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ये आईएएस रद्दी की टोकरी में डालते हैं जनता की फरियाद

राज्यपाल के सचिव वरिष्ठ आईएएस रविनाथ रमन की फिसली जुबान, भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी (उत्तराखंड) के कार्यालय में अवैध कब्जे की शिकायत पर लौटाया बैरंग

Rajkumar Dhiman, Dehradun: छोटे से प्रदेश उत्तराखंड की नैकरशाही की इच्छाशक्ति और मंशा पर नए सिरे से समीक्षा की जरूरत महसूस की जाने लगी है। अभी उत्तराखंड के लोग राज्य स्थापना की रजत जयंती के जश्न में डूबे ही थे कि एक वरिष्ठ आइएएस अधिकारी की सोच और प्रतिक्रिया ने जेहन में जोर की चोट कर दी। एक फरियाद को सुनने और उसे समझने की जगह अधिकारी ने कह दिया कि ऐसी शिकायतों को वह रद्दी की टोकरी में डाल देते हैं। यह वरिष्ठ आइएएस अधिकारी भी और कोई नहीं, बल्कि प्रदेश के संवैधानिक मुखिया राज्यपाल के सचिव रविनाथ रमन हैं।

रविनाथ रमन, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी (उत्तराखंड)

दरअसल, सोमवार को एक प्रतिनिधिमंडल भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी की उत्तराखंड शाखा के कार्यालय में अवैध कब्जे और मनमानी की शिकायत लेकर सचिव रविनाथ रमन से मिलने पहुंचा था। इस मुलाकात का आग्रह भी धर्मपुर क्षेत्र के विधायक विनोद चमोली ने किया था। पहले तो सचिव ने शिकायतकर्ताओं को 02 घंटे बाहर बैठाए रखा और जब बुलाया भी तो सीधे मुहं तक बात नहीं की। …बल्कि यहां तक कह डाला कि ऐसी शिकायतों को वह रोज रद्दी की टोकरी में डाल देते हैं।

सचिव साहब के बिगड़े बोल पर जब शिकायतकर्ताओं ने नाराजगी जताई तो रविनाथ रमन ने अपनी बात को संभालते हुए सफाई देने वाले अंदाज में कहा कि लिटरली वह शिकायतों को रद्दी में नहीं डालते हैं (मतलब कि कार्रवाई/कार्यवाही नहीं करते हैं)। इस मामले में भी उन्होंने साफ किया कि वह कुछ करने वाले नहीं हैं। लिहाजा, शिकायतकर्ता उपेक्षित भाव से वापस लौट आए।

खैर, यह तो रही वरिष्ठ आइएएस अधिकारी की बेरुखी और जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कहानी। अब आपको बताते हैं कि शिकायतकर्ता क्यों सचिव राज्यपाल से मिलने पहुंचे थे। आपको यह कहानी उसी शिकायती पत्र के हवाले से बताते हैं, जिसे सचिव रविनाथ रमन ने रद्दी की टोकरी में डालने लायक बताया।

शिकायत के अनुसार, अवगत कराना है कि, भारतीय रेडक्रास समिति उत्तराखंड (राज्य शाखा) की राज्य प्रबंध समिति (State Managing Committee) की बैठक दिनांक 06 नवंबर, 2025 को विधिवत् रूप से सम्पन्न हुई, जिसमें राज्य निर्वाचित प्रतिनिधियों की उपस्थिति में नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। जिसमें चेयरमैन के पद पर जिला उत्तरकाशी से निर्वाचित सदस्य ओंकार बहुगुणा व वाईस चेयरमैन के पद पर जिला अल्मोड़ा से निर्वाचित सदस्य मनोज सनवाल निर्वाचित हुए हैं व कोषाध्यक्ष के पद पर रेडक्रास गाइड लाइन के अनुसार पूर्व से कार्यरत् मोहन खत्री को यथावत रखा गया है।

बैठक की कार्यवाही का संपूर्ण विवरण पूर्व में प्रेषित किया जा चुका है। उक्त समिति ही वर्तमान में संस्था की वैधानिक एवं अधिकृत कार्यकारिणी है। संस्था के राज्य कार्यालय (देहरादून) की चाबी एवं अभिलेख अभी भी पूर्व पदाधिकारी नरेश चौधरी के कब्जे में है। कार्यालय में अवैधानिक रूप से ताले लगे होने के कारण कर्मचारी अपने कक्ष में जाकर दैनिक कार्यों का संपादन भी नहीं कर पा रहे हैं। रेडक्रास समिति स्वायत्त संस्था होने के बावजूद भी वर्तमान में निर्वाचित कार्यकारिणी, कार्यालय से नियमित कार्य सम्पादित नहीं कर पा रही है। अवगत कराना है कि वर्तमान परिस्थितियों के दृष्टिगत निम्नलिखित समस्याएं सामने आने लगी हैं।

1. जीएसटी का भुगतान समय पर न होने के कारण लगातार अर्थदंड बढ़ रहा है।
2. टीडीएस का भुगतान समय पर नहीं हो पाया है।
3. कार्यालय के विजली एवं पेयजल के बिलों का भुगतान शीघ्र करना आवश्यक है। अन्यथा उक्त व्यवस्थाओं में व्यवधान आने की आशंका है।
4. आय का मुख्य स्रोत प्रशिक्षण आदि का भुगतान संबंधित फर्मों द्वारा किया जा चुका है, लेकिन कार्यालय बंद होने की दशा में उक्त प्रशिक्षण बाधित हो गए हैं।
5. राज्यपाल महोदय के निर्देशन में संचालित यूथ रेडक्रास गतिविधियों का सफल संचालन में भी बाधा उत्पन्न हो रही है।
6. यूएसडीएमए द्वारा प्रशिक्षणों हेतु दी गई धनराशि से जिले स्तर पर प्रशिक्षण संचालित है, उक्त प्रशिक्षण भी प्रभावित हो रहे हैं।
7. कार्यरत कर्मचारियों का माह अक्टूबर, 2025 के वेतन और ईपीएफ का भुगतान भी नहीं हो पाया है।
8. उक्त के अतिरिक्त अन्य दैनिक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।

लिहाजा, सचिव राज्यपाल को सौंपे गए पत्र में यह भी अवगत कराया गया है कि भारतीय रेडक्रास समिति उत्तराखंड कार्यालय के सफल संचालन के लिए चाबियां उपलब्ध कराने के लिए दिनांक 06 नवंबर, 2025 को भी पत्र प्रेषित किया चुका है। पत्र में अनुरोध किया गया है कि, कार्यालय के सफल संचालन के लिए चाबियां उपलब्ध कराने को प्रशासनिक एवं पुलिस सहयोग प्रदान किया जाए। जिससे वर्तमान कार्यकारिणी निरंतरता एवं पारदर्शिता के साथ कार्यालय का सफल संचालन कर सके।

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