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मुर्गा दाना से बना रहे थे हर्बल दवा, एसटीएफ ने फैक्ट्री सील की

एसटीएफ उत्तराखंड ने नकली हर्बल दवा बनाने वाले गैंग का किया पर्दाफाश, सितारगंज के एक मकान में चल रही थी फैक्ट्री

Amit Bhatt, Dehradun: मुर्गा दाना से डोडा बर्फी बनाने का मामला इसी साल जनवरी माह में उत्तराखंड जिले के किच्छा (शहदौरा) क्षेत्र में सामने आया था। अब इस तरह की बात सामने आ रही है कि इसी जिले के सितारगंज क्षेत्र में नकली हर्बल दवाओं को बनाने के लिए मुर्गा दाना का प्रयोग किया जा रहा था। क्योंकि, उत्तराखंड एसटीएफ ने सितारगंज के जिस भवन में छापेमारी कर नकली फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया, वहां मुर्गा दाना लिखे कट्टे भी पाए गए। मौके से सैकड़ों डिब्बे पैक्ड दवाएं, 500 कैप्सूल, दवा बनाने का कच्चा माल, हर्बल लिखा चूर्ण, ड्रॉप और उपकरण भी बरामद किए। एसटीएफ की टीम ने फैक्ट्री को सील कर नकली हर्बल दवा बनाने के आरोप में उदयपुर, पीलीभीत (उत्तर प्रदेश) निवासी सलमान व फैजान के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

आयुष अग्रवाल, एसएसपी, एसटीएफ उत्तराखंड

एसएसपी एसटीएफ आयुष अग्रवाल के मुताबिक एसटीएफ को सितारगंज में अवैध दवाई फैक्ट्री संचालित होने की सूचना मिली थी। जिस पर कुमाऊं टीम को आवश्यक निर्देश जारी किए गए। कल शाम सीओ एसटीएफ सुमित पांडे ने नेतृत्व में टीम ने सितारगंज के थारु गौरीखेड़ा क्षेत्र में स्थानीय प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग को साथ लेकर एक घर पर छापेमारी की। वहां पर हर्बल दवाओं के नाम पर भारी मात्रा में चूर्ण, कैप्सूल, पाउडर मिला। दवाओं में किसी ब्रांड के रैपर, टैग नही लगे थे। इन दवाओं को ताकत बढ़ाने और विभिन्न बीमारियों के इलाज के नाम पर ऑनलाइन बेचा जा रहा था।

मुर्गा दाना चूर्ण को कैप्सूल में भर रहे थे
एसएसपी एसटीएफ आयुष अग्रवाल ने बताया मौके से टीम को मुर्गा लिखे हुए चूर्ण के कट्टे मिले हैं, इसी चूर्ण को प्लास्टिक के कैप्सूलों में भरा गया है। इसकी गंभीरता को देखते हुए संबंधित विभाग ने दवाओं के सैंपल ले लिए हैं। हर्बल दवा के नाम पर ऑनलाइन कारोबार करने वाले आरोपितों ने इस मकान को किराए पर लिया था। वह चार माह से बिना लाइसेंस किराए इस मकान पर दवाओं को बनाकर ऑनलाइन व्यापार कर रहे थे।


इस फैक्ट्री पर नकली हर्बल दवा बनाने के आरोप में की गई सीलिंग।

बिना लाइसेंस की नकली दवा के वसूल रहे थे 1575 रुपये
आरोपित सलमान और फैजान विभिन्न बीमारियों के इलाज में पार्सल से दवा भेजकर मोटी रकम वसूली जा रही थी, एक डिब्बे के 1575 रु. वसूले जाते थे। गंभीर यह कि सभी प्रकार की बीमारियों में एक ही प्रकार की दवा भेजी जाती थी। इन दवाओं के संबंध में फोरेसिंक जांच से ही वास्तविकता सामने आ पाएगी। फिलहाल बरामद दवाइयों और मकान को सील कर दिया गया है।

बरामदगी का विवरण
1-500 डिब्बे पैक्ड दवाइयां
2-500 कैप्सूल
3-3 कट्टे में रॉ-मैटेरियल
4-2 मशीनें

पर्दाफाश करने वाली एसटीएफ टीम
1.निरीक्षक एम0पी0 सिंह
2.उ0नि0 विपिन जोशी
3.उप निरीक्षक के0जी0मठपाल
4.अ0उ0 निरीक्षक प्रकाश भगत
5.मुख्य आरक्षी जगपाल सिंह
6.मुख्य आरक्षी गोविंद सिंह
7.मुख्य आरक्षी किशोर कुमार
8.मुख्य आरक्षी रविंद्र बिष्ट
9.मुख्य आरक्षी महेन्द्र गिरि
10.आरक्षी इसरार अहमद
11.आरक्षी अमरजीत सिंह

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