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देहरादून में इनकम टैक्स ने 1484 करोड़ की संपत्ति का मूल्यांकन किया, सुप्रीम कोर्ट करेगा नीलाम

गोल्डन फॉरेस्ट की संपत्ति के निस्तारण को सुप्रीम कोर्ट ने कार्रवाई की तेज, संपत्तियों पर उत्तराखंड समेत सभी राज्यों को यथास्थिति बनाए रखने के आदेश

Amit Bhatt, Dehradun: गोल्डन फॉरेस्ट की हजारों बीघा भूमि को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश जारी किया है। करीब ढाई दशक से अधिक समय से चले आ रहे गोल्डन फॉरेस्ट का प्रकरण अब संपत्ति की नीलामी की तरफ तेजी से बढ़ता दिख रहा है। समय के साथ गोल्डन फॉरेस्ट की भूमि को सरकारी अधिकारियों की अनदेखी और भूमाफिया के गठजोड़ के चलते खुर्द-बुर्द किया जाता रहा। जमीनें बिकती चली गईं और इनमें निर्माण होते रहे। हालांकि, अब नौबत यह आ गई है कि सुप्रीम कोर्ट कभी भी इनकी नीलामी कर सकता है। ताकि गोल्डन फॉरेस्ट कंपनियों में निवेश करने वाले लोगों को उनका पैसा वापस मिल सके और अन्य सभी लेनदारों के प्रकरणों का निस्तारण भी किया जा सके। लिहाजा, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने गोल्डन फॉरेस्ट प्रकरण की सुनवाई करते हुए उत्तराखंड समेत सभी राज्यों को संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए।

आयकर विभाग की ओर से आंकलित की गई गोल्डन फॉरेस्ट की संपत्ति
संपत्ति की प्रकृति, मूल्य (रु. में)
500 बीघा भूमि क्लिफ एस्टेट मसूरी में, 138.4 करोड़
173 बीघा भूमि स्नोवुडन एस्टेट मसूरी में, 55.9 करोड़
01.9 हेक्टेयर कृषि भूमि आर्केडिया ग्रांट में, 6.78 करोड़
118.16 वर्गमीटर भूमि आशुतोष नगर ऋषिकेश में, 20.08 लाख
12.34 हेक्टेयर भूमि डांडा लखौंड में विभिन्न स्थल पर, 55.53 करोड़
2.28 एकड़ भूमि सुद्धोवाला में, 2.72 करोड़
0.935 हेक्टेयर भूमि झाझरा व 0.243 हेक्टेयर ईस्टहोप टाउन में, 3.47 करोड़
0.514 हेक्टेयर कृषि भूमि झाझरा में, 1.51 करोड़
0.143 हेक्टेयर भूमि ईस्टहोप टाउन में, 42.18 लाख
1.437 हेक्टेयर भूमि ईस्टहोप टाउन में, 4.23 करोड़
0.75 हेक्टेयर भूमि नागल हटनाला में, 1.21 करोड़
20.68 हेक्टेयर भूमि सेंट्रल होपटाउन, सुद्धोवाला व झाझरा, 61 करोड़
ऑल सेंट चर्च कैसल एस्टेट मसूरी, 1.53 करोड़
8.242 हेक्टेयर भूमि सुद्धोवाला में, 24.31 करोड़
होटल ड्राइव इन चंबा रोड मसूरी, 6.11 करोड़
होटल ड्राइव इन मायफील्ड एस्टेट मसूरी, 15.22 करोड़
1.10 हेक्टेयर भूमि भैंसवार देहरदून में, 83.06 लाख
कुलड़ी मसूरी में 10 दुकानें, 5.19 करोड़
मायएस्टेट व पेरिस हॉउस एस्टेट मसूरी में आवासीय संपत्ति, 1.31 करोड़
लक्ष्मी भवन एंड कॉटेज मसूरी, 5.23 करोड़
1355 एकड़ भूमि दून के विभिन्न गांवों में सरप्लस घोषित, 1000 करोड़
कुल संपत्ति क्षेत्र, 21 (कुल मूल्य 1484.78 करोड़)

इस दौरान कोर्ट ने संपत्ति के मूल्यांकन को लेकर आयकर विभाग की रिपोर्ट का भी अपडेट लिया और लंबित रिपोर्ट को दाखिल करने के आदेश जारी किए। देहरादून में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने गोल्डन फॉरेस्ट की संपत्तियों का मूल्य करीब 1484.78 करोड़ रुपये आंका है। यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सुपुर्द की जा चुकी है। हालांकि, इसमें सरकार में निहित की गई संपत्तियों का ब्यौरा शामिल नहीं है।इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (आयकर विभाग) के आकलन में देहरादून जिले में 21 क्षेत्रों की संपत्तियों को शामिल किया गया है। इनमें अधिकतर भूमि हैं और कुछ जगह भवन का मूल्यांकन भी किया गया है।

गोल्डन फॉरेस्ट कंपनी पर आयकर विभाग की भी देनदारी है। लिहाजा, संपत्ति के मूल्यांकन के आधार पर सुप्रीम कोर्ट आयकर की बकाया राशि का भुगतान भी करवा सकता है। साथ ही कोर्ट ने संपत्तियों की नीलामी के लिए पैन इंडिया (अखिल भारतीय) आधार पर एक साथ प्रक्रिया अपनाने का निर्णय लिया है। ताकि जटिलता से बचा जा सके। कोर्ट के आदेश के मुताबिक नीलामी प्रक्रिया में अभी तक तीन पार्टियां रुचि दिखा चुकी हैं। कोर्ट में उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अवगत कराया कि अन्य पक्षकार भी इसमें शामिल हो सकते हैं।

नीलामी, जहां जैसा है के आधार पर होगी
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि गोल्डन फॉरेस्ट की संपत्तियों की नीलामी जहां जैसा है के आधार पर होगी। इसका आशय यह हुआ कि संपत्ति की जो भी स्थिति होगी, उसे उसी रूप में बोली में शामिल किया जाएगा। यदि कोई भूमि किसी मुकदमेबाजी के अधीन है, तो बोली उसी जोखिम के साथ कराई जाएगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि गोल्डन फॉरेस्ट की संपत्तियों में आगे और जटिलता न आए, इसके लिए संपत्तियों पर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश जारी किए जाते हैं। ऐसे में जिन संपत्तियों (454 हेक्टेयर) को सरप्लस मानकर राज्य सरकार में निहित किया गया है, वहां भी यथास्थिति लागू हो जाएगी। गंभीर यह कि ऐसी भूमि को पूर्ववर्ती त्रिवेंद्र सरकार विभिन्न विभागों को आवंटित भी कर चुकी है। प्रकरण में अगली सुनवाई 31 जुलाई 2024 को होगी।

यह है गोल्डन फॉरेस्ट की जमीन खरीद का प्रकरण
वर्ष 1997-98 में सेबी ने गोल्डन फॉरेस्ट की 111 कंपनियों की ओर से देहरादून समेत देशभर में खरीदी गई हजारों बीघा जमीनों को वित्तीय नियमों का उल्लंघन बताया था। उन्होंने इस बारे में सुप्रीम कोर्ट में मामला दायर किया था। कोर्ट ने गोल्डन फॉरेस्ट कंपनियों के निदेशकों को जमीनों की बिक्री के लिए प्रतिबंधित कर दिया था। साथ ही संपत्ति की जानकारी एकत्रित करने के लिए वर्ष 2003 में दिल्ली हाईकोर्ट के रिटायर्ड चीफ जस्टिस केटी थॉमस की अध्यक्षता में एक समिति गठित कर दी थी। ताकि संपत्ति की नीलामी कराकर निवेशकों का पैसा लौटाया जा सके। कई संपत्तियों को अब तक नीलाम कर उसकी धनराशि सुप्रीम कोर्ट में जमा भी कराई जा चुकी है।

दूसरी तरफ तत्कालीन उप जिलाधिकारी सदर ने जेडए एक्ट में एक व्यक्ति को 12.5 एकड़ भूमि की ही खरीद करने के अधिकार नियम के उल्लंघन पर 21 अगस्त 1997 को सरप्लस जमीनों को सरकार में निहित कर दिया। गोल्डन फॉरेस्ट की अपील पर उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद ने एसडीएम के आदेश को निरस्त कर दिया था। इसके खिलाफ सरकार नैनीताल हाईकोर्ट पहुंची। वर्ष 2005 में नैनीताल हाईकोर्ट ने गोल्डन फॉरेस्ट के हक में निर्णय दिया। तब सरकार ने वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट में अपील की। उसी साल सुप्रीम कोर्ट ने प्रकरण को उत्तराखंड राजस्व परिषद के सुपुर्द कर दिया। वर्ष 2015-16 में परिषद ने उसी रूप में प्रकरण जिलाधिकारी कोर्ट को सुनवाई के लिए सौंप दिया। हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट ने संपत्तियों के निस्तारण के लिए नीलामी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई तेज कर दी है। जिससे भूमाफिया, तमाम प्रॉपर्टी डीलर और संलिप्त रहे अधिकारियों में खलबली की स्थिति है।

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