायक अधिकारी के समक्ष अलग से शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

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