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बड़ी खबर: समान नागरिक संहिता पर उत्तराखंड कैबिनेट की मुहर, विधानसभा की राह साफ

मुख्यमंत्री धामी ने कहा, भाजपा सरकार वायदे की पक्की, जो कहा उसे करने की तरफ तेजी से बढ़ते जा रहे

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Amit Bhatt, Dehradun: लिव इन रिलेशनशिप के लिए पंजीकरण की अनिवार्यता, शादी-तलाक की व्यवस्था सभी धर्मों के व्यक्तियों पर समान रूप से लागू करने जैसे तमाम नियमों वाले समान नागरिक संहिता की राह साफ हो गई है। समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड) के विधेयक के ड्राफ्ट पर उत्तराखंड कैबिनेट ने अपनी मुहर लगा दी है। अब विधेयक को सोमवार से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में रखा जाएगा। ताकि इसे जल्द से जल्द लागू कराया जा सके।
उत्तराखंड कैबिनेट की बैठक समान नागरिक संहिता के ड्राफ्ट पर चर्चा करते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और मंत्रीगण।

समान नागरिक संहिता विधेयक के पर रविवार शाम को मुख्यमंत्री आवास में राज्य कैबिनेट की बैठक में चर्चा के लिए रखा गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता  में आयोजित बैठक में गहन चर्चा के बाद इसे स्वीकृति दे दी गई। इससे पहले उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता के ड्राफ्त  को लंबी कसरत के बाद जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई (सेनि) समिति ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को शुक्रवार को सौंप दिया था। तभी से यह स्पष्ट हो गया था कि इस कानून को लागू करने वाला उत्तराखंड पहला राज्य होगा।

इसके तहत सभी धर्मों में शादी व तालाक के लिए एक ही नियम होगा। साथ ही यूसीसी (समान नागरिक संहिता) लागू होने के बाद लिव इन रिलेशनशिप के लिए पंजीकरण अनिवार्य हो जाएगा। तलाक के बाद भरण पोषण और बच्चों को गोद लेने के लिए सभी धर्मों के लिए एक कानून की संस्तुति की गई है। साथ ही सभी धर्म में विवाह की आयु लड़की के लिए 18 वर्ष अनिवार्य करने का प्रस्ताव किया गया है। किसी भी धर्म में अब एक पति व एक पत्नी का नियम लागू होगा। हालांकि, प्रदेश की जनजातियों को इस कानून की परिधि से बाहर रखा गया है।
समिति की संस्तुतियों के अनुसार, बंटवारे में लड़की का समान अधिकार सभी धर्मों में लागू रहेगा। अन्य धर्म या जाति में विवाह करने पर भी लड़की के अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकेगा। लिव इन रिलेशनशिप के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। समिति ने लव जिहाद, विवाह समेत महिलाओं और उत्तराधिकार के अधिकारों के लिए सभी धर्मों के लिए समान अधिकार को ध्यान में रखा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि भाजपा सरकार अपने वायदे की पक्की है। उत्तराखंड सभी नागरिकों को समान अधिकार देने वाला पहला राज्य बनने जा रहा है। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू करना प्रदेश की भाजपा सरकार की शीर्ष प्राथमिकता में है। समिति ने बारीकी से अध्ययन कर सभी धर्म और वर्गों की आवश्यकता व प्रदेश की परिस्थितियों के आधार पर यह ड्राफ्ट तैयार किया। सरकार ने अब ड्राफ्ट को भी मंजूरी दे दी है। अब सरकार को इसे लागू करने के लिए कानूनी प्रक्रिया को पूरा करना है।
जस्टिस देसाई की अध्यक्षता में 04 सदस्यीय समिति ने तैयार की संहिता
समान नागरिक संहिता को तैयार करने का श्रेय जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई (सेनि) की अध्यक्षता वाली समिति को जाता है। जिसमें समिति के चार सदस्य जस्टिस प्रमोद कोहली (सेनि), पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह, दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो सुरेखा डंगवाल व सामाजिक कार्यकर्ता मनु गौड़ शामिल रहे। समिति के सचिव की भूमिका रंजन मिश्रा ने निभाई। इसी समिति ने संहिता का ड्राफ्ट मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंपा। यह चार खंडों में है। 20 माह में समिति ने इस कार्य को पूरा किया। इस अवधि में समिति ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों व समुदायों के साथ 72 बैठकों व आनलाइन माध्यम से सुझाव लिए। समिति को 2.33 लाख सुझाव प्राप्त हुए। समिति ने समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट हिंदी व अंग्रेजी में तैयार किया।

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